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रेंट इकॉनमी का है जलवा, चीजें खरीदना नहीं किराए पर लेना पसंद करते हैं Gen-Z

खरीदने के भारी खर्च से बचने के लिए युवा अब सब कुछ किराए पर लेना पसंद कर रहे हैं। रेंटोमोजो का बड़ा आईपीओ यह साफ दिखाता है कि रेंट का यह नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

आजकल के युवाओं की सोच अब पूरी तरह बदल रही है। पुराने जमाने में लोग सोचते थे कि जिंदगी में कामयाब होने का मतलब है अपना खुद का घर, अपनी गाड़ी और बहुत सारा सामान खरीदना लेकिन आज के युवा ऐसा नहीं सोचते। आज के युवाओं को कोई सामान खरीदना पसंद नहीं है बल्कि वे उसे किराए पर लेकर इस्तेमाल करना बेहतर समझते हैं। इसी बदलती सोच को रेंट इकोनॉमी कहते हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण रेंटोमोजो नाम की कंपनी है जो फर्नीचर और घर के इलेक्ट्रॉनिक सामान किराए पर देती है। यह कंपनी अब इतनी बड़ी हो चुकी है कि शेयर बाजार में अपना 1,100 करोड़ रुपये से लेकर 1,200 करोड़ रुपये का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने जा रही है जो यह साबित करता है कि आज के भारत में किराए का यह बिजनेस कितना सफल हो चुका है।

 

आज के युवाओं की नौकरियां बहुत जल्दी-जल्दी बदलती हैं। वे आज एक शहर में हैं तो कल दूसरे शहर चले जाते हैं। ऐसे में भारी सामान खरीदना और उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बहुत मुश्किल और पैसे खर्च करने वाला काम है। युवा सोचते हैं कि सामान खरीदने में लाखों रुपये फंसाने से अच्छा है कि उसे हर महीने थोड़े से पैसे देकर किराए पर ले लिया जाए। इससे पैसे भी बचते हैं और जब चाहें बिना किसी झंझट के दूसरे शहर शिफ्ट हुआ जा सकता है।

 

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रेंट पर सामान देने वाली कंपनियों की कमाई

युवाओं की इसी बदलती सोच की वजह से इस सेक्टर की कंपनियों को बहुत फायदा हो रहा है और रेंटोमोजो के आंकड़े इसका सीधा सबूत हैं। कंपनी पिछले लगातार तीन सालों से मुनाफे में चल रही है। सितंबर 2025 के आखिर के छह महीनों में कंपनी ने 177 करोड़ रुपये की कमाई की और इसे 61 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ जिसमें 33 करोड़ रुपये का टैक्स क्रेडिट भी शामिल है। हालांकि,  कोरोना महामारी के समय इस बिजनेस को बहुत नुकसान हुआ था। वित्तीय वर्ष 2025 में इसकी कमाई 38% की बढ़ोतरी के साथ 266 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।

 

किराए पर चीजें मिलने से मीडल क्लास परिवारों और युवाओं को बहुत बड़ी राहत मिली है। अब किसी को भी घर या ऑफिस सेटअप करने के लिए एक साथ लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। हर महीने छोटा सा किराया देकर लोग अपनी पसंद का महंगा फर्नीचर और गैजेट्स इस्तेमाल कर लेते हैं। इस वजह से बाजार में रेंट पर देने वाली कंपनियों की मांग दिम प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिससे एक्सेल, चिराते और एडलवाइस जैसे बड़े निवेशक भी इस सेक्टर में भारी पैसा लगा रहे हैं।

 

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भारी-भरकम लोन और कर्ज से दूरी

आजकल के युवा भारी-भरकम होम लोन या किसी भी तरह के बड़े कर्ज के जाल में फंसना नहीं चाहते। वे अपने जीवन को किसी बड़ी ईएमआई या कर्ज के बोझ से दबाना नहीं पसंद करते क्योंकि इससे वे एक ही जगह बंध जाते हैं। युवा इस लोन और कर्ज के झंझट से पूरी तरह दूर रहना चाहते हैं ताकि उनके पास जब चाहे करियर में नया फैसला लेने और बिना किसी मानसिक तनाव के आजादी से जीने का पूरा मौका रहे।

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