आज के दौर के सोशल मीडिया और जनरेशन Z के बीच मेनिफेस्टेशन बेहद ट्रेंड कर रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मेनिफेस्टेशन कोई नई बात नहीं है। मेनिफेस्टेशन के बारे में हिंदू धर्म में सदियों पहले बताया जा चुका है। मेनिफेस्टेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छाओं की कल्पना करता है और फिर उस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए मेहनत करता है। इसके अलावा कई लोगों का मानना है कि मेनिफेस्टेशन की वजह से किसी व्यक्ति के जीवन में अच्छा या बुरा होता है। अगर व्यक्ति हमेशा बुरा सोचेगा तो उसके साथ बुरा ही होगा। जब व्यक्ति हमेशा अपने बारे में अच्छा सोचेगा, तब उसके साथ अच्छा ही होगा। इसी प्रक्रिया को मेनिफेस्टेशन कहा जाता है। इसी मेनिफेस्टेशन के बारे में हिंदू धर्म ग्रंथों में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं, जो आज की जेनरेशन Z को जाननी चाहिए।
हिंदू धर्म में भगवद्गीता को बेहद खास ग्रंथ माना जाता है। इस ग्रंथ में कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जिसके जरिए व्यक्ति अपने जीवन की कई चुनौतियों का समाधान खोज सकता है। इस ग्रंथ में कुल 700 श्लोक बताए गए हैं। अब सवाल उठता है कि भगवद्गीता में मेनिफेस्टेशन के बारे में क्या बताया गया है, जिसे जानकर व्यक्ति अपने जीवन के कई सपनों को साकार कर सकता है।
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क्या है मेनिफेस्टेशन?
मेनिफेस्टेशन के बारे में सिर्फ सोशल मीडिया में ही नहीं, बल्कि कई किताबों में भी बताया गया है। मेनिफेस्टेशन में व्यक्ति अपने लक्ष्यों के बारे में सोचता है और जी-जान लगाकर उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मेहनत करता है। इस प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि जो उसका लक्ष्य है, उसे पूरा करने में वह व्यक्ति पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ व्यक्ति को अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए।
कई जेन जी को लगता है कि सिर्फ लक्ष्यों की कल्पना करने से ही लक्ष्य पूरा हो जाएगा, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता है। व्यक्ति को सिर्फ कल्पना करने से काम पूरा नहीं होता, बल्कि उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए व्यक्ति को हर दिन काम करना चाहिए। तभी वह अपने लक्ष्य को पूरा कर सकता है।
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धर्म ग्रंथ में क्या बताया?
मेनिफेस्टेशन के बारे में छांदोग्य उपनिषद में बताया गया है। इस ग्रंथ के 7वें अध्याय में ऋषि नारद को सिखाया जाता है कि संकल्प ही व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति है। बिना संकल्प के व्यक्ति कोई भी सपना साकार नहीं कर सकता है। इसमें बताया गया है कि व्यक्ति पहले मन में विचार बनाता है। फिर वह ख्वाहिश व्यक्ति बोलता है, जिसके बाद ख्वाहिश को लेकर व्यक्ति काम करता है और उसके बाद व्यक्ति की ख्वाहिश पूरी होती है। इसी प्रक्रिया को आज के दौर में मेनिफेस्टेशन कहा जाता है।
मेनिफेस्टेशन के बारे में भगवद्गीता में भी अहम बातें बताई गई हैं। ग्रंथ के 17वें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने बताया है कि जो व्यक्ति जैसा सोचता है, एक दिन व्यक्ति वैसा ही बन जाता है। जब व्यक्ति को अपनी ख्वाहिश को लेकर गहरा विश्वास हो, तो एक दिन वह ख्वाहिश हकीकत में बदल जाएगी।
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'श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः'
इस श्लोक का अर्थ है कि जब व्यक्ति को किसी के प्रति गहरी श्रद्धा होती है, तो वह एक दिन वैसा ही बन जाता है। जिसे आज के दौर मेंलो ऑफ अट्रैक्शन मानती है।