JNU में मोदी-शाह के खिलाफ प्रदर्शन, 'कब्र खुदेगी' के नारों पर मचा हंगामा
जेएनयू में एक बार फिर विवादित नारेबाजी की गई है। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विवादित नारे लगाए गए हैं।

जेएनयू में नारेबाजी। (Photo Credit: ANI)
दिल्ली दंगों के मामले में 5 साल से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में विवादित नारेबाजी हुई है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जेएनयू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर विवादित नारे लगाए गए हैं।
जेएनयू कैंपस में विवादित नारेबाजी सोमवार रात को की गई। इसका वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ छात्र 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती' पर नारे लगाते हुए दिख रहे हैं।
हालांकि, इस मामले में अब तक पुलिस में कोई शिकायत नहीं की गई है। वहीं, अखिल विद्यार्थी परिषद का कहना है कि जेएनयू में इस तरह की नारेबाजी आम बात हो गई है।
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क्या है पूरा मामला?
5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका 'मुख्य' थी।
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इसके बाद जेएनयू में सोमवार रात को एक विरोध प्रदर्शन हुआ। इसी दौरान कुछ छात्र पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी करते हुए नजर आए।
इस पूरी घटना का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' के नारे लगाते दिख रहे हैं। हालांकि, खबरगांव इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
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अदिति मिश्रा का क्या है कहना?
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं।
अदिति मिश्रा ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा, 'विरोध प्रदर्शन में लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे। किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया।'
5 जनवरी 2020 को जेएनयू कैंपस में तब हिंसा भड़क गई थी, जब नकाबपोश लोगों की भीड़ यहां घुस गई और तीन हॉस्टलों में छात्रों को निशाना बनाया गया। नकाबपोशों ने छात्रों पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया था। इस हिंसा में 28 छात्र घायल हो गए थे।
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विद्यार्थी परिषद का क्या है कहना?
मोदी-शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी को लेकर जेएनयू में ABVP के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने कहा कि 'कल जेएनयू में ABVP-RSS की कब्र खुदेगी के नारे लगाए गए। जेएनयू में ऐसी नारेबाजी अब आम बात हो गई है।'
न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए मनीष चौधरी ने कहा, 'ABVP-RSS के करोड़ों कार्यकर्ता हैं। क्या वे करोड़ों कार्यकर्ताओं की कब्र खोदने की बात कर रहे हैं?'
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उन्होंने कहा, 'हमने यह भी देखा कि न्यूयॉर्क के मेयर ने चिट्ठी लिखकर उस 'आतंकवादी' को रिहा करने की मांग की, पर भारत का संविधान किसी के दबाव में नहीं आता। उसी का नतीजा है कि उनकी बेल खारिज कर दी जाती है और हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।'
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गिरिराज सिंह बोले- दुश्मनों की कब्र खुदेगी
जेएनयू में हुई इस नारेबाजी को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।
गिरिराज सिंह ने कहा कि जेएनयू को टुकड़े-टुकड़े गैंग का एक अड्डा बना रखा है। उन्होंने कहा कि यहां राहुल गांधी, टीएमसी, कम्युनिस्ट जैसे विकृत मानसिकता के लोग हैं, जो सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं मानते।
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उन्होंने कहा कि जेएनयू में मोदी-शाह की कब्र खुदेगी जैसे नारे लगाते हैं लेकिन मोदी और अमित शाह भारत के दुश्मनों की कब्र खोदते हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मनों की कब्र खुदती आई है और आगे भी खुदेगी।
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नारेबाजी की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। अगर इस देश में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन होंगे, तो फिर क्या बचा है? इन लोगों को देश, संविधान या कानून की कोई इज्जत नहीं है। ये अलगाववादी लोग हैं। ये सिर्फ देश को तोड़ने की बात करते हैं। देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गंदी भाषा का इस्तेमाल करना बहुत शर्मनाक है।'
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उन्होंने कहा, 'आज सुबह मैं AAP के सीनियर नेता संजय सिंह का बयान देख रहा था। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं और अगली ही लाइन में वह कहते हैं कि उन्हें जेल में नहीं रखना चाहिए। इसका मतलब है कि दिल्ली में दंगों में बेगुनाह लोगों को मारने वाले, हिंसा करने वाले और लोगों को मारने वाले लोगों को जेल में नहीं रखना चाहिए। कहीं न कहीं AAP और कांग्रेस हमेशा उमर खालिद, शरजील इमाम और दूसरे लोगों के पीछे, इस साजिश के पीछे नजर आते हैं।'
दिल्ली सरकार में एक और मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया कि विधानसभा में कुछ लोग हैं, जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया था।
उन्होंने कहा, 'शरजील इमाम ने नॉर्थ-ईस्ट इंडिया को अलग करने की बात कही थी। उमर खालिद ने 'भारत के टुकड़े-टुकड़े होंगे' के नारे लगाए थे, और 2020 के दंगों में भी उसका हाथ पाया गया था। ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाई जाती है क्योंकि इस असेंबली में ऐसे लोग हैं जिन्होंने शरजील इमाम के साथ मंच शेयर किया था।'
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उन्होंने कहा कि 'जब आप ऐसे लोगों को बढ़ावा देते हैं, तो JNU में ऐसे गैर-जिम्मेदार तत्व सिर उठाते हैं, जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं। JNU में जो हुआ है, जहां शरजील इमाम और उमर खालिद को एक तरह से सपोर्ट किया गया है, वह निंदनीय है और देश के खिलाफ है।'
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कांग्रेस और सीपीएम ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित जेएनयू में हुई नारेबाजी की निंदा की है। उन्होंने कहा कि विरोध करने का अधिकार सबको है, लेकिन इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'किसी को भी किसी भी कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध करने का अधिकार है लेकिन मुझे नहीं लगता कि 'कब्र' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना सही है।'
उन्होंने कहा कि 'ये छात्र हैं, उन्हें विरोध करने का अधिकार है। अगर उन्हें लगता है कि जिन दो लोगों को जमानत नहीं मिली है, उन्हें जमानत मिलनी चाहिए, तो बहुत से दूसरे लोग भी ऐसा ही सोचते हैं, लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल आपत्तिजनक है।'
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संदीप दीक्षित ने आगे कहा, 'कांग्रेस हमेशा इस बात पर कायम रही है कि पब्लिक बातचीत में हमें अपनी भाषा पर कंट्रोल रखना चाहिए। आप लोगों की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन एक तरीका होता है जिससे आप अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां करते हैं।'
वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि ये नारेबाजी विरोध करने का तरीका है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर जेएनयू में काफी गुस्सा है।
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उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 'मुस्लिम होने की वजह से उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ ऐसा हो रहा है। अन्याय तो उनके साथ हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। कितने दिनों तक ट्रायल शुरू नहीं होगा। यह पक्षपात तो है ही।'
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सीपीएम नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा, 'पिछले 50 सालों में देश में इस तरह के नारे 100 बार लगाए गए हैं। हालांकि, इस तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। नारे लगाते समय बहुत सावधान रहना चाहिए।'
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