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प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा यूरिक एसिड क्यों हो सकता है खतरनाक?

प्रेग्नेंसी में यूरिक एसिड बढ़ने से हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेम्पसिया का खतरा बढ़ जाता है, जिससे समय से पहले डिलीवरी और बच्चे के विकास में रुकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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प्रेग्नेंसी की शुरुआत में आमतौर पर यूरिक एसिड का स्तर कम हो जाता है, क्योंकि किडनी अधिक तेजी से काम करता है। हालांकि, दूसरे या तीसरे ट्राइमेस्टर में यदि इसका स्तर असामान्य रूप से बढ़ता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बढ़ा हुआ यूरिक एसिड अक्सर शरीर में सूजन और ब्लड वेसेल्स में दबाव पैदा करता है जो सीधे तौर पर प्लेसेंटा पर असर डालता है। 

 

इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं लेकिन यूरिक एसिड का स्तर बढ़ना मां और शिशु दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। यदि इसे सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह मां के लिवर और किडनी को प्रभावित करने के साथ-साथ प्लेसेंटा को मिलने वाले न्यूट्रीशन और ऑक्सीजन की आपूर्ति में भी रुकावट डाल सकता है।

 

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बढ़ा हुआ यूरिक एसिड और खतरा

  • प्री-एक्लेम्पसिया सबसे गंभीर खतरा है। इसमें प्रेग्नेंट महिला का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है और यूरिन में प्रोटीन आने लगता है।
  • जेस्टेशनल डायबिटीज के संदर्भ में रिसर्च बताते हैं कि हाई यूरिक एसिड वाली महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान शुगर बढ़ने का जोखिम अधिक होता है।
  • यूरिक एसिड क्रिस्टल्स के रूप में जमा होकर किडनी में पथरी बना सकता है, जिससे किडनी स्टोन, असहनीय दर्द और इन्फेक्शन हो सकता है।
  • जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है, तो प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता, जिससे बच्चे का वजन कम रह सकता है।
  • परेशानियां बढ़ने पर डॉक्टरों को मां और बच्चे की जान बचाने के लिए समय से पहले डिलीवरी करानी पड़ सकती है।

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बचाव के उपाय और खान-पान

  • शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए हाइड्रेटेड रहना सबसे जरूरी है। इसलिए सही मात्रा में भरपूर पानी पिएं। 
  • रेड मीट, कुछ प्रकार की मछलियां और अधिक दालों का सेवन सीमित करें। इन सब खानों में प्यूरीन मात्रा बहुत अधिक होती है जो किडनी को नकसान पहुंचाता है। 
  • हाई शुगर कंटेट ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड यूरिक एसिड को तेजी से बढ़ाते हैं। इसलिए शुगर का इस्तेमाल कम से कम करें। 
  • डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर यूरिक एसिड और ब्लड प्रेशर की जांच करवाते रहें।

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