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'जज को धमकाया क्यों...?', दुर्गा शक्ति नागपाल से हाई कोर्ट नाराज क्यों है?

सीनियर IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल पर आरोप है कि उन्होंने जज शबीना खान को फोन पर धमकी दी है। हाई कोर्ट ने इसे आपराधिक मामला माना है।

Durga Shakti Nagpal IAS

दुर्गा शक्ति नागपाल।Photo Credit: Social Media

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भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की चर्चित अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल मुश्किलों में फंसती नजर आ रही हैं। हाई कोर्ट में एक जज शबीना खान ने गुहार लगाई है कि देवी पल्टन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने उन्हें फोन पर धमकाया है। हाई कोर्ट ने इस मामले को आपराधिक अवमानना माना है और इसे अवमानना अदालत में भेज दिया है। 

जस्टिस सैयद कमर हसन नकवी ने कहा है कि दुर्गा शक्ति नागपाल के फोन कॉल का अंदाज धमाकने जैसा है, केस को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। जस्टिस नकवी न कहा कि दुर्गा शक्ति नागवाल की भाषा धमकाने वाली है। कोर्ट ने कहा है कि अधिकारी का यह व्यवहार हैरान करने वाला है। याचिकाकर्ता को अदालत का रुख करना पड़ा है।

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दुर्गा शक्ति नागपाल बुरी फंसी 

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के व्यवहार को आपराधिक अवमानना की अदालत में भेजने का आदेश दिया है। यह केस एक पुराने सिविल मुकदमे से जुड़ा है। यह मुकदमा 1997 से गोंडा की सिविल जज, सीनियर डिवीजन की अदालत में चल रहा है। इसमें सरकारी जमीन को लेकर विवाद है। मुद्दे 2018 में तय हो चुके थे और सबूतों पर सुनवाई चल रही थी।

जज शबीना ने क्या लिखा था?

अदालत में सुनवाई के दौरान पता चला कि इस मुकदमे की सुनवाई कर रही सिविल जज शबीना खान ने जिला जज को एक पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि 15 जुलाई 2026 को कमिश्नर नागपाल ने उन्हें फोन किया। उस समय जज छुट्टी पर थीं।

दुर्गा शक्ति नागपाल पर आरोप क्या हैं?

जज शबीना खान ने आरोप लगाया है कि कमिश्नर ने उनसे पूछा कि वह छुट्टी से कब लौटेंगी और क्या छुट्टी बढ़ाएंगी। फिर कथित तौर पर कहा, 'मैं सीनियर IAS ऑफिसर हूं और आपने मेरा फोन न उठाकर बदतमीजी की है।'ऑ

दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि अगर बात नहीं की होती तो हाईकोर्ट में शिकायत करते। उन्होंने जज के व्यवहार पर सवाल उठाया और कहा कि केस ट्रांसफर करवा देंगी। जज का आरोप है कि कमिश्नर ने अपनी पोजीशन का इस्तेमाल करके उन्हें डराने और दबाव बनाने की कोशिश की।ऑ

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कमिश्नर ने खुद मानी है फोन की बात

दूसरी तरफ, कमिश्नर नागपाल ने इस बात माना है कि उन्होंने फोन किया था। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ यह पूछा था कि जज छुट्टी पर कब तक रहेंगी। मुकदमे की कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि वह अप्रैल 2026 में पद संभालने के बाद जान पाईं कि यह सरकारी जमीन का विवाद करीब 30 साल से अदालत में फंसा है। यह जमीन नजूल की है और कमिश्नर ऑफिस बनाने के लिए आरक्षित है। दुर्गा शक्ति नागपाल ने यह भी कहा कि उन्होंने जिला जज से भी मुकदमे को जल्द निपटाने का अनुरोध किया। 

हाई कोर्ट ने क्या कहा है?

जस्टिस सैयद कमर हसन रिजवी की बेंच ने दोनों पक्षों की बात सुनी। कोर्ट ने कहा कि फोन कॉल की भाषा और लहजे से साफ लगता है कि जज को प्रभावित करने की कोशिश की गई। कोर्ट ने इसे चौंकाने वाला बताया कि कोई मुकदमेबाज पक्ष लंबित मामले में इस तरह फोन करके अदालत से संपर्क करे।

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अधीनस्थ अदालतों को अपमानित या दबाव में लाने से बचाना उसका कर्तव्य है। जजों को बिना डर के स्वतंत्र रूप से फैसला करने की आजादी होनी चाहिए। 

 

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जज के खिलाफ शिकायत की धमकी देना भी न्याय प्रक्रिया में दखल देने जैसा हो सकता है। इस आधार पर कोर्ट ने माना कि मामला आपराधिक अवमानना की अदालत में विचार के लिए उपयुक्त है। 

 

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अब दुर्गा शक्ति नागपाल पर रहेगी कोर्ट की नजर

निर्देश दिया गया कि मुख्य न्यायाधीश या सीनियर जज के निर्देश के बाद इसे संबंधित अदालत के सामने रखा जाए। इससे पहले जिला जज गोंडा ने खुद ही मुकदमे को दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। इसलिए हाईकोर्ट में लगा ट्रांसफर आवेदन अब बेकार हो गया और उसे रिकॉर्ड पर रख दिया गया। कोर्ट ने कहा कि वह जज के आरोपों पर आंखें नहीं मूंद सकता।

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