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9 में से 7 क्लास घाटे में, फिर AC 3 टियर-चेयर कार कैसे कमा रहीं मुनाफा?

CAG के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में रेलवे की 9 पैसेंजर क्लासों में 7 घाटे में रहीं। सिर्फ AC 3-टीयर और AC चेयर कार क्लास को ही मुनाफा हुआ।

representative image of General and AC chair Car classes

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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भारतीय रेलवे की यात्री सेवाओं से होने वाली कमाई और उन्हें चलाने में आने वाली लागत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। CAG की हालिया रिपोर्ट के 2020-21 से 2024-25 तक के आंकड़ों के मुताबिक, पैसेंजर सेवाओं की 9 क्लासों में से 7 को 2024-25 में घाटा हुआ। यानी इन सेवाओं से जितनी कमाई हुई उन्हें चलाने में उससे ज्यादा खर्च आया। सिर्फ AC 3 टीयर और AC चेयर कार ही ऐसी क्लास रहीं जिनकी कमाई ने परिचालन खर्च को पार किया और रेलवे को मुनाफा हुआ।

 

आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में AC 3 टीयर से रेलवे को 3,645.44 करोड़ रुपये और AC चेयर कार से 376.77 करोड़ रुपये का परिचालन मुनाफा हुआ। वहीं, ऑर्डिनरी क्लास में रेलवे को सबसे ज्यादा 20,705.94 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। यानी सवाल यह है कि जब ज्यादातर पैसेंजर क्लास घाटे में चल रही हैं तो इन दोनों AC क्लास में खर्च निकालने के बाद भी मुनाफा कैसे बच रहा है?

 

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साल-वार AC टियर और चेयर कार की जानकारी

AC 3 टियर का प्रदर्शन हर साल एक जैसा नहीं रहा। 2020-21 में इस क्लास को 6,500.46 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा हुआ था। 2021-22 में भी 698.12 करोड़ रुपये का घाटा रहा। 2022-23 से तस्वीर बदल गई और AC 3 टियर को 3,300.08 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। इसके बाद 2023-24 में 2,501.07 करोड़ रुपये और 2024-25 में 3,645.44 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया।

 

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AC चेयर कार की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। 2020-21 में इस क्लास को 1,078.55 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। 2021-22 में घाटा घटकर 473.20 करोड़ रुपये, 2022-23 में 297.62 करोड़ रुपये और 2023-24 में 203.96 करोड़ रुपये रह गया। इसके बाद 2024-25 में पहली बार AC चेयर कार मुनाफे में आई और रेलवे को 376.77 करोड़ रुपये का फायदा हुआ।

AC 3 टीयर-चेयर कार कैसे दे रहीं रेलवे को मुनाफा?

AC 3 टीयर में मुनाफा ज्यादा होने की एक वजह यह बताई जा रही है कि पिछले कुछ सालों में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री स्लीपर की जगह AC 3 टीयर को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। लोग बेहतर सुविधा और आराम के लिए थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हैं। वहीं, स्लीपर कोच की संख्या कम होने से वहां भीड़ भी ज्यादा रहती है। इसी भीड़ से बचने के लिए कई यात्री AC 3 टीयर में सफर करना बेहतर समझते हैं।

 

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दूसरी ओर, AC चेयर कार को पहली बार 2024-25 में मुनाफा हुआ। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह वंदे भारत ट्रेनों को माना जा रहा है। वंदे भारत में AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव AC चेयर कार जैसी क्लास होती हैं। इस ट्रेन की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल देश में 162 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। अब तक 9.1 करोड़ से ज्यादा यात्री वंदे भारत से सफर कर चुके हैं।

बाकी क्लासों पर भारी घाटे का बोझ

2024-25 में स्लीपर क्लास को 19,158.13 करोड़ रुपये, सेकंड क्लास को 15,334.70 करोड़ रुपये और EMU सबर्बन सर्विस को 8,279.04 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। वहीं AC-2 को 663.47 करोड़, AC फर्स्ट क्लास को 70.79 करोड़ और फर्स्ट क्लास को 48.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यानी सबसे ज्यादा घाटा आम यात्रियों वाली ऑर्डिनरी, स्लीपर और सेकंड क्लास सेवाओं में हुआ।


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