logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'तहस-नहस कर रहा...,' देश के पूर्व IAS-IPS अधिकारियों ने मांगा ज्ञानेश का इस्तीफा

देश के पूर्व नौकरशाहों ने भारत निर्वाचन आयोग जाकर CEC ज्ञानेश कुमार को महाभियोग का 'जन-नोटिस' सौंपने वाले थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकते हुए इसकी अनुमति नहीं दी।

Gyanesh Kumar resignation

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व नौकरशाह। Photo Credit- Khabargaon

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यशैली के खिलाफ देश के पूर्व नौकरशाह भी उतर गए हैं। पूर्व सिविल सर्वेंट सोमवार को भारत निर्वाचन आयोग जाकर CEC ज्ञानेश कुमार को महाभियोग का 'जन-नोटिस' (People Notice of Impeachment) सौंपने वाले थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकते हुए इसकी अनुमति नहीं दी। नौकरशाह चुनाव आयोग ना जा पाएं, दिल्ली पुलिस ने इसके लिए भारी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की है।

 

निर्वाचन आयोग जाने की अनुमति नहीं मिलने पर पूर्व नौकरशाहों ने दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस करके अपनी बात रखी। सभी पूर्व अधिकारियों ने एक सुर में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा और कहा कि वह हमारे महान देश भारत के लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं।

कौन-कौन हुआ शामिल?

दरअसल, यह प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से आज मुलाकात की मांग कर रहा था। प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व IAS और दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग, केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व सचिव जी.के. पिल्लई, पूर्व IAS और केंद्र सरकार में सचिव अमिताभ पांडे, पूर्व IAS जयश्री मुखर्जी, पूर्व विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी अशोक शर्मा, पूर्व IPS और IB चीफ रहे यशोवर्धन आजाद, पूर्व अधिकारी आशीष जोशी सहित योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज और अन्य शामिल रहे।

 

यह भी पढ़ें: विजय का खास प्लान, ममता को आखिरी चोट की तैयारी, उपचुनाव में क्या दांव पर है?

'एक आदमी संविधान को छिन्न-भिन्न किया कर रहा है'

दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग ने कहा कि यहां जितने भी पूर्व अधिकारी बैठे हैं... हमने 40-45 साल सरकार की सेवा की है। जब हमने सरकार जॉइन की थी तो ये निर्णय लिया था कि आईएएस जॉइन करेंगे, आईपीएस जॉइन करेंगे, तो हम लोग संविधान को हमेशा अपनी जिंदगी में और जबतक हम काम करेंगे तो उसको फॉलो करेंगे।

 

 

पूर्व IAS नजीब जंग ने कहा, 'हमें आज इस बात का दुख हो रहा है कि हमारा संविधान जिसको हम लोग अपनी बाइबल समझते हैं, अपनी गीता समझते हैं और अपनी कुरान समझते हैं, उसको छिन्न-भिन्न किया जा रहा है। इसके पीछे सिर्फ एक शख्स हैं ज्ञानेश कुमार। ज्ञानेश कुमार हमसे 15 साल सर्विस में जूनियर हैं। हमें बहुत शर्म आती है कि हमारी ही सर्विस के एक कलीग इस किस्म की हरकत कर रहे हैं।'

SIR प्रक्रिया में नीयत साफ नहीं

उन्होंने कहा, 'क्योंकि अब ये साबित हो चुका है कि जो उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया इस्तेमाल की है, इसमें नीयत साफ नहीं है। इसमें उनकी नीयत खराब थी और इसी कारण 13 करोड़ लोग आज वोट से वंचित हो गए हैं। ये नंबर ऐसा है जो आप बर्दाश्त नहीं कर सकते। एक भी व्यक्ति को उसके वोटिंग अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। मैंने अपनी जिंदगी में 6-7 चुनाव कराए हैं लेकिन इस तरह की स्थिती कभी नहीं आई।'

हर तरफ से विरोध की आवाज आ रही- यशोवर्धन आजाद 

पूर्व आईपीएस ऑफिसर यशोवर्धन आजाद ने कहा कि चुनाव आयुक्त से हम लोग मिलना चाहते थे लेकिन पुलिस ने चारों तरफ से ऐसी बैरिकेडिंग कर रखी थी कि हम देखकर इम्प्रेस्ड हो गए क्योंकि हमें रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने करीब 2000 जवानों की फोर्स लगाई थी। एक संवैधानिक संस्था के चीफ ज्ञानेश कुमार को सड़क पर जनता महाभियोग का नोटिस दे रही है। सिर्फ विपक्षी पार्टियां ही नहीं और बल्कि सिविल सोसाइटी से भी विरोध की आवाज आ रही है।

 

यशोवर्धन आजाद ने कहा कि सरकार बिना रीढ़ की हड्डी के टूटे हुए अधिकारियों की पोस्टिंग बार-बार क्यों कर रही है? सरकार जो पोस्टिंग कर रही है उसके पीछे एक काला चिट्ठा है। इसके लिए जनता को आवाज उठानी चाहिए। आज यह धंधा बन गया है कि रिटायरमेंट के बाद सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को बड़ी पोस्टिंग दे रही है।

 

यह भी पढ़ें: कफन ओढ़कर जंतर मंतर पर लेटे NSUI कार्यकर्ता, पुलिस ने हिरासत में लिया

'हमने कभी नहीं सोचा- हम भारतीय नहीं'

गृह मंत्रालय के पूर्व सचिव जी.के. पिल्लई ने कहा, 'चुनाव आयोग ने बदलाव करते हुए कहा है कि आप साबित करें कि आप एक मतदाता हैं और आयोग इसे इस रूप में देख रहा है कि आप कैसे एक नागरिक हैं। हम सभी ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी यह नहीं सोचा कि हम एक भारतीय के अलावा कुछ और भी हैं। मैंने कभी नहीं सोचा। बड़ा हुआ तो UPSC में प्रवेश लिया। नंबरों के आधार पर मेरी जन्मतिथि स्वीकार की गई और फिर IAS बने। गृह सचिव बना और सेवानिवृत्त हो गया। अब वह कह रहे हैं कि साबित करो कि तुम एक भारतीय हो।'

 

पूर्व अधिकारी पिल्लई ने कहा कि यह एक बुनियादी बदलाव है कि हर व्यक्ति, जो एक भारतीय है उससे अब यह साबित करने को कहा जा रहा है कि वह भारतीय है। जबकि संविधान स्वयं यह कहता है कि वे सभी जो भारत में पैदा हुए हैं निश्चित रूप से पुराने ब्रिटिश भारत और रियासतों में 1947 से पहले, वे भारत के नागरिक होंगे। 1988 और 2002 में नागरिकता अधिनियम में कुछ बदलाव किए गए थे, लेकिन इससे प्रभावित होने वाली आबादी का प्रतिशत बहुत छोटा है।

 

उन्होंने आगे कहा कि और यदि आप... यह ऐसा कहने जैसा है कि मैं उस 0.01% आबादी को पकड़ना चाहता हूं जो अवैध प्रवासी, घुसपैठिए या जो कुछ भी हो सकते हैं, और उसके लिए आप 99.9% लोगों से साबित करने को कह रहे हैं।


और पढ़ें