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थोड़ा चलने पर ठंड में क्यों फूलती है सांसें? एक्सपर्ट से समझिए

सर्दियों में थोड़ी सी मेहनत या चलने पर सांस फूलना आम हो गया है। ठंड के मौसम में इसी वजह से चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस लेने में ज्यादा दिक्कत महसूस होती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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अक्सर हम देखते या सुनते हैं कि कुछ लोगों को थोड़ा सा चलने पर ही सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और यह समस्या सर्दियों के मौसम में ज्यादा दिखाई देती है। वैसे तेज चलने, दौड़ने या ज्यादा मेहनत वाले काम के बाद सांस फूलना सामान्य बात मानी जाती है लेकिन आजकल यह परेशानी इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि लोगों की शारीरिक गतिविधि पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। ठंड के मौसम में ठंडी हवाएं फेफड़ों को सिकोड़ने लगती हैं, जिससे सांस लेने में असहजता महसूस होती है। इसी वजह से सर्दियों में थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर भी कई लोगों की सांस फूलने लगती है।

 

अक्सर हम इसे सिर्फ अनफिट होने की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन इसके पीछे कई साइंटिफिक और हेल्थ से जुड़े ठोस कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना और समय पर ध्यान देना जरूरी है।

 

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ठंड के मौसम में सांस फूलने का कारण

  • सर्दियों में सर्दियों में हवा न केवल ठंडी होती है बल्कि उसमें नमी की कमी भी होती है। जब हम ठंडी हवा में सांस लेते हैं, तो यह हमारे सांस की नली को सिकोड़ देती है, जिसे 'ब्रोंकोस्पैज्म' कहा जाता है। इससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन ले जाने वाली नलियां संकरी हो जाती हैं और सांस लेने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • ठंड के संपर्क में आने पर हमारा शरीर अपना तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करता है। कम तापमान में हमारे ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं ताकि शरीर की गर्मी बची रहे। इसे 'वासोकंस्ट्रिक्शन' कहते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल को शरीर में खून पंप करने के लिए सामान्य से अधिक जोर लगाना पड़ता है। यही वजह है कि थोड़ा चलने पर भी सांस फूलने लगती है।
  • सर्दियों में हमारे फेफड़ों के अंदर मौजूद म्यूकस या बलगम थोड़ा गाढ़ा हो जाता हैइसके कारण फेफड़ों की सफाई करने वाली प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन का आना-जाना उतना सुचारू नहीं रह पाता जितना गर्मियों में होता है।
  • सर्दियों में हवा भारी होती है, जिससे धूल के कण और धुआं जमीन के करीब रहते हैं। प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों में सूजन आ जाती है। सर्दियों में सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल इन्फेक्शन के कारण फेफड़ों की झिल्ली संवेदनशील हो जाती है, जिससे मामूली शारीरिक काम भी थका देती है।

 

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किन्हें ज्यादा खतरा है?

  • अस्थमा के मरीज के लिए ठंडी हवा 'ट्रिगर' का काम करती है।
  • ठंड में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सांस फूलना एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है।
  • अगर शरीर में हीमोग्लोबिन कम है, तो ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता पहले से कम होती है, जो ठंड में और ज्यादा महसूस होती है।

बचाव के लिए क्या करें?

  • नाक हवा को फेफड़ों तक पहुंचाने से पहले उसे गर्म और नम बनाती है। मुंह से सांस लेने पर सीधी ठंडी हवा फेफड़ों को परेशान करती है।
  • बाहर निकलते समय नाक और मुंह को ढंकें ताकि आप सीधी ठंडी हवा के संपर्क में न आएं।
  • बाहर टहलने जाने से पहले घर के अंदर ही थोड़ा वॉर्म-अप कर लें ताकि शरीर का तापमान संतुलित हो जाए
  • पर्याप्त पानी पिएं ताकि बलगम गाढ़ा न हो और सांस की नली साफ रहे

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