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नेल पेंट और लिप्सटिक से भी हो सकता है कैंसर? हैरान कर देगी यह रिपोर्ट

वैज्ञानिक रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि लिपस्टिक और नेल पेंट में मौजूद कुछ जहरीले तत्व कैंसर का कारण बन सकते हैं, जानें इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: AI Generated Image

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आजकल हर कोई सबसे अलग और खूबसूरत दिखना चाहता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके मेकअप बॉक्स में रखी लिपस्टिक और नेल पेंट आपकी जान की दुश्मन भी बन सकती हैं। हाल ही में आई कई बड़ी वैज्ञानिक रिपोर्ट्स और रिसर्च ने इस बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ जहरीले तत्व (Elements) सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे रहे हैं। लिपस्टिक में मिलाया जाने वाला लेड और नेल पेंट को चमकाने वाले केमिकल्स आपके शरीर के अंदर जाकर हार्मोन का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन चीजों का लगातार इस्तेमाल शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जो आगे चलकर कैंसर का मुख्य कारण बन सकता है।

 

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में रिसर्चर कैथरीन हैमंड (S. Katharine Hammond) और उनकी टीम ने लिपस्टिक और लिप ग्लॉस के 32 अलग-अलग ब्रांड्स पर एक बड़ी जांच की है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 75%  प्रोडक्ट्स में लेड जैसे खतरनाक तत्व मौजूद थे। रिपोर्ट कहती है कि अगर कोई महिला दिन में दो से तीन बार लिपस्टिक लगाती है, तो वह अनजाने में ही तय सीमा से ज्यादा क्रोमियम शरीर के अंदर ले लेती है।

 

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न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. मिशेल कोहेन (Dr. Mitchell Cohen) ने भी अपनी रिसर्च में बताया है कि लिपस्टिक में मौजूद क्रोमियम का सीधा संबंध पेट के ट्यूमर और किडनी की समस्याओं से पाया गया है। लेड की मौजूदगी न केवल कैंसर का खतरा बढ़ाती है बल्कि यह दिमाग और नसों के लिए भी बहुत खतरनाक है।

नेल पेंट और यूवी लैंप से होने वाले नुकसान का बड़ा खुलासा

नेल पॉलिश और नेल आर्ट के शौकीनों के लिए 'नेचर कम्युनिकेशंस' में छपी साल 2023 की स्टडी काफी डराने वाली है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि नेल पेंट को सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अल्ट्रावायलेट (UV) लैंप्स कैंसर की वजह बन सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन लैंप्स से निकलने वाली किरणें साधे तौर पर इंसान के शरीर के डीएनए को नुकसान पहुंचती हैं। लैब में किए गए प्रयोगों में देखा गया कि सिर्फ 20 मिनट के एक बार के इस्तेमाल से ही हाथ की 20 से 30 प्रतिशत सेल (Cell) मर सकती हैं। इसके साथ ही नेल पेंट को सख्त बनाने वाला तत्व 'फॉर्मलडिहाइड' (Formaldehyde) एक प्रमाणित कैंसर पैदा करने वाला तत्व है।

केस स्टडी और टॉक्सिक तत्वों के गंभीर मामले

दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर इन तत्वों का बुरा असर दिखा है। अमेरिका की एक केस स्टडी में एक ऐसी महिला का जिक्र आता है, जो सालों तक नेल सैलून में काम करती थी। इसी तरह 'एनवायर्नमेंटल वर्किंग ग्रुप' की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सैलून में काम करने वाले कर्मचारियों में थायराइड और सांस की बीमारियों के मामले आम लोगों के मुकाबले 40%  ज्यादा पाए गए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है समस्या सिर्फ एक बार लगाने से नहीं है, बल्कि सालों तक इन तत्वों के लगातार संपर्क में रहने से शरीर की बनावट बदलने लगती है।

 

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बचाव के लिए बस इन छोटी बातों का रखें ध्यान

डॉक्टरों का कहना है कि आपको पूरी तरह सजना-संवरना छोड़ने की जरूरत नहीं है, बस खरीदारी के वक्त समझदारी दिखानी होगी। हमेशा ऐसे प्रोडक्ट्स चुनें जिन पर 'टॉक्सिक-फ्री' या '5-फ्री' लिखा हो क्योंकि इनमें जहरीले तत्व कम होते हैं। डार्क शेड्स की लिपस्टिक का इस्तेमाल कम करें क्योंकि उनमें भारी तत्व ज्यादा होने का डर रहता है। नेल पेंट लगाते समय कमरे की खिड़कियां खुली रखें ताकि उसकी तेज गंध फेफड़ों में न जाए। आपकी यह छोटी सी सावधानी आपको बड़ी बीमारी से बचा सकती है।

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