हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर काफी समय से हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन पटरियों को खतरनाक तरीके से पार कर रहे हैं। प्लेटफॉर्म संख्या 2 से 9 नंबर तक दो पक्के रास्ते बनाए गए हैं। इन दोनों खतरनाक रास्तों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में जनता और स्टेशन पर कार्गो/पार्सल करने वाले कर्मचारी होकर गुजर रहे हैं। दोनों रास्तों पर ना तो कोई फुटओवर ब्रिज है और ना ही कोई सुरक्षा के इंतजाम हैं। ऐसे में ट्रेन की पटरियों को पार करना किसी भी बड़े हादसे को दावत दे सकता है।
निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन देश की राजधानी दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक है। यहां से लगभग 250 ट्रेनें रोजाना दक्षिण और मध्य-पश्चिम भारतीय राज्यों के लिए संचालित होती हैं, जिनसे लाखों यात्री यहां से आते जाते हैं। इतना व्यस्त स्टेशन होने की वजह से यहां से हर पांच मिनट में एक्सप्रेस, मेल, प्रीमियम और मालवाहक ट्रेनें आती-जाती हैं। इन्हीं ट्रेनों के आने-जाने के बीच का जो समय बचता है, उसी समय में लोग जान जोखिम में डालकर पटरियों को पार कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: ग्राउंड रिपोर्ट: 500 दो 5 मिनट में एंट्री पाओ; दिल्ली स्टेशन पर कुलियों की चांदी
जान जोखिम में डालते दिखे लोग
'खबरगांव' जब इसकी हकीकत जानने के लिए हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन गया तो यहां का नजारा देखकर लोगों को जान जोखिम में डालते पाया। पहला रास्ता प्लेटफॉर्म संख्या 2 से नीचे उतरने के बाद वरिष्ठ अनुभाग इंजीनियर (निर्माण) कार्यालय के पास और दूसरा रास्ता इसके लगभग 50 मीटर आगे है। पहले रास्ते से मालवाहक ट्रेनों में सामान लोड करने के लिए जुगाड़ गाड़ी पर कर्मचारी सामान ले जाते हुए दिखाई दिए। बीच में इन्हीं पटरियों से कोई ट्रेन आने की स्थिति में यह लोग रुक जाते। ट्रेन गुजर जाने के बाद कर्मचारी फिर से अपने काम में जुट जाते हैं।

एक्सप्रेस ट्रेन तेज रफ्तार में हॉर्न बजाते हुए गुजरीं
हालांकि, रेलवे स्टेशन होने की वजह से अधिकतर ट्रेनों की स्पीड कम होती रही लेकिन कई मेल और एक्सप्रेस तेज रफ्तार में हॉर्न बजाते हुए गुजर गईं। इस दरमियान भी कर्मचारियों के साथ में कई यात्री और आसपास के रहने वाले लोग पटरियां पार करते हुए दिखाई दिए। यही लोग थोड़ी ने मेहनत करके पक्के बने प्लेटफॉर्म के फुटओवर ब्रिज से इस पार से उस पार जा सकते हैं।
शार्ट रास्ता अपना रहे आसपास के लोग
दरअसल, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन सराय काले खां गांव और निजामुद्दीन पूर्व कॉलोनी के बीच बना हुआ है। स्टेशन के पास में ही पुरानी भोगल मार्केट और जंगपुरा हैं। सराय काले खां गांव में रहने वाले लोगों को अलग भोगल मार्केट में बाजार करने या फिर ड्यूटी करने आने है तो उन्हें महारानीबाग और आश्रम से घुमते हुए आना पड़ता है। ऐसे में उन्हें 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ती है। गांव में रहने वाले जिन लोगों को स्टेशन पार कुछ काम होता है तो वह लंबा रास्ता ना लेकर इन्हीं खरतनाक पटरियों को ट्रेन की आवाजाही के बीच पार करते हैं।

रेलवे कर रहा अनहोनी होने का इंतजार?
अगर किसी को स्टेशन की मेन एंट्री गेट से उस पार जाना है तो उसे प्लेटफॉर्म 1 से लेकर प्लेटफॉर्म 9 के बीच बने सात से आठ पटरियों को पार करना होता है। मगर, यह सब रेलवे की आंखों के सामने हो रहा है। लोग जोखिम लेकर इस पार से उस पार जा रहे हैं। रेलवे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज, सब-वे या फिर किसी अन्य प्रकार के सुरक्षात्मक उपाय करने की बजाय किसी अनहोनी होने का इंतजार कर रहा है।
यह भी पढ़ें: पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की पुरानी तारें, दो घंटे बिजली गुल
पटरियों को पार करते हुए हुईं मौतें
बता दें कि भारत में अवैध रूप से ट्रेन की पटरियों को पार करना आम बात है लेकिन राजधानी दिल्ली के प्रमुख स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों की आंखों के सामने ही लोग इस तरह से पटरियों को पार कर रहे हैं, यह हैरान करता है। रेलवे के 2024-25 में आए डेटा पर गौर करें तो देश में रेलवे की पटरियों को पार करते समय या ट्रेन की चपेट में आने से 31 लोगों की मौत हुई है। लेकिन फिर भी निजामुदीन स्टेशन पर इन लोगों के लिए कोई फुटोवर ब्रिज नहीं बना है। रेलवे इतने बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है लेकिन इस स्टेशन की ओर ध्यान नहीं है।

रेलवे ने जवाब में क्या कहा?
इस मामले में उत्तरी रेलवे के चीफ जनसंपर्क अधिकारी (CPRo) का कहना है कि ट्रेन की पटरियों को खतरनाक तरीके से पार करने के मामले को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को बताया गया है। उन्होंने कहा, 'आरपीएफ लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कदम उठाएगी। काले खां गांव के लोगों के लिए रेलवे ने सब-वे बनाया हुआ है लेकिन कुछ लोग उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं।'
जनसंपर्क अधिकारी ने आगे कहा, 'लोग ट्रेन की पटरियों के बीच बने रास्ते को पार ना करें इसके लिए उन्हें जागरूक करेंगे और स्टेशन स्टाफ को लोगों को रोकने के लिए बोलेंगे।'