देश में डिजिटल क्रांति और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के साथ ही साइबर अपराधियों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में साइबर अपराध के 1,01,928 मामले दर्ज हुए, जो 2023 के 86,420 मामलों की तुलना में 17.9 प्रतिशत (करीब 18%) अधिक हैं। यह पहली बार है जब देश में साइबर क्राइम के मामलों की संख्या एक लाख के आंकड़े को पार कर गई है। 2022 में यह संख्या 65,893 थी, यानी दो वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में करीब 55% की वृद्धि दर्ज की गई।
साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन इनकी जांच और कार्रवाई की हालत काफी चिंता वाली है। 2024 में पूरे देश में साइबर क्राइम मामलों में सिर्फ 31.9% में ही चार्जशीट दाखिल हो पाई। यानी हर 100 मामलों में से करीब 68 मामलों में अभी तक पुलिस चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी है।
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तेलंगाना बना साइबर क्राइम का हॉटस्पॉट
देश में सबसे ज्यादा साइबर अपराध तेलंगाना में दर्ज किए गए हैं। साल 2024 में यहां कुल 27,230 मामले सामने आए, जो पूरे देश के साइबर अपराध मामलों का करीब 27 प्रतिशत है। तेलंगाना में अपराध की दर भी सबसे ज्यादा रही, जो 71.1 मामले प्रति लाख आबादी है।
| रैंक |
राज्य |
मामले |
| 1 |
तेलंगाना |
27,230 |
| 2 |
कर्नाटक |
21,993 |
| 3 |
उत्तर प्रदेश |
11,073 |
| 4 |
महाराष्ट्र |
9,922 |
| 5 |
बिहार |
6,380 |
बिहार और तमिलनाडु में तेज उछाल, कई राज्यों में गिरावट
वर्ष 2024 में बिहार में साइबर अपराध के 6,380 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 4,450 थी। यानी एक साल में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई। तमिलनाडु में मामले 4,121 से बढ़कर 5,793 हो गए। हरियाणा में भी 751 से बढ़कर 1,815 मामले दर्ज हुए।
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दूसरी ओर कुछ राज्यों में गिरावट देखने को मिली। राजस्थान में मामले 2,435 से घटकर 1,527 रह गए, जबकि असम में 909 से घटकर 408 और पश्चिम बंगाल में 309 से घटकर 282 मामले दर्ज हुए।
जांच की रफ्तार कमजोर
साइबर अपराध के बड़े केंद्र माने जाने वाले तेलंगाना में चार्जशीट दाखिल करने की दर सिर्फ 16.2% रही, जबकि कर्नाटक में यह 22.1% है। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश में यह दर 86.2%, मिजोरम में 84.4%, चंडीगढ़ में 79.3% और उत्तराखंड में 76.9% रही। इससे साफ पता चलता है कि जहां साइबर अपराध के मामले ज्यादा हैं, वहां जांच और केस आगे बढ़ाने की रफ्तार काफी धीमी है।
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पूरे देश की बात करें तो सिर्फ 31.9% मामलों में ही चार्जशीट दाखिल हो पाई है। इसका मतलब यह है कि साइबर अपराधियों तक पहुंचना और उन्हें सजा दिलाना अभी भी काफी मुश्किल काम बना हुआ है।