विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक- 2026 (FCRA) को संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति को भेजने का फैसला लिया गया। संयुक्त समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही को 3 बजे तक स्थगित कर दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एफसीआरए बिल को जेपीसी में भेजने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष के हंगामे के बीच विधेयक को जेपीसी को भेजने वाला प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ। इसके बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने दो बजकर 27 मिनट पर सदन की बैठक तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। कमेटी को बिल से जुड़े विधायी प्रावधानों की गहन जांच करेगी और संसद को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
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2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक समिति को अपनी रिपोर्ट संसद में सौंपनी होगी। प्रस्ताव में यह भी बताया गया कि संयुक्त समिति की बैठक के लिए कोरम समिति के कुल सदस्यों की संख्या का लगभग एक-तिहाई होगी।
कांग्रेस ने की विधेयक वापस लेने की मांग
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने एफसीआरए विधेयक वापस लेने की मांग की। उन्होंने दावा है कि यह विधेयक गैर सरकारी संगठनों (NGO) और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाया गया। उनका कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है। उन्होंने विधेयक को वापस लेने की मांग। सपा अध्यक्ष
अखिलेश यादव
ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया और कहा कि पूरा विपक्ष एफसीआरए के खिलाफ है। डीएमके नेता टीआर बालू ने भी विधेयक को वापस लेने की मांग उठाई।
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संसदीय कार्य मंत्री
किरेन रिजिजू
ने कहा कि विपक्ष को विधेयक को संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) के पास भेजने के सरकार के फैसले का स्वागत करना चाहिए और उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक में अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने जैसा कुछ भी नहीं है।