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हमले होंगे या नहीं, इलेक्शन में मिली हार से क्या ईरान पर बदलेगा ट्रंप का रुख?

अमेरिकी कांग्रेस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद क्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करेंगे? जानिए इस युद्ध की संभावनाओं और अमेरिकी सियासी गणित का विश्लेषण।

Donald Trump

डोनाल्ड ट्रंप। (Photo Credit: PTI)

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अमेरिकी कांग्रेस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट और हाउस में करारी हार का सामना करना पड़ा है। दोनों ही सदनों में पार्टी ने बहुमत खो दिया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस में अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। कांग्रेस के ताजा समीकरण डोनाल्ड ट्रंप को मनमानी करने से रोक सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप अपनी मनमानी से रुकेंगे? 

 

ट्रंप की पार्टी को मिली हार पर ईरान तंज कस रहा है। रिपब्लिकन नेता बंट चुके हैं। इजरायल से भी मतभेद सामने आ रहे हैं। गाजा युद्ध और इजरायल के खिलाफ मुखर रहने वाली आवाजें जश्न मना रही हैं। लोगों को उम्मीद है कि इन नतीजों के बाद ट्रंप की युद्ध वाली सनक खत्म होगी। ईरान पर हमले टल जाएंगे। क्या सच में ऐसा होने की उम्मीद है? आइये इसी प्रश्न का उत्तर तलाशने का प्रयास करते हैं।

 

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क्या ईरान पर हमला टलेगा?

अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में ईरान युद्ध का व्यापक असर हुआ है। यह बात डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी जेडी वैंस ने भी मानी है। विश्लेशकों का मानना है कि चुनाव में युद्ध के कारण मिली हार ट्रंप को ईरान पर हमला करने के लिए उकसा सकती है। एक वजह यह भी है कि अगली कांग्रेस का शपथ ग्रहण समारोह 3 जनवरी को है। ट्रंप के पास तब तक ईरान पर हमला करके युद्ध को खत्म करने का विकल्प है। इस बीच ट्रंप ने ईरान पर बड़े मिलिट्री हमले का संकेत भी दिया है।

क्या ट्रंप पर अंकुश लग सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि वियतनाम युद्ध को खत्म करने वाली रणनीति डेमोक्रेट्स नई कांग्रेस में अपना सकते हैं। कांग्रेस सदस्य राष्ट्रपति की युद्ध जारी रखने की ताकत पर अंकुश लगा सकते हैं। सबसे प्रभावी तरीका फंडिंग रोक सकते है। जवाब में डोनाल्ड ट्रंप के पास विपक्ष के कानून पर साइन न करने का विकल्प है, लेकिन इसके खातिर ट्रंप को सरकार बंद करना होगा। ये बेहद जोखिम भरा कदम है, क्योंकि इसका ठीकरा भी उन्हीं पर फूटेगा। 

वार पावर्स रेजोल्यूशन आएगा काम?

डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ 1973 में बने वार पावर्स रेजोल्यूशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कानून विदेशी सरजमीं पर सैन्य कार्रवाई के मामले में राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करता है। इसमें कांग्रेस की भूमिका अहम होती है। यहां भी ट्रंप के सामने एक विकल्प है। कानून में प्रावधान है कि राष्ट्रपति होने वाले हमलों को रोक सकते हैं, बशर्ते सैन्य कार्रवाई 60 दिनों में खत्म हो जानी चाहिए।

ट्रंप के वीटो का कैसे निकालेंगे तोड़?

अपने संख्या बल के आधार पर डेमोक्रेट्स ट्रंप पर अंकुश लगाने की भरसक कोशिश करेंगे। चुनाव नतीजों के बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि वह झुकने वाले नहीं है। उन्होंने डेमोक्रेट्स की पॉलिसी के खिलाफ प्रेसिडेंसियल वीटो पावर इस्तेमाल करने की बात कही। यही पर डेमोक्रेट्स का पेंच फंस सकता है। ट्रंप के वीटो को पलटने के लिए हाउस और सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। यह गणित डेमोक्रेट्स के पक्ष में नहीं है।

 

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ईरान के खिलाफ कैसा हो सकता ट्रंप का रुख?

चुनाव नतीजों पर युद्ध के असर वाली बात को ट्रंप ने भी स्वीकार किया। यह भी संकेत दिया कि अगर दोबारा हमला करने की जरूरत पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे। इससे इस बात को और बल मिलता है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेंगे। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'इससे (युद्ध) शॉर्ट टर्म में गैसोलीन की कीमत थोड़ी बढ़ गई, लेकिन अगर मुझे यह दोबारा करना पड़ा तो मुझे यह दोबारा करना होगा, क्योंकि लॉन्ग टर्म में एकमात्र यही उत्तर है। आप ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते।'

अमेरिका का सियासी गणित

अमेरिकी सीनेट की 100 सीटों में 54 सीटों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा है। ट्रंप की पार्टी 44 सीटों पर सिमट गई है। हाउस में 218 के बहुमत आंकड़ों से भी अधिक 242 सीटों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण है। रिपब्लिकन पार्टी को 151 सीटों पर जीत मिली है। 50 राज्यों में 28 राज्यों के गवर्नर डेमोक्रेट्स और 20 का संबंध रिपब्लिकन पार्टी से है। अभी दो नामों का एलान बाकी है।


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