आज के समय में लोग छोटी- छोटी बातों पर तनाव लेते हैं। अधिक तनाव लेने की वजह से डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ सकता है। डिप्रेशन की वजह से लोगों को बहुत ज्यादा नींद आती है, जागने में परेशानी होती है या बहुत देर सोने के बावजूद भी थकावट महसूस होना आम बात है। हालांकि नए शोध में पता चला है कि कुछ लोगों के ये लक्षण सामान्य नींद की समस्याओं से कहीं बढ़कर हो सकते हैं। ये परेशानियां बायोलॉजिकल क्लॉक से जुड़ा होता है। ये एक ऐसा सिस्टम है जो नींद, जागने की स्थिति, हार्मोन और शरीर के अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है जिसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
The British Journal of Psychiatry की स्टडी में इस डिप्रेशन को सर्केडियन डिप्रेशन कहा गया है। स्टडी में बताया कि गंभीर, बार-बार होने वाले या लगातार बने रहने वाले डिप्रेशन से पीड़ित हर 4 में से 1 व्यक्ति इस प्रकार के लक्षण नजर आए। डॉक्टरों के मुताबिक अलग-अलग लोगों में डिप्रेशन के अलग-अलग रूप होते हैं और उसी हिसाब से इलाज किया जाता है।
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क्या होता है सर्केडियन डिप्रेशन?
हमारा शरीर सर्केडियन रिदम के हिसाब से काम करता है। ये 24 घंटे का क्लॉक होता है जो नींद, सतर्कता, शरीर के तापमान, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है। इन चीजों को दिमाग की आंतरिक घड़ी नियंत्रित करती है। ये बाहर के वातावरण खासकर के रात और दिन के उजाले से प्रभावित होते हैं। जब ये चक्र किसी व्यक्ति की दिनचर्या या बाहरी परिस्थितियों से तालमेल नहीं बिठा पाता है तो इससे नींद और दिन के समय में होने वाले कामकाज पर बुरा असर पड़ता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार इस तरह की गड़बड़ी डिप्रेशन से जुड़ी खास स्थितियों का कारण भी बन सकती है। सर्केडियन डिप्रेशन को आधिकारिक रूप से डिप्रेशन का सब टाइप नहीं माना गया है। इसमें अवसाद के लक्षण और नींद से जुड़ी समस्याओं के बीच में संबंध देखने को मिलता है। किसी भी व्यक्ति के लिए बायोलॉजिकल क्लॉक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सर्केडियन डिप्रेशन के लक्षण क्या है?
इस प्रकार के डिप्रेशन में पीड़ित को आमतौर पर नींद, जागने और मौसमी लक्षणों का समूह दिखाई देता है।
- अत्यधिक सुबह की थकान
- बहुत लंबे समय तक सोना
- रात में देर तक जगना
- बीमारी का मौसमी पैटर्न
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बॉडी क्लॉक कैसे प्रभावित होता है?
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ, डॉ. निखिल मोदी के मुताबिक कुछ लोगों को सुबह की नींद के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। उन्हें तय समय पर उठने में बहुत परेशानी होती है। पूरी रात सोने के बाद भी वह थका हुआ महसूस करते हैं। जबकि कुछ लोग मौसम बदलते ही अधिक थकान महसूस करने लगते हैं। ये परेशानियां बॉडी क्लॉक और शेड्यूल के बीच तालमेल की कमी की वजह से होता है। नींद आपके बायोलॉजिकल क्लॉक को मेंटेन करने का काम करती है। जब बार-बार सोने और जागने का समय बदलता रहता है तो शरीर को समझ नहीं आता है कि कब आराम करना है? कब सतर्क रहना है? इससे आपकी भावनाओं, एकाग्रता, प्रेरणा को नियंत्रित करने की क्षमता पर असर पड़ता है।