logo

मूड

ट्रेंडिंग:

हर साल ग्रीन दिवाली की अपील, 8 साल में क्या बदला? दिल्ली के AQI आंकड़े देखिए

हर साल ग्रीन दिवाली के अपील लोगों से की जाती है। फिर भी दिवाली के दूसरे दिन AQI का स्तर बढ़ा नजर आता है। 2018 से 2025 तक दिल्ली में दिवाली के आसपास AQI के आंकड़े क्या बताते हैं?

ग्रीन दिवाली, Green Diwali Campaign, Air Pollution

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-ChatGPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सालों से लगातार ग्रीन दिवाली जैसी जागरूकता अभियान चला रही है।साल 2017 में मंत्रालय ने ‘हरित दिवाली, स्वस्थ दिवाली’ अभियान शुरू किया था, जिसमें बच्चों से पटाखे न जलाने और प्रदूषण कम करने में योगदान देने की अपील की गई थी। साल 2018 में इस अभियान को और आगे बढ़ाया गया और इसे ‘ग्रीन गुड डीड’ मुहिम से जोड़ा गया। मंत्रालय लगातार पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने के लिए जागरूकता और लोगों की भागीदारी पर जोर दे रहा। 

 

2026 में मंत्रालय के सहयोग से वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (WWF-India) के EIACP कार्यक्रम के तहत 20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक देशव्यापी ‘ग्रीन दिवाली’ अभियान शुरू किया है। EIACP यानी एनवायरनमेंटल इन्फॉर्मेशन, अवेयरनेस, कैपेसिटी बिल्डिंग एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम। इसके तहत नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के 130 शहरों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। 

 

इसका मकसद है लोगों को पटाखे न जलाने, दीये और ऊर्जा-कुशल लाइट इस्तेमाल करने, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने और कचरे को अलग-अलग रखने को लेकर जागरूक करना। ऐसे में सवाल  उठता है कि सालों से लगातार सरकार की अपील के बाद दिवाली के आसपास प्रदूषण की स्थिति में कितना बदलाव आया है, आंकड़े क्या बताते हैं?

 

यह भी पढ़ें: '22 साल साथ रहे, तब आरोप क्यों नहीं लगाए', रेखा आर्य मामले पर बोले CM धामी

दिल्ली में दिवाली के आसपास AQI 

दिल्ली की बात करें तो साल 2018 में दिवाली से एक दिन पहले AQI 338, दिवाली के दिन 281 और अगले दिन 390 दर्ज किया गया। 2019 में यह क्रमशः 287, 337 और 368 रहा। साल 2020 में AQI 339 से बढ़कर दिवाली के दिन 414 और अगले दिन 435 हो गया। 2021 में यह 314, 382 और 462 दर्ज किया गया। वहीं, 2022 में दिवाली से पहले AQI 259, दिवाली के दिन 312 और अगले दिन 302 रहा। 

 

साल 2023 में दिवाली से एक दिन पहले AQI 220, दिवाली के दिन 218 और अगले दिन बढ़कर 358 हो गया। साल 2024 में AQI दिवाली से एक दिन पहले 304, दिवाली के दिन 339 और अगले दिन 362 रहा। वहीं, 2025 में यह क्रमश: 326, 345 और 351 दर्ज किया गया। दिल्ली के आंकड़ों से पता चलता है कि कई वर्षों में दिवाली के अगले दिन AQI बढ़ा, हालांकि 2022 में इसमें गिरावट दर्ज की गई थी। प्रदूषण पर पटाखों के अलावा मौसम, हवा की गति, पराली जलाने और अन्य स्रोतों का भी असर पड़ता है। 

सख्ती के बाद पिछली बार खूब हुई थी आतिशबाजी

पिछले साल दिवाली के बाद जहरीली धुंध छा गई और हवा की गुणवत्ता और खराब हो गई। ऐसा तब हुआ, जब अदालत ने कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे जलाने का निर्देश दिया था। तब भी लोगों ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें केवल ‘ग्रीन पटाखे’ जलाने और उसके लिए सीमित समय तय किया गया था। 

 

हालांकि दिल्ली में पूरे साल प्रदूषण की समस्या बनी रहती है। इसके पीछे गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, धूल और दूसरे कारण हैं। दिवाली से पहले भी हवा की गुणवत्ता खराब हो रही थी। 2025 में दिवाली के एक दिन बाद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 360 दर्ज किया गया। इसमें PM2.5 जैसे बेहद छोटे कणों का स्तर भी शामिल होता है और ये कण फेफड़ों में पहुंच सकते हैं और कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं।


AQI के अलग-अलग स्तरों को इस तरह समझा जा सकता है:

 

- 101 से 200: मध्यम
- 201 से 300: खराब
- 301 से 400: बहुत खराब
- 400 से ऊपर: गंभीर

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के मुताबिक, 24 घंटे में PM2.5 का औसत स्तर 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए लेकिन दिल्ली के कुछ इलाकों में इसका स्तर तय सीमा से 24 गुना ज्यादा था।ॉ

 

यह भी पढ़ें: हैरी ब्रूक ने तोड़ा शुभमन गिल का रिकॉर्ड, 114 गेंद में ठोका दोहरा शतक

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को दी थी अनुमति 

पिछली बार दिवाली से एक सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूरी तरह से लगे प्रतिबंध में ढील दी थी। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ तथाकथित ‘ग्रीन पटाखे’ जलाने की अनुमति दी थी। ऐसा दावा किया जाता है कि पारंपरिक पटाखों के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं और इनसे राख भी कम निकलती है। आलोचकों का कहना है कि ग्रीन पटाखे भी हवा में जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं और इन्हें जलाने से भी प्रदूषण होता है। दिवाली के बाद पटाखों के कारण हवा खराब होती है लेकिन केवल यही कारण नहीं हैं। आंकड़ों से साफ है कि दिवाली के एक दिन बाद हवा की गुणवत्ता खराब हुई है।   


और पढ़ें