logo

मूड

ट्रेंडिंग:

स्पीड ही नया स्टेटस सिंबल? Gen Z की पसंद से बदल रहा बाजार

Gen Z की पसंद और 10 मिनट की तेज डिलीवरी से भारत का पूरा बाजार बदल रहा है। अब राशन से लेकर कपड़े तक सब कुछ तुरंत घर पहुंच रहा है जिसने शॉपिंग का तरीका बदल दिया है।

AI Generated Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

भारत के बाजारों में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है और इस बदलाव को लाने वाले देश के युवा यानी Gen Z हैं। आजकल के युवाओं के लिए किसी सामान को मंगाने के लिए दो-तीन दिन का इंतजार करना पुरानी बात हो गई है अब उनके लिए तेज डिलीवरी ही सबसे बड़ा स्टेटस सिंबल बन चुकी है। इसी वजह से युवा अब पुराने ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स के बजाय 10 से 15 मिनट में सामान पहुंचाने वाले क्विक कॉमर्स ऐप्स को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। मेटा की एक स्टडी के मुताबिक 10 में से 9 लोग इन ऐप्स के बारे में जानते हैं और आधे लोगों ने पिछले हफ्ते ही इसका इस्तेमाल किया है। युवाओं की इसी पसंद और तेजी की वजह से देश का पूरा बाजार बदल रहा है।

 

आजकल के युवाओं की जिंदगी बहुत व्यस्त हो गई है और वे किसी भी चीज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना चाहते। पहले ऑनलाइन शॉपिंग में सामान घर आने में दो से तीन दिन का समय लगता था लेकिन क्विक कॉमर्स ऐप्स इस काम को कुछ ही मिनटों में कर देते हैं। आजकल की युवा पीढ़ी पहले से प्लानिंग करके बहुत सारा राशन या सामान एक साथ नहीं खरीदती है। वे अपनी तुरंत की जरूरतों के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं जैसे अचानक भूख लगना घर में कोई सामान खत्म हो जाना या किसी पार्टी के लिए आखिरी समय पर कुछ मंगाना। एक रिपोर्ट के मुताबिक बिगबास्केट जैसी कंपनियों से जुड़ने वाले नए ग्राहकों में से 50%  ग्राहक सिर्फ क्विक कॉमर्स वाले हैं जो महीने में 4 से 15 बार सामान ऑर्डर करते हैं।

 

यह भी पढ़ें: रात को नींद नहीं आती? घबराहट और अनिद्रा होगी छू मंतर, बस करना होगा यह काम

अब सब कुछ मिल रहा ऑनलाइन

शुरुआत में इन ऐप्स का इस्तेमाल सिर्फ दूध, ब्रेड और ताजी सब्जियां मंगाने के लिए होता था लेकिन युवाओं की मांग को देखते हुए अब ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसे ऐप्स पर बहुत सारा सामान मिलने लगा है। आज इन ऐप्स पर मेकअप का सामान, क्रीम, मोबाइल चार्जर, ईयरफोन, स्टेशनरी, खिलौने और कपड़े तक आसानी से मिल जाते हैं। इस समय राशन के अलावा दूसरे सामानों की हिस्सेदारी पूरी बिक्री में 15% से 20% तक पहुंच चुकी है। ये प्लेटफॉर्म्स बड़े पैमाने पर सामान खरीदने के कारण स्थानीय दुकानों के मुकाबले 10% से 15%  तक सस्ते दाम पर भी सामान दे देते हैं।

डिलीवरी का तरीका

इस तेज डिलीवरी के पीछे कंपनियों का एक बहुत बड़ा नेटवर्क काम करता है। ये कंपनियां शहरों के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे स्थानीय गोदाम बनाती हैं जिन्हें डार्क स्टोर्स कहा जाता है। इस बाजार में ब्लिंकिट जैसी बड़ी कंपनी की वैल्यूएशन करीब 13 बिलियन डॉलर तक गई है। इन कंपनियों के पास ऐसे कंप्यूटर सिस्टम होते हैं जो पहले ही अंदाजा लगा लेते हैं कि किस इलाके में किस समय किस सामान की मांग सबसे ज्यादा होगी। इसलिए वे उन सामानों को पहले से ही इन छोटे गोदामों में तैयार रखते हैं। जैसे ही कोई ग्राहक अपने फोन से ऑर्डर करता है पास का डिलीवरी बॉय तुरंत सामान लेकर निकलता है और तय समय में घर पहुंचा देता है।

 

यह भी पढ़ें: राशन से ज्यादा ट्रैवल और OTT पर खर्च, बदल रही है भारतीयों की लाइफस्टाइल

छोटे शहरों में बढ़ता असर

क्विक कॉमर्स की यह तेजी अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है बल्कि विशाखापत्तनम, नागपुर, कोच्चि, जयपुर और लखनऊ जैसे टियर 2 शहरों में भी लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं। आमतौर पर एक औसत भारतीय परिवार अपने पूरे राशन खर्च का 5% से 6% हिस्सा इन क्विक कॉमर्स ऐप्स पर खर्च कर रहा है। इस बिजनेस में फायदा देखकर अब कपड़े और लाइफस्टाइल बेचने वाले बड़े ब्रांड्स भी इस काम में उतर रहे हैं।

 

जैसे मिन्त्रा जैसी बड़ी कंपनी ने बेंगलुरु जैसे शहरों में दो घंटे के अंदर कपड़े डिलीवर करने के लिए 'M-Now' नाम से प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। साथ ही जोमैटो जैसी कंपनियां भी बहुत कम समय में खाना पहुंचाने के लिए अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। बाजार में चल रही इस होड़ से साफ है कि आने वाले समय में यह तेज डिलीवरी का तरीका भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत जरूरी हिस्सा बन जाएगा।

Related Topic:#Lifestyle News#Gen Z

और पढ़ें