दिल्ली के लिए आज का दिन बेहद अहम और बड़ा है। एक तरफ संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है, दूसरी ओर आज ही कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों के द्वारा 'संसद चलो' मार्च तय था। दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। प्रदर्शन के चलते संसद मार्ग के आसपास धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर भारी सुरक्षा बल भी तैनात कर दिया गया है।
यह पहली बार नहीं है, भारत के इतिहास में कई बार किसान, छात्र, कर्मचारी और सामाजिक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच या संसद मार्च किया है। इनमें से कई आंदोलनों ने सरकार को झुका दिया लेकिन कुछ आंदोलन अपनी प्रमुख मांगें मनवाने में सफल नहीं हो सके।
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दिल्ली कूच और संसद मार्च का इतिहास
1988 महेंद्र सिंह टिकैत किसान आंदोलन: नई दिल्ली वोट क्लब में 25 अक्टूबर 1988 को बड़ी किसान पंचायत हुई। इस पंचायत में 14 राज्यों के किसान आए थे। करीब 5 लाख किसानों ने विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक कब्जा कर लिया था। इस आंदोलन की वजह से केंद्र सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ा। राजीव गांधी के भारतीय किसान यूनियन की सभी 35 मांगों पर फैसला लेने के आश्वासन पर वोट क्लब का धरना 31 अक्टूबर 1988 को खत्म हुआ।
2018 किसान मुक्ति संसद: 2018 में दिल्ली के रामलीला मैदान में 'किसान मुक्ति मार्च' आयोजित किया गया, जिसे 'किसान मुक्ति संसद' भी कहा गया। इसमें देशभर से हजारों किसान शामिल हुए और रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक मार्च निकाला। किसानों ने कर्ज माफी, फसलों का उचित दाम और कृषि संकट पर संसद में चर्चा की मांग उठाई थी।
2020–21 किसान दिल्ली चलो: नवंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के किसानों ने 'दिल्ली चलो' आंदोलन शुरू किया था। उस समय किसानों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद वे सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर ही डट गए। यह आंदोलन करीब 13 महीने तक चला। सरकार को इस आंदोलन की वजह से तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करना पड़ा।
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2023 पहलवान आंदोलन: 2023 में देश के कई पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दिया। नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन पहलवानों ने जंतर मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और कई पहलवानों को हिरासत में ले लिया था। इस आंदोलन के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। उन्हें पद से हटा दिया गया।
2024 किसान दिल्ली चलो 2.0: 2024 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों ने फिर 'दिल्ली चलो' का आह्वान किया। उन्हें दिल्ली में प्रवेश नहीं मिला और आंदोलन की प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं।
2026 CJP 'संसद चलो' मार्च
आज यानी 20 जुलाई 2026 में कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों के द्वारा 'संसद चलो' मार्च होना तय था लेकिन दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी और संसद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाते हुए प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोक दिया। बताते चलें कि दिल्ली पुलिस ने रविवार शाम एक एडवाइजरी जारी कर किसी भी तरह के मार्च की इजाजत देने से इनकार कर दिया था।