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पेपर लीक के खिलाफ बिल लोकसभा में पास, कितनी कड़ी सजा का प्रावधान

लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ बिल पास हो गया है। छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने मौजूदा कानून में संशोधन का ऐलान किया था। विपक्ष के भारी हंगामा के बाद कानून को निचले सदन से मंजूरी मिल गई है।

Lok Sabha Speaker Om Birla

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला। (Photo Credit: Social Media)

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भारी हंगामे के बाद बुधावर को लोकसभा से 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक- 2026' पास हो गया है। नीट पेपर लीक और देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा कानून बनाने का ऐलान किया था। 

 

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ दो साल पहले यानी 2024 में सरकार ने कड़ा कानून बनाया था। मगर इस वर्ष नीट पेपर में हुई धांधली और छात्रों के बढ़ते गुस्से के बाद सरकार ने मौजूदा कानून में संशोधन करके इसे कड़ा बनाने का फैसला किया।

 

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बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर भारी हंगामा हुआ। दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में हंगामे के बीच पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया। 

'पांच महीने में आएगा फैसला'

मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने तुरंत 12 जुलाई को जांच सीबीआई को सौंप दी। कल इस मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है और आज से सुनवाई शुरू हो चुकी है। नए संशोधन विधेयक के लागू होने के बाद फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई के साथ पांच महीने में फैसला आ जाएगा।

 

उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दी गई। बिल के पास होने के बाद कांग्रेस सांसदों ने दोबारा नारेबाजी की। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही को दिनभर की खातिर स्थगित कर दिया।

 

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नए बिल में क्या प्रावधान?

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक- 2026 में सरकार ने कड़े प्रावधानों को शामिल किया है। इसके तहत पेपर लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल जेल का प्रावधान है। वहीं 50 लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है। अगर अपराध संगठित तरीके से किया गया तो कम से कम सात साल की जेल औ 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

 

पुलिस समेत अन्य एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच भी पूरी करनी होगी। कानून में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का भी निर्देश है। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करनी होगी। 


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