दिल्ली के कनॉट प्लेस में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। सेंट्रल दिल्ली में शनिवार को
कॉकरोच जनता पार्टी
ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी। ऐसे में प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर तो नहीं लेकिन कनॉट प्लेस पर विरोध प्रदर्शन करने लगे। सैकड़ों प्रदर्शनकारी पुलिस की हाईटेक सुरक्षा व्यवस्थाओं के बावजूद सेंट्रल दिल्ली में आ गए। लेकिन प्रदर्शनकारी जैसे ही कनॉट प्लेस आए, वैसे ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
हैरत की बात तो यह है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए इतने कड़े कदम और प्रतिबंध लगाए हैं कि, ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बॉर्डर पर होनी चाहिए। मगर पुलिस के पास हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बैठाने के लिए कोई ढंग की बस नहीं है। पुलिस लोगों को डिटेन करके ‘न्यायिक अभिरक्षा वाहिनी’ यानी कैदी वैन में बैठाकर ले जा रही है।
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दम घोंटू ‘कैदी वैन’ में ले जा रही पुलिस
प्रदर्शनकारियों को बिना अपराध के दम घोंटू 'कैदी वैन' में बैठाया गया। बिना अपराध के प्रदर्शकारियों को कैदी वैन में हिरासत में लेने पर दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह कैदी वाहन चारों तरफ से पैक हैं, जिसमें सांस लेना में मुश्किल पैदा हो सकती है। ऐसे में इन वाहनों में अगर किसी की सांस लेने की वजह से तबियत खराब होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

हिरासत में लेने के बाद जब इन प्रदर्शनकारियों को कैदी वैन में लेकर ले जाया जा रहा है तो, सभी वैन की जाली को पीटते हुए जा रहे हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इन प्रदर्शनकारियों को बाहरी दिल्ली के किसी थाने में ले जाकर बैठाया जाएगा और बाद में छोड़ दिया जाएगा।
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सेंट्रल दिल्ली छावनी में हुई तब्दील
देश की राजधानी दिल्ली में इस समय इतने सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जितने 15 अगस्त और 26 जनवरी को भी कम ही देखने को मिलते हैं। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा बुलाए गए विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सेंट्रल दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हजारों जवान, सैकड़ों सब इंस्पेक्टर, दर्जनों इंस्पेक्टर और आईपीएस अधिकारी तैनात हैं। यह तैनाती महज चार किलोमीटर (जंतर मंतर) के दायरे में की है।
जंतर मंतर के आसपास के इलाके में दिल्ली पुलिस, दिल्ली पुलिस के कमांडो, पुलिस की स्पेशल सेल, RAF, ITBP, CISF, SSB और CRPF के हजारों जवान उतारे गए हैं। इसमें पुरुष और महिला सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं।