घर में कुत्ता या बिल्ली पालने का ट्रेंड लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक पालतू जानवरों को परिवार के सदस्य की तरह रखने का चलन बढ़ रहा है। इसके साथ ही पालतू जानवरों की देखभाल के लिए भी अब लोग प्रोफेशनल्स को हायर करने लगे हैं जिसके कारण पालतू जानवरों से जुड़ा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। कभी सिर्फ डॉग फूड और पट्टे तक सीमित रहने वाला यह बाजार अब ग्रूमिंग, ट्रेनिंग, पेट-सिटिंग, डॉग-वॉकिंग, बोर्डिंग और हेल्थ केयर जैसी कई सेवाओं तक पहुंच चुका है। लोगों के लिए यह रोजगार का भी जरिया बन रहा है।
जिन लोगों के पास पालतू जानवरों की देखभाल का अनुभव है, वे अब इसे कमाई का जरिया बना रहे हैं। कई युवा नौकरी के साथ पार्ट टाइम पेट-सिटिंग या डॉग-वॉकिंग कर रहे हैं, तो कुछ लोगों ने इसे पूरा कारोबार बना लिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में यह बिजनेस और ज्यादा बढ़ेगा। कई देशों में इस तरह के बिजनेस बड़े स्तर पर पहुंच गए हैं।
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कुत्तों को घुमाने से भी कमाई
शहरों में कामकाजी लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वे अपने पालतू कुत्ते को समय पर बाहर नहीं घुमा पाते। ऐसे में डॉग-वॉकर की जरूरत बढ़ी है। डॉग-वॉकर तय समय पर घर पहुंचता है और कुत्ते को कुछ देर टहलाता है। इस काम की खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। जानवरों को संभालने की समझ, समय की पाबंदी और उनके व्यवहार की जानकारी जरूरी है। कई लोग एक साथ एक से ज्यादा कुत्तों को टहलाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा कई लोग पार्ट टाइम काम के तौर पर इसे कर रहे हैं।
पेट ग्रूमिंग भी
कुत्ते-बिल्लियों को साफ-सुथरा रखने के लिए अब लोग नियमित ग्रूमिंग करवाते हैं। इसमें नहाना, बालों की कटिंग, नाखून काटना, कान साफ करना और दूसरी बेसिक देखभाल शामिल होती है। पहले ऐसे काम अधिकतर लोग घर पर ही कर लेते थे लेकिन अब शहरों में कामकाजी लोग पेट ग्रूमिंग सेंटर और मोबाइल ग्रूमिंग सर्विस जैसी सुविधाओं पर ज्यादा निर्भर रहने लगे हैं। युवा इसमें बेसिक ट्रेनिंग लेकर काम शुरू कर सकते हैं।
पेट-सिटिंग
कई परिवार ऐसे हैं जिनके घर में कुत्ता या बिल्ली है, लेकिन छुट्टी या ट्रैवल के दौरान उनके सामने समस्या खड़ी हो जाती है कि पालतू जानवर को किसके भरोसे छोड़ा जाए। पालतू जानवरों को दूसरी जगह साथ ले जाना काफी मुश्किलों से भरा है और मंहगा भी ऐसे में कुत्ते को घर पर छोड़ना ही ज्यादा लोग पसंद करते हैं। इसी जरूरत से पेट-सिटिंग और पेट-बोर्डिंग का काम बढ़ा है। पेट-सिटर कुछ घंटों के लिए जानवर की देखभाल कर सकता है। वहीं पेट-बोर्डिंग में पालतू जानवर को कुछ दिनों तक रखने की सुविधा दी जाती है।
पेट ट्रेनिंग में भी मौका
कुत्ते को घर के माहौल में ढालने, मालिक के आदेश सिखाने और उसके व्यवहार को कंट्रोल करने के लिए लोग पेट ट्रेनर की मदद लेते हैं। खासकर बड़े शहरों में पेट ट्रेनिंग एक अलग सेवा के रूप में सामने आई है। विदेशी नस्लों के कुत्तों के लिए तो यह सुविधा काफी अहम मानी जाती है। इसके लिए ट्रेनिंग सेंटर्स भी हैं और ट्रेनर कुत्ते के मालिक के घर जाकर भी ट्रेनिंग दे सकता है। इस क्षेत्र में अनुभव और ट्रेनिंग के साथ कमाई की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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पेट फूड बिजनेस
पालतू जानवरों के बढ़ते चलन का असर सिर्फ उनकी देखबाल से जुड़ी सर्विस पर नहीं पड़ा है। पेट फूड, खिलौने, कपड़े, बेड, कॉलर, लीश और दूसरी चीजों की मांग भी बढ़ी है। इससे पेट शॉप, ऑनलाइन पेट स्टोर, डिलीवरी और सप्लाई से जुड़े काम भी पैदा हो रहे हैं। छोटे दुकानदार अपने कारोबार में पेट प्रोडक्ट जोड़ रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी पालतू जानवरों के लिए सामान बेच रहे हैं।
खास बात यह है कि पेट केयर का कारोबार अभी बड़े शहरों में ज्यादा दिखाई देता है, लेकिन धीरे-धीरे छोटे शहरों में भी इसकी मांग दिखाई देने लगी है। जैसे-जैसे लोगों की आमदनी और खर्च करने की क्षमता बढ़ रही है, वैसे-वैसे वे अपने पालतू जानवरों की देखभाल पर भी पैसा खर्च कर रहे हैं।