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7 साल में भारत लाए गए 276 भगोड़े, अपराध करके भागे थे विदेश

भगोड़े अपराधियों के खिलाफ केंद्र सरकार के सख्त रुख के चलते 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इनमें 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भी शामिल है।

criminals have been brought back to India from 36 Countries

36 देशों से 274 भगोड़े वापस लाए गए | Photo Credit: ChatGPT

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केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए 2019 से जुलाई 2026 तक कुल 274 भगोड़े अपराधियों को 36 देशों से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। इन भगोड़े अपराधियों को प्रत्यर्पण, निर्वासन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए भारत लाया गया। केंद्र सरकार ने कई देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है जिससे गंभीर अपराधों में शामिल और लंबे समय से फरार आरोपियों को वापस लाना संभव हो सका है।

 

सरकार के अनुसार, आर्थिक अपराध, आतंकवाद, हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर मामलों में वांछित अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सीबीआई, ईडी और अन्य जांच एजेंसियां मिलकर इन मामलों पर काम कर रही हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अपराधियों को भारत लाने के प्रयास जारी रहेगा।

 

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किन भगोड़ों को वापस लाया गया?

गृह मंत्रालय ने बताया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू होने के बाद देश में भगोड़े अपराधियों के खिलाफ एकीकृत खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल विकसित किया गया है। जिससे भगोड़ों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए उन्हें वापस लाने का रास्ता बन सका है। वापस लाए गए भगोड़ों में आतंकवादी , गैंगस्टर, आर्थिक अपराधी, नार्कोटिक्स आरोपी, हत्या, बलात्कार और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं। भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान आतंकवाद , खालिस्तान समर्थक उग्रवाद, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर धोखाधड़ी और फर्जी मुद्रा तक फैला है। इसमें 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भी शामिल है।

डिजिटल मैपिंग से मिली मदद

ऑपरेशन त्रिशूल के तहत सैटेलाइट इनपुट, डिजिटल मैपिंग और प्रोफाइल ट्रैकिंग के जरिये विदेश में पहचान बदलकर छिपे अपराधियों का पता लगाया गया। जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर के तहत एक समर्पित समूह बनाया गया जो मामलों को प्राथमिकता देने और अंतरराष्ट्रीय समन्वय को तेज करने का काम कर रहा है। 

 

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मंत्रालय के अनुसार, साल 2014 से पहले प्रत्यर्पण से संबंधित कानून पुराने हो गए थे और केवल 37 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधियां थी। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। वर्ष 2004 से 2013 के बीच हर वर्ष में केवल चार भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था जबकि 110 अनुरोध लंबित थे। इसके अलावा अधूरे दस्तावेज और धीमी कार्यवाही के कारण प्रत्यर्पण प्रक्रिया बहुत जटिल थी और विदेशी अदालतें भी प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं देती थी।

 

साथ ही, कानूनी एवं न्यायिक बाधाओं के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध रद्द हो जाता था। गृह मंत्रालय और अन्य विभागों में समन्वय तथा एकीकृत रणनीति का अभाव था जिससे भगोड़ों की जानकारी साझा करना, लोकेशन ट्रैकिंग, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने जैसे कार्य धीमी गति से होते थे।

 

सरकार 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेन्सी संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा। वर्ष 2024 में सरकार ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किया जिनमें भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। पहली बार भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 और 356 में अनुपस्थिति में मुकदमे का प्रावधान रखा गया जिससे भगोड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी मुकदमे से लेकर अभियोजन तक संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी।


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