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चावड़ी बाजार हादसा: गीले लैंटर पर डाल दी गई छत, बिल्डिंग गिरने की असल वजह

दिल्ली की चावड़ी बाज़ार में शीश महल वाली गली में गुरुवार को एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई मलबे में दब गए। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट...

Chawri Bazaar accident Roof placed on wet lintel reason for building collapse

शीश महल गली के बाहर का नजारा। Photo Credit- Khabargaon

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दिल्ली में जर्जर इमारतें के गिरने का सिलसिला नहीं थम रहा है, पिछले तीन महीने में गुरुवार को दिल्ली में तीसरी बिल्डिंग गिरने की दर्दनाक घटना घटी है। चावड़ी बाज़ार मेट्रो से महज 50 मीटर दूर सितारा वाली गली है। इसी गली के अंदर शीश महल वाली गली है, जिसके अंदर निर्माणाधीन इमारत आज सुबह भरभरा कर गिर गई। इस हादसे में काम कर रहे दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कई मजदूर अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। एनडीआरएफ ने मलबे में दबे एक मजदूर को जिंदा बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। बाक़ी के लोगों को बचाने का काम देर शाम तक जारी रहा।

 

हादसा होते ही दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं थी। दमकल की छह गाड़ियां, बचाव वाहन और पानी के टैंकर राहत एवं बचाव अभियान में लगाए गए लेकिन इस हादसे के बाद प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्राउंड जीरो पर पहुंचा खबरगांव

‘खबरगांव’ हादसे के बाद ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। शीश महल वाली गली में स्थानीय निवासियों ने बताया कि जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ है वह निर्माणाधीन थी। बिल्डिंग तकरीबन तीन महीने पहले बननी शुरू हुई थी, इमारत में तीसरी मंजिल का लेंटर डालने का काम चल रहा था। दो लेंटर पहले ही डाले जा चुके थे लेकिन आज तीसरी मंजिल का लेंटर डालते समय यह भरभराकर नीचे गिर गया।

 

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स्थानीय निवासियों ने बताई घटना

शीश महल वाली गली में पिछले 35 सालों से रह रहे एक निवासी के जानकारी देते हुए बताया, ‘मकान मालिक अपने पुराने घर को तोड़कर नया मकान बनवा रहा था। बेस के बाद इसमें तीन फ्लोर बन चुके थे, यह घर पिलर के साथ बन रहा था। आमतौर पर पुरानी दिल्ली में मकान गार्टर पर बनते हैं, जिसपर एक ही दिन में छत्त तैयार हो जाती है। लेकिन लेंटर और टाई बीम को डालने के बाद इसे सूखने में समय लगता है।’

बगैर सूखे लेंटर पर डाली छत

उन्होंने आगे बताया, ‘दूसरे फ्लोर का लेंटर सूखा नहीं था फिर भी तीसरे फ्लोर का लेंटर डाल दिया गया। आज सुबह अचानक से तीसरा फ्लोर दूसरे फ्लोर पर गिरा और तीसरा-दूसरा फ्लोर पहली मंजिल पर गिर गया। इस समय मजदूर वहां काम कर रहे थे, दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों के शव बाहर निकाले जा चुके हैं। एक मजदूर को अभी घायल अवस्था में एनडीआरएफ के जवान लेकर अस्पताल गए हैं।’

 

प्रशासन पर उठाए सवाल

इस हादसे को करीब से देखने वाले चश्मदीद ने बताया, ‘पुरानी दिल्ली में बनने वाली इमारतों का एमसीडी सही से नक्शा नहीं देखती और ना ही सही तरीके से सर्वे करती है। मकान बनवाने के लिए पैसे भी देने पड़ते हैं। पैसे देने के बाद चाहे जितने फ्लोर मकान, नक्शे से बाहर लेंटर डाल सकते हैं। हमारा मकान बना था तब हमने भी प्रशासन को पैसे दिए थे। मगर, ऐसे हादसों को रोकने के लिए एमसीडी को सही तरीके से सर्वे करना चाहिए और सही नक्शे को पास करना चाहिए। साथ ही सभी नियमों का पालन होना चाहिए।'

 

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हमने जब शीश महल वाली गली में जाने की कोशिश की तो पुलिस ने हमें अंदर घटनास्थल पर जाने नहीं दिया। पुलिस ने किसी भी मीडिया के वहां जाने पर पाबंदी लगाई हुई थी। गली के बाहर भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, एंबुलेंस थीं। एनडीआरएफ के जवान गली के अंदर बचाव अभियान चलाते रहे। 

 

आसपास की इमारतों का क्या है हाल?

सितारा वाली गली और शीश महल वाली गली में आसपास की इमारतों की हालत जर्जर है। यहां कई इमारतें ऐसी हैं, जिनके ऊपर बगैर मजबूती के कई फ्लोर खड़े कर दिए गए हैं। कई पुरानी इमारतों के ऊपर नया कंस्ट्रक्शन किया गया है। नियमों को ताक पर रखकर इमारतों को बनाया गया है, जिससे आने वाले समय में किसी बड़े हादसे को बुलावा दिया जा रहा है।

 

सितारा वाली गली में बेतरतीब तरीके से बिजली की तारें खुले में बिखरी पड़ी हैं। पास से देखने पर लगता है, जैसे तारों का जंगल हो।

 

CM रेखा ने दिए जांच के आदेश

इस बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चावड़ी बाजार में इमारत ढहने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं, इसमें ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया है।

दिल्ली में हादसे दर हादसे

इससे पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके में 25 अक्टूबर को एक निर्माणाधीन मकान का लेंटर और छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया था। इस हादसे में भी मलबे में दबने से दो लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में एक इमारत ढह गई थी। इस इमारत में पीजी चलता थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। 

 

CM रेखा ने पहले भी किए बड़े वादे

इस हादसे के बाद भी सत्य निकेतन पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था, 'किसी भी खतरनाक बिल्डिंग को छोड़ा नहीं जाएगा। ऐसी सभी बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट होगा और उन पर भी ऐक्शन लिया जाएगा। हम अधिकारियों के साथ मिलकर एक ड्राफ्ट बना रहे हैं कि जो भी इमारत जितनी पुरानी बनी है, उनको बताना होगा कि उनकी बिल्डिंग सुरक्षित ही नहीं है। अगर ऐसा नहीं होता है तो किसी भी तरह की पब्लिक यूटिलिटी चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।'

 

मुख्यमंत्री के इस बड़े ऐलान के बाद दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की घटनाएं हो रही हैं और लोग मर रहे हैं।


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