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BNSS की धारा 163 क्या है, उल्लंघन करने पर क्या सजा हो सकती है?

दिल्ली में जंतर मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों पर BNSS की धारा 163 के उल्लंघन का आरोप है।

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दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कर पर उतरे प्रदर्शनकारी। Photo Credit: PTI

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देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। 10 अक्तूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बड़ी घेराबंदी की योजना बनाई है। जंतर मंतर पर होने जा रहे प्रदर्शन के बीच पुलिस ने कहा है कि प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले अनुमति लेनी होगी। जमावड़ा 1,000 लोगों से ज्यादा नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) की प्रक्रिया में धांधली के आरोप विपक्ष लगा रहा है। ज्ञानेश कुमार पर यह भी आरोप हैं कि वह अपने सहयोगियों की सलाह नहीं लेते हैं, मनमानी से भरे फैसले लेते हैं।

पुलिस और प्रशसान का साफ निर्देश है कि जंतर मंतर वाले इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNNS) की धारा 163 लागू है। प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाएगी। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी में है। धारा 163 के तहत आदेश 21 अक्टूबर तक लागू हैं। ऐसें में पुलिस प्रदर्शनों की इजाजत नहीं देगी। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने संसद मार्ग थाने में इंटिमेशन लेटर दिया है। संगठन का कहना है कि हजारों लोग इसमें शामिल होंगे। इससे एक दिन पहले चुनाव आयोग तक मार्च और आकाशवाणी भवन में 8 घंटे से ज्यादा धरने के बाद सैकड़ों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।

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क्या होगा अगर 10 अक्तूबर को भी जुटे प्रदर्शनकारी?

अगर प्रदर्शनकारी 10 अक्तूबर को प्रदर्शनस्थल पर पहुंचते हैं तो उन पर धारा 163 के उल्लंघन के आरोप लग सकते हैं। भारतीय न्याय संहिता की यह धारा निषेधाज्ञा है। जंतर मंतर के नजदीकी इलाकों में यह धारा 2 अक्तूबर को लागू हुई थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों के मामले में पुलिस ने BNS की धारा 223 के साथ सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा से जुड़ी धाराएं भी लगाई हैं।

क्या है BNSS की धारा 163?

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, विशाल अरुण मिश्रा ने बताया, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 निषेधाज्ञा से जुड़ी है। यह पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 की जगह लागू हुई है। इसके तहत जिला मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार से अधिकार पाए किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को आदेश जारी करने का अधिकार है।'

एडवोकेट विशाल अरुण मिश्र ने बताया, 'यह आदेश उन मामलों में दिया जाता है, जहां उपद्रव या खतरे की आशंका हो और तुरंत कार्रवाई जरूरी लगे। आदेश किसी खास व्यक्ति के लिए हो सकता है या किसी इलाके में सभी लोगों के लिए। जरूरी होने पर यह आदेश दूसरे पक्ष को सुने बिना भी जारी किया जा सकता है।'

यह धारा जरूरी क्यों है?

एडवोकेट विशाल अरुण मिश्र ने कहा, 'आमतौर पर इस धारा का इस्तेमाल भीड़ जमा होने, जुलूस और धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए होता है। इसमें पांच या ज्यादा लोगों के जमा होने, जुलूस, धरना, नारेबाजी और भाषण पर रोक है। प्रतिबंधित इलाके में हथियार, बैनर, प्लेकार्ड, लाठी और डंडे ले जाना भी मना है।'

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उल्लंघन पर BNS की धारा 223 में होती है कार्रवाई

एडवोकेट विशाल अरुण मिश्र ने बताया, 'धारा 163 खुद सजा तय नहीं करती। आदेश तोड़ने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 लगती है। यह किसी लोकसेवक के जारी किए आदेश की अवहेलना से जुड़ी है। यह धारा पुरानी IPC की धारा 188 की जगह आई है और सजा पहले से सख्त है।'

क्या सजा हो सकती है?

एडवोकेट विशाल अरुण मिश्र ने बताया, 'अगर आदेश के उल्लंघन से किसी वैध काम में लगे व्यक्ति को नुकसान होता है या इसका खतरा बनता है तो छह महीने तक की साधारण कैद या 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर इससे मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा होता है, या दंगा-फसाद होता है या होने की आशंका बनती है तो एक साल तक की कैद या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

कब तक लागू रह सकता है यह आदेश?

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'धारा 163 का आदेश आमतौर पर 2 महीने से ज्यादा लागू नहीं रह सकता। राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर इसे 6 महीने तक बढ़ा सकती है। आदेश से प्रभावित कोई व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देकर इसे रद्द या बदलने की मांग कर सकता है।'

2 अक्तूबर के प्रदर्शन में भी दर्ज हुआ है केस 

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में BNSS की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन पर तीन FIR दर्ज की हैं। दो FIR संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज हुई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक FIR में BNS की धारा 223 के साथ सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा से जुड़े प्रावधान लगाए गए हैं। 


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