अब लोगों का खाली समय बिताने का तरीका भी बदल रहा है। सिर्फ फोन पर वीडियो देखने के बजाय कई लोग ऐसे शौक अपना रहे हैं जिनमें वे अपने हाथों से कुछ बना सकें। पिंट्रस्ट के 2026 हॉबी ट्रेंड में भी ऐसे ही कई शौक सामने आए हैं। इनमें घर पर कैफे जैसी कॉफी बनाना, प्रकृति को करीब से देखना, जर्नल बनाना, छोटी-छोटी चीजें बनाना और पुराने कपड़ों को नया स्टाइल देना शामिल है।
पिंट्रस्ट के मुताबिक, लोग ऐसे हॉबी की तरफ बढ़ रहे हैं जिनमें कुछ बनाने या करने का मजा मिले। प्लेटफॉर्म के मुताबिक, 51% Gen Z का कहना है कि कोई हॉबी उनकी खुशी में योगदान देती है। वहीं पिंट्रस्ट इस्तेमाल करने वाले हर 10 में से 8 लोगों ने कहा कि पिंट्रस्ट उन्हें नई चीजें आजमाने के लिए प्रेरित करता है।
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घर पर कॉफी बनाने का शौक
पिंट्रस्ट ने इस ट्रेंड को होम कैफे इंजीनियरिंग नाम दिया है। इसमें लोग घर पर ही कैफे जैसी कॉफी बनाने और उसके लिए एक अच्छी जगह तैयार करने में दिलचस्पी ले रहे हैं। कॉफी पीने के लिए अब हर बार कैफे जाने के बजाय लोग घर पर ही अलग-अलग तरह की कॉफी बना रहे हैं। इसमें सिर्फ कॉफी का स्वाद ही नहीं बल्कि कॉफी बनाने की जगह और उसे सर्व करने का तरीका भी शामिल है।
घर में छोटा कॉफी कॉर्नर बनाना और अलग-अलग स्वाद वाली कॉफी तैयार करना भी इस ट्रेंड का हिस्सा है। पिंट्रस्ट पर केले के सिरप वाली कॉफी की खोज 916% बढ़ी है। कॉफी स्टेशन से जुड़ी खोज 624% और पुराने स्टाइल वाले कॉफी कॉर्नर की खोज 430% बढ़ी है। इसके अलावा बिस्कॉफ लाटे, ब्लूबेरी कॉफी, मार्शमैलो कोल्ड फोम और कॉफी जेली जैसी चीजों में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
प्रकृति से जुड़ने का शौक
पिंट्रस्ट ने इस ट्रेंड को बैकयार्ड बॉटनिस्ट नाम दिया है। इसमें लोग अपने आसपास की प्रकृति को करीब से देखने और उसके बारे में लिखने या बनाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। इसमें लोग पेड़-पौधों, फूलों, पक्षियों और मशरूम जैसी चीजों को करीब से देखते हैं और उन्हें अपनी नोटबुक या स्केचबुक में लिखते या बनाते हैं।
फूलों को सुखाकर रखना, पक्षियों की ड्रॉइंग बनाना, बाहर बैठकर स्केच करना और प्रकृति से जुड़ी चीजों के बारे में लिखना भी इसका हिस्सा है। पिंट्रस्ट पर सूखे और दबाए हुए फूलों से जुड़ी खोज 457% बढ़ी है। पक्षियों की ड्रॉइंग से जुड़ी खोज 232% और जंगल की डायरी से जुड़ी खोज 91% बढ़ी है। यानी यह शौक सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। इसमें प्रकृति को करीब से देखना और उसके बारे में कुछ बनाना भी शामिल है।
जर्नल बनाने का शौक
इस ट्रेंड को पिंट्रस्ट ने हैंडमेड हैकर नाम दिया है। इसमें लोग अपनी पसंद के हिसाब से जर्नल, फोटो एल्बम और छोटी मैगजीन जैसी चीजें खुद बनाने के तरीके खोज रहे हैं। जर्नलिंग अब सिर्फ रोज की बातें लिखने तक सीमित नहीं है। लोग अपनी यादें, पढ़ी हुई किताबों की जानकारी, रोज की बातें या पसंदीदा तस्वीरें अलग तरीके से संभालकर रख रहे हैं। कुछ लोग अपनी पसंद के हिसाब से छोटी मैगजीन या फोटो एल्बम भी तैयार कर रहे हैं।
पिंट्रस्ट पर बर्डे के लिए मैगजीन बनाने से जुड़ी खोज 1,713% बढ़ी है। जर्नल ट्रैक करने से जुड़ी खोज 1,264% और स्क्रैपबुकिंग-जर्नलिंग से जुड़ी खोज 240% बढ़ी है। यानी लोग अपनी यादों को सिर्फ फोन में रखने के बजाय उन्हें अपने तरीके से बनाकर संभालने में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।
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मिनिएचर बनाने का शौक
पिंट्रस्ट ने इस ट्रेंड को कैजुअल क्राफ्टर नाम दिया है। इसमें लोग छोटी-छोटी चीजों को अपने हाथों से बनाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। छोटी-छोटी चीजों से पूरा कमरा या एक छोटी दुनिया बनाना भी इस ट्रेंड का हिस्सा है। इसमें मिनिएचर रूम यानी कमरे का छोटा मॉडल, गुड़िया का घर, छोटी सजावटी चीजें और दूसरी छोटी चीजें बनाई जाती हैं।
इसके लिए कार्डबोर्ड, कागज और घर में मौजूद दूसरी चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। पिंट्रस्ट पर मिनी रूम बनाने से जुड़ी खोज 296% बढ़ी है। गुड़िया के घर को खुद बनाने की खोज 153% और कार्डबोर्ड से मिनी रूम बनाने की खोज 125% बढ़ी है। छोटी चीजों को दोबारा इस्तेमाल करके मिनिएचर बनाने में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
पुराने कपड़ों को नया स्टाइल
पिंट्रस्ट ने इस ट्रेंड को सेकंडहैंड साइडक्वेस्ट नाम दिया है। इसमें पुराने कपड़ों और पहले से मौजूद चीजों को नए तरीके से इस्तेमाल करने के आइडिया शामिल हैं। पुराने कपड़ों को फेंकने के बजाय उन्हें बदलकर दोबारा इस्तेमाल करने का ट्रेंड बढ़ रहा है। इसमें पुराने कपड़ों को नया डिजाइन देना, उनकी मरम्मत करना, कढ़ाई करना, क्रोशिया जोड़ना और अलग-अलग कपड़ों के टुकड़ों से नया कपड़ा या बैग बनाना शामिल है।
पिंट्रस्ट पर पुराने कपड़ों को नए डिजाइन में बदलने वाले तरीकों की खोज 610% बढ़ी है। कपड़ों की मरम्मत से जुड़ी खोज 167% और क्रोशिया से पुराने कपड़ों को नया रूप देने वाली खोज 523% बढ़ी है। यानी पुराने कपड़े अब सिर्फ पुराने होने की वजह से बेकार नहीं माने जा रहे। लोग उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से बदलकर फिर से इस्तेमाल कर रहे हैं।