पिछले 5 साल में सरकारी दफ्तरों से निकले कबाड़ को बेचकर सरकार ने 5,102.91 करोड़ रुपये की कमाई की है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने बताया कि साल 2021 से अब तक चलाए गए स्पेशल कैंपेन के तहत 24.20 लाख से ज्यादा जगहों को कवर किया गया और 180.48 लाख से ज्यादा फाइलें हटाई या बंद की गईं। सरकार अब स्पेशल कैंपेन 6 शुरू करने जा रही है, जिसमें सरकारी दफ्तरों की सफाई के साथ पुराने रिकॉर्ड, बेकार सामान और रुके हुए काम को कम करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बुधवार को अब 6 अभियान की प्रगति देखने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल (https:cdpm.nic.in/SCDPM26) शुरू करेंगे। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगा। बता दें कि छठे अभियान से पहले 16 से 30 सितंबर तक तैयारी का समय रखा गया है।
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साल-दर-साल तेज होती हुई कमाई की रफ्तार
सरकार ने यह पैसा एक ही बार में नहीं, बल्कि हर साल चलाए गए स्पेशल कैंपेन के अलग-अलग चरणों में जुटाया है। आंकड़ों पर नजर डालें कमाई की रफ्तार साल-दर-साल तेज होती गई। PIB के अनुसार 2 से 31 अक्टूबर 2021 के पहले अभियान में स्क्रैप निपटाने से ₹62.54 करोड़ की कमाई हुई थी। साल 2022 में 365.59 करोड़, 2023 में 499.68 करोड़, 2024 में 650 करोड़ से ज्यादा और 2025 में सबसे ज्यादा 833.92 करोड़ रुपये की कमाई हुई।

2021 से 2025 तक के 5 स्पेशल कैंपेन से 4,120.79 करोड़ की कमाई हुई। बाद में सचिवालय सुधारों की मासिक निगरानी के दौरान कबाड़ के निपटारे से हुई कमाई भी इसमें जुड़ती रही। जुलाई 2026 तक यह अतिरिक्त कमाई करीब 982.12 करोड़ रही। ऐसे में 2021 से जुलाई 2026 तक कबाड़ के निपटारे से कुल कमाई 5,102.91 करोड़ हो गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि हर नया अभियान पिछले अभियान से बड़ा और ज्यादा कमाई वाला रहा। शुरुआत में जहां कुछ लाख जगहों पर ही अभियान चला, बाद में पांचवें चरण में अकेले 11.6 लाख जगहों को कवर किया गया, 29.52 लाख फाइलें हटाई गईं और 233.75 लाख वर्ग फुट दफ्तर की जगह खाली कराई गई है।
स्क्रैप की नीलामी
अब बेकार पड़े सामानों की ऑनलाइन नीलामी और डिजिटल मार्केटप्लेस का इस्तेमाल भी कर रही है। सरकारी संपत्तियों की नीलामी के लिए Government e-Marketplace (GeM) के Forward Auction मॉड्यूल पर पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर, ई-वेस्ट, मशीनरी, धातु और दूसरे स्क्रैप की नीलामी की जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2021 से नवंबर 2025 तक GeM के इस मॉड्यूल के जरिए 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी संपत्तियों की नीलामी हुई। इसके अलावा, 13000 से ज्यादा ऑक्शन किए गए।
सरकारी दफ्तरों में पड़े पुराने सामान को सिर्फ हटाया नहीं जा रहा, बल्कि उसकी कीमत लगाकर नीलाम किया जा रहा है। ई-वेस्ट, पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनरी, वाहन और धातु के कबाड़ जैसी चीजों से भी पैसा मिल रहा है।