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बिटचैट ऐप पर सरकार का शिंकजा? NEET प्रोटेस्ट में बना था प्रदर्शनकारियों का सहारा

बिना इंटरनेट के चलने वाला बिटचैट ऐप भारत में एप्पल स्टोर से हटा दिया गया है। NEET प्रोटेस्ट में इसका इस्तेमाल हुआ था, अब CEC के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान इसे हटा दिया गया है।

Bitchat App India, बिटचैट ऐप

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-ChatGPT

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देश के बाद भारत के गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से बिटचैट ऐप (Bitchat) को हटा दिया गया है। इस एप को बनाने वाले और ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने शनिवार को एक्स पर यह जानकारी दी। बिटचैट की बात करें तो यह एक मैसेजिंग ऐप है, जो इंटरनेट के बिना भी काम कर सकता है। यह ब्लूटूथ जैसी वायरलेस तकनीक की मदद से आसपास मौजूद डिवाइसों के बीच मैसेज भेजने की सुविधा देता है। 

 

जैक डोर्सी ने अपनी पोस्ट में एप्पल की ऐप रिव्यू टीम का भेजा नोटिस भी शेयर किया। इसमें कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के कहने पर ऐप को भारत के ऐप स्टोर से हटाया जा रहा है। इसकी वजह यह बताई गई है कि ऐप पर ऐसी सामग्री है, जो भारत में गैरकानूनी है। केंद्र सरकार ने ऐसे समय में बिटचैट पर कार्रवाई की है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 

 

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NEET प्रोटेस्ट में बना था प्रदर्शनकारियों का सहारा 

आंकड़ों के मुताबिक, 17 से 23 जुलाई के बीच भारत की हिस्सेदारी बिचचैट के वैश्विक डाउनलोड में 85 फीसदी रही। इससे पहले के 30 दिनों में यह सिर्फ एक फीसदी थी। इतना ही नहीं, 23 जुलाई को भारत में दैनिक सक्रिय यूजर्स 3.3 लाख के पार पहुंच गए थे। इसपर जुलाई में पहली कार्रवाई हुई। गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम शाखा ने GitHub से इस ऐप को हटाने का निर्देश दिया था, तब सुरक्षा एजेंसियों ने भी चिंता जताई थी। 

अब एप्पल ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश पर बिटचैट को भारत के ऐप स्टोर से हटा दिया। ऐप स्टोर के साथ-साथ गूगल प्ले से भी इसे हटाए जाने की रिपोर्ट है। जैक ने जो नोटिस शेयर किया है, उसके मुताबिक ऐप में ऐसा कंटेंट है जो भारत में गैर-कानूनी है। इसके अलावा ऐप्पल ने भारत में इसकी टेस्टिंग भी बंद कर दी। सरकार का यह फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान आया है।  

बिटचैट काम कैसे करता है?

बता दें कि यह ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप है, जिसे ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने बनाया है। यह बिना इंटरनेट, मोबाइल डेटा और वाई-फाई के भी चलता है। इसकी मदद से आसपास मौजूद यूजर्स को सीधे मैसेज भेजे जा सकते हैं। यह ब्लूटूथ लो एनर्जी के जरिए पास के डिवाइस खोजता है। इसके मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और इसमें फोन नंबर या अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती है।  

 

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बिटचैट काम कैसे करता है?

बता दें कि यह ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप है, जिसे ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने बनाया है। यह बिना इंटरनेट, मोबाइल डेटा और वाई-फाई के भी चलता है। इसकी मदद से आसपास मौजूद यूजर्स को सीधे मैसेज भेजे जा सकते हैं। यह ब्लूटूथ लो एनर्जी के जरिए पास के डिवाइस खोजता है। इसके मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और इसमें फोन नंबर या अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती है। 

 

बिटचैट जैसे ऐप तब काम आते हैं, जब अचानक इंटरनेट बंद कर दिया जाता है और जैमर की वजह से मोबाइल कनेक्शन काम करना बंद कर देते हैं। NEET प्रोटेस्ट के दौरान इसका इस्तेमाल इसलिए बढ़ा था। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान अब यह ऐप हटा दिया गया है। 

सवाल क्यों उठ रहे हैं?  

डिजिटल अधिकार संगठन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने ऐप को हटाने को असंवैधानिक बताया है। संगठन का कहना है कि आईटी एक्ट की धारा 69ए अवैध कंटेंट ब्लॉक करने की अनुमति देती है लेकिन इंटरनेट शटडाउन में काम करने वाले मैसेंजर ऐप को नहीं। डोर्सी ने कहा कि भारत सरकार को बिटचैट जैसी तकनीकें पसंद नहीं हैं और वह इसे हटवाना चाहती है।  

 

यही वजह है कि IFF ने सरकार से ब्लॉकिंग ऑर्डर सार्वजनिक करने, उसके आधार और संबंधित रिकॉर्ड बताने और आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसी खास गैरकानूनी इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है लेकिन पूरे कम्युनिकेशन टूल को हटाना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम है।

 

जुलाई 2026 में केंद्र सरकार की ओर से बिटचैट समेत कुछ ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप्स को लेकर आपत्ति जताई गई थी। अधिकारियों की चिंता यह थी कि ये ऐप इंटरनेट शटडाउन के दौरान भी काम कर सकते हैं, और कम्युनिकेशन की लॉफुल इंटरसेप्शन, एट्रिब्यूशन और ट्रेसबिलिटी को मुश्किल बना सकते हैं।  


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