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ज्यादा पानी या सिंचाई की कमी, तुलसी सूख जाने की असली वजह जान लीजिए

तुलसी का पौधा धार्मिक और औषधीय दोनों तरीके से महत्वपूर्ण है लेकिन सर्दियों में यह अधिक पानी या समय पर सिंचाई न होने जैसे व्यावहारिक कारणों से सूख सकता है, जिन्हें समझना जरूरी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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तुलसी का पौधा हिंदू घरों में केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के कारण भी खास महत्व रखता है। कई बार लोग यह शिकायत करते हैं कि उनका तुलसी का पौधा अचानक सूख गया है। ऐसी समस्या अक्सर सर्दियों के मौसम में ज्यादा देखने को मिलती है। तुलसी के सूखने के पीछे कई व्यावहारिक कारण हो सकते हैं। कभी जरूरत से ज्यादा पानी देने से पौधे की जड़ें खराब हो जाती हैं, तो कभी समय पर सिंचाई न होने से पौधा कमजोर पड़ने लगता है। हालांकि, इन दोनों स्थितियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।

 

हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा सूखना कई लोगों के लिए चिंता का कारण बन जाता है और इसे शुभ-अशुभ से जोड़कर देखा जाने लगता है लेकिन वास्तव में इसके पीछे धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण होते हैं। यदि इन कारणों को सही तरीके से समझ लिया जाए, तो तुलसी के पौधे की बेहतर देखभाल की जा सकती है।

 

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तुलसी का पौधा सूखने के पीछे की असली वजहें

जरूरत से ज्यादा पानी देना

 

तुलसी के सूखने का सबसे बड़ा और आम कारण अधिक पानी है। जब पौधे को जरूरत से ज्यादा पानी मिलता है, तो उसकी जड़ें सड़ने लगती हैं। इसकी पहचान इस तरह होती है कि पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं, मिट्टी से हल्की बदबू आने लगती है और तने का निचला हिस्सा काला या भूरा दिखने लगता है। ज्यादा पानी से मिट्टी के छिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके लिए आप गमले में ड्रेनेज होल जरूर रखे और मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही पानी दें।

 

पानी की कमी

 

पानी कम मिलने भी पर पत्तियां ऊपर से नीचे की ओर झुकने लगती हैं। उनके किनारे सूखे या भूरे हो जाते हैं। पौधा मुरझाया और कमजोर दिखाई देता है। इसके लिए सही तरीका यह है कि सुबह या शाम के समय पानी दें। दोपहर की तेज धूप में पानी देने से बचें। सर्दियों में पानी कम दें लेकिन इतना भी नहीं कि पौधा सूखने लगे।

 

तुलसी में ‘मंजरी’ का आना

 

तुलसी के सूखने की एक अहम वजह मंजरी का आना भी है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। मंजरी आने पर पौधा अपनी सारी ऊर्जा बीज बनाने में लगा देता है और धीरे-धीरे सूखने लगता है। इसका उपाय यह किया जा सकता है कि जैसे ही मंजरी दिखे, उसे तुरंत तोड़ दें। इससे पौधा फिर से नई पत्तियां निकालता है और घना बनता है।

 

मौसम और कीटों का असर

 

तुलसी ठंड को ज्यादा सहन नहीं कर पाती। सर्दियों में पाले के कारण पौधा जम सकता है और मर भी सकता है। इसमें आप सावधानी के तौर पर ठंड के मौसम में पौधे को सूती कपड़े से ढक कर रखें। अगर पत्तियों पर काले धब्बे या सफेद पाउडर जैसा दिखाई दे, तो यह फंगस का संकेत है। इसके लिए नीम के तेल का छिड़काव करें।

 

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तुलसी को हरा-भरा रखने के 3 गोल्डन रूल्स

  • तुलसी के लिए 70% मिट्टी और 30% कम्पोस्ट का मिश्रण सबसे अच्छा होता है, जिससे पानी जमा नहीं होता।
  • तुलसी को रोजाना कम से कम 4–5 घंटे की सीधी धूप जरूर मिलनी चाहिए। इसे पूरी छाया में न रखें।
  • समय-समय पर ऊपर की कोपलों को तोड़ते रहें, इससे पौधा झाड़ीनुमा और घना बनता है।
  • अगर मिट्टी में फंगस लग जाए, तो उसमें एक चुटकी हल्दी मिला दें। हल्दी एक प्राकृतिक एंटी-फंगल है, जो जड़ों को सड़ने से बचाती है।
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