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अतिक्रमण नहीं हटवा पाईं BMC कमिश्नर, सुप्रीम कोर्ट ने रुकवाई एक महीने की सैलरी

मुंबई में अतिक्रमण हटाने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े की सैलरी रोकने का आदेश दिया है। इसके साथ ही BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

BMC Commissioner Ashwini Bhide

BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े , Photo Credit- Social Media

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सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की ढिलाई पर सख्त नाराजगी जताते हुए BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े की सैलरी रोकने का बड़ा फैसला दिया है। साथ ही इनके पर्सनल स्टाफ की भी वेतन रोका गया है। कोर्ट ने कहा है कि बोरीवली में बस स्टैंड और प्रशासनिक भवन बनाने के लिए तय जमीन से अवैध कब्जे हटाने के उसके आदेशों का पालन नहीं किया गया। यह अदालत के आदेशों की अवमानना है। इसके साथ ही अदालत ने BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उनसे सवाल पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए? कोर्ट ने BMC की 30 दिन का अतिरिक्त समय देने की मांग भी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि उनके निर्देशों का दो बार उल्लंघन किया गया है।  

 

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद मुंबई के बोरीवली स्थित उस जमीन से जुड़ा है। इसे बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के बस स्टैंड और प्रशासनिक भवन के लिए निर्धारित किया गया था। कोर्ट ने BMC को साफ निर्देश दिए थे कि इस जमीन से अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाकर तय समय में काम पूरा किया जाए। कोर्ट की ओर से जुलाई 2026 में BMC को पूरा करने और कब्जे हटाने के लिए 3 महीने की आखिरी मोहलत दी थी। 

 

 

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया था कि सिविल कोर्ट में लंबित किसी प्रक्रिया के कारण निष्कासन की कार्रवाई नहीं रुकेगी क्योंकि कार्रवाई पर कोई स्टे नहीं था। इस आदेश के बावजूद तय सीमा में काम पूरा नहीं किया गया। एक बार फिर ज्यादा समय मांगने के लिए कोर्ट का रुख किया गया जिस पर SC ने साफ मना कर दिया। 

कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान BMC ने अपनी सफाई में कहा कि सभी को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और सुनवाई चल रही है लेकिन अंतिम आदेश जारी होना बाकी है। BMC ने यह तर्क भी दिया कि मराठी दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद करने की वजह से प्रक्रिया में समय लगा।

 

पीठ के सदस्य जस्टिस जोयमाल्या बागची ने पूछा कि जब पर्याप्त समय दिया गया था तो इस प्रक्रिया में इतना वक्त क्यों लगा? CJI सूर्यकांत ने चिंता जताई कि कहीं अधिकारी और कब्जाधारियों के बीच कोई मिलीभगत तो नहीं है। इसकी वजह से जानबूझकर देरी की जा रही है।

 

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कोर्ट का सख्त फैसला

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BMC को पहले ही काफी समय दिया जा चुका है और अब कोई और ढील नहीं दी जा सकती। कोर्ट का कहना है कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, BMC और राज्य सरकार कमिश्नर तथा उनके पर्सनल स्टाफ का वेतन जारी नहीं करेगी। समय सीमा का पालन न करने और अवमानना के लिए BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कमिश्नर को जवाब देने का निर्देश दिया गया है कि आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?

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