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7 साल का प्यार एक महीने में खत्म, आर्मी मेजर तिरंगे में लिपटकर लौटे घर

मेजर हमजा आरिफ की पत्नी के हाथों की मेहंदी अभी फीकी नहीं पड़ी थी कि किस्मत ने एक बहुत बड़ा झटका दे दिया है, जो कभी नहीं भर सकता।

Major hamza arif death

पत्नी के साथ मेजर हमजा आरिफ। Photo Credit- Social Media

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राजस्थान के जैसलमेर में गुरुवार रात को हुए सड़क हादसे में भारतीय सेना के मेजर हमजा आरिफ की मौत हो गई। जैसलमेर में सड़क पर अचानक से आए ऊंट से कार टकराने की वजह से मेजर की जान चली गई। हमजा आरिफ की अभी एक महीने पहले ही शादी हुई थी। हमजा ने जिस लड़की को एक महीने पहले अपनी पत्नी बनाया था, अब उसकी मांग सूनी हो गई है। मेजर हमजा आरिफ की मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।


मेजर हमजा की पत्नी के हाथों की मेहंदी अभी फीकी नहीं पड़ी थी कि किस्मत ने एक बहुत बड़ा झटका दे दिया है, जो कभी नहीं भर सकता। हमजा मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले थे। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ 7 साल रिश्ते में रहने के बाद एक महीने पहले धूमधाम से शादी की थी।

 

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होनहार युवा थे हमजा आरिफ

 

इंदौर के धनवंतरी नगर के रहने वाले 30 साल के हमजा आरिफ बेहद होनहार युवा थे। उन्होंने साल 2016 में इंदौर के चमेली देवी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। बाद में 2017 में उन्होंने NDA की कठिन परीक्षा पास करके भारतीय सेना में अपनी जगह बनाई। मगर, अब उनकी देशप्रेम की सेवा थम गई है।

 

टाटा सफारी SUV ऊंट से टकराई 

 

दरअसल, मेजर हमजा आरिफ की जैसलमेर मिलिट्री स्टेशन के पास एक भयानक सड़क हादसे में मौत हो गई, जब उनकी टाटा सफारी SUV एक ऊंट से टकराकर कई बार पलट गई। इस हादसे में उनके साथ में दो युवा सहकर्मी लेफ्टिनेंट आयुष्मान गुसाईं और लेफ्टिनेंट अभिनव राठौर भी सवार थे। दोनों घायल हो गए हैं और उनका इलाज चल रहा है।

 

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नौ साल में लिए तीन प्रमोशन

 

मेजर हमजा आरिफ के परिवार में उनके माता-पिता और तीन बहनें हैं। वह एक मिडिल क्लास बोहरा मुस्लिम परिवार के इकलौते बेटे थे, और उनकी अचानक मौत से परिवार टूट गया है। इंदौर में उनके बचपन के दोस्त अमन शुक्ला के मुताबिक, हमजा देश की सेवा करने का पक्का इरादा करके NDA पास किया और 2017 में आर्मी में शामिल हो गए। 

 

हमजा ने अपनी लगन, अनुशासन और बहुत अच्छी सेवा से सिर्फ नौ साल में तीन प्रमोशन हासिल कर लिए और मेजर के पद तक पहुंचे। हादसे के समय वह जैसलमेर मिलिट्री स्टेशन में सेवा दे रहे थे।

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