बीते कुछ साल में देशभर में डिजिटल पेमेंट सिस्टम काफी तेजी से मजबूत हुआ है। बैंकिंग सिस्टम भी काफी हद तक डिजिटल हुआ है जिसके चलते कई बैंक बंद भी हो गए हैं। अच्छी खबर यह है कि पिछले पांच साल में सरकारी बैंकों की जितनी ब्रांच बंद हुई हैं, उससे ज्यादा ब्रांच खोली गई हैं। यह दर्शाता है कि बैंक अभी भी ग्राहकों की जरूरत बने हुए हैं और डिजिटल होती दुनिया में भी ब्रांच की जरूरत पड़ रही है। इन पांच साल में बैंकों के कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और बैंक के खाता धारकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
राज्यसभा के सांसद वी शिवदासन ने 11 अगस्त को इसी से जुड़ा सवाल पूछा था। इसका जवाब वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने दिया है। उन्होंने रिजर्व बैंक के आंकड़ों के आधार पर बताया है कि पिछले पांच साल में सरकारी बैंकों के कितने ब्रांच खुले और कितने बंद हो गए। साथ ही, पिछले 5 साल में सरकारी बैंकों के कर्मचारियों की संख्या और इन बैंकों के खाताधारकों की संख्या भी बताई गई है।
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कितने बैंक खुले, कितने बंद हुए?
अलग-अलग कारणों से पिछले पांच साल में पब्लिक सेक्टर के 12 बैंकों की कुल 4093 ब्रांच बंद हुई हैं। गनीमत यह है कि इन्हीं पांच साल में कुल 6255 ब्रांच बंद भी हो गई हैं। एक और ट्रेंड देखने को मिला है कि 2021-22 में सबसे ज्यादा बैंक बंद हुए थे और सबसे कम ब्रांच खोले गए थे। उसके बाद के सालों में बैंक खोलने की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है और बैंक बंद होने की संख्या लगातार बढ़ती गई है।
सबसे ज्यादा 1187 ब्रांच SBI ने खोली हैं और सबसे ज्यादा 1342 ब्रांच केनरा बैंक की बंद हुई हैं। पिछले पांच साल में सबसे कम 107 ब्रांच सेंट्रल बैंक ने खोली हैं। वहीं सबसे कम 4-4 ब्रांच यूको बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक ने बंद की हैं।
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कर्मचारियों की संख्या और खातों की संख्या में क्या बदला?
पिछले 5 साल में अगर कर्मचारियों की संख्या को देखें तो इसमें थोड़ी कमी आई है। 2022 में कुल 12 सरकारी बैंकों को मिलाकर 776276 थे। 2023 में यह संख्या 767080 हुई, 2024 में 756015 हुई और 2025 में 757641 हो गई। 2026 के आंकड़े नहीं दिए गए हैं। बैंकों में खाताधारकों की संख्या 2022 में 144.90 करोड़ थी। 2023 में 148.92 करोड़ और 2024 में 153.97 करोड़, 2025 में 156.60 करोड़ और 2026 में 160.16 करोड़ हो गई है।
ये सारे आंकड़े दिखाते हैं कि डिजिटल होती दुनिया में भी लोगों का बैंकों के ब्रांच से सरोकार बना हुआ है और लोगों के खाते सरकारी बैंकों में अभी भी हैं।