केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इस साल विवादों में घिरा हुआ है। इसके पीछे मुख्य वजह 12वीं क्लास के रिजल्ट में दिक्कत और कई बच्चों को कम नंबर देने की समस्या है। सीबीएसई ने जब 12वीं का रिजल्ट जारी किया था तो किसी ने सोचा नहीं था कि 12वीं का ही एक छात्र उनकी पोल खोल देगा। निसर्ग अधिकारी नाम के एक 19 साल के एथिकल हैकर ने सीबीएसई के पोर्टल में कई गंभीर खामियों को उजागर किया था, जिसमें छात्रों का प्राइवेट डेटा स्टोर होता था। अब निसर्ग की जिंदगी में नया मोड़ आया है और उन्हें IIT से नौकरी का ऑफर आया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में कथित साइबर सुरक्षा कमजोरियों को उजागर करने के बाद निसर्ग अधिकारी पर IIT कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल की नजर पड़ी। इसके बाद उन्हें इस सप्ताह IIT कानपुर के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब C3iHub में ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और थ्रेट इंटेलीजेंस इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है।
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IIT कानपुर के निदेशक ने किया संपर्क
IIT कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने निसर्ग का ब्लॉग पढ़ने के बाद खुद उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा,'निसर्ग अधिकारी को हमारी साइबर सुरक्षा टीम में इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है। इससे पहले भी हमने कम उम्र के प्रतिभाशाली युवाओं को इस क्षेत्र में अवसर दिया है। मुझे नहीं पता कि वह सबसे कम उम्र के कर्मचारी हैं या नहीं, लेकिन निश्चित रूप से IIT कानपुर में नियुक्त सबसे युवा इंजीनियरों में शामिल हैं।'
पूरी कहानी जानिए
निसर्ग का नाम उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में कथित तकनीकी और सुरक्षा कमजोरियों पर एक डिटेल्ड ब्लॉग लिखा। यह वही डिजिटल सिस्टम है जिसके जरिए बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया था। इसी सिस्टम से हजारों बच्चों की मार्किंग गलत हुई और जमकर बवाल हुआ। सीबीएसई किसी भी कमी को मान नहीं रहा था और कह रहा था कि उन्होंने रिजल्ट बिल्कुल सही होने की बात कही थी और ओएसएम को सही ठहराया था।
हालांकि, इस बीच सीबीएसई एक नए विवाद में फंस गया। निसर्ग ने दावा किया कि उन्होंने इस सिस्टम में कई गंभीर कमजोरियां देखीं और इनकी जानकारी भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को 25 फरवरी को भेजी थी। अपने ब्लॉग में उन्होंने कहा कि OSM पोर्टल में उन्हें कुल पांच गंभीर सुरक्षा खामियां मिली थीं। इनमें सबसे चर्चित दावा यह था कि सिस्टम में एक मास्टर पासवर्ड प्लेन टेक्स्ट में स्टोर किया गया था, जिसकी मदद से दो-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली (Two-Factor Authentication) को भी दरकिनार किया जा सकता था।
निसर्ग के दावों से खुली पोल
निसर्ग के अनुसार, उन्होंने इन कमियों की सूचना संबंधित एजेंसियों को दी थी, लेकिन केवल एक खामी को ठीक किया गया जबकि बाकी समस्याएं तब तक बनी रहीं जब तक पोर्टल को बंद नहीं कर दिया गया। इस पूरे विवाद ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। पहले मार्किंग को लेकर ही सवाल उठ रहे थे लेकिन निसर्ग के ब्लॉग के बाद सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे।
इसके बाद खुलासा हुआ कि OSM सिस्टम को लागू करने की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी की गई। शुरुआती टेंडर प्रोसेस में सफलता नहीं मिलने के बाद तकनीकी मानदंडों में बदलाव किए गए और बाद में यह काम एक निजी कंपनी को दिया गया। इसके बाद खुलासा हुआ कि जिस कंपनी को टेंडर दिया गया उसने पहले भी रिजल्ट खराब दिया था। इस मामले पर अभी प्रशासनिक बैठकें जारी हैं लेकिन इस बीच निसर्ग को एक बड़ा मौका मिला है।
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IIT कानपुर में क्या करेंगे निसर्ग?
IIT कानपुर में निसर्ग को नौकरी मिल गई है। अधिकारियों के अनुसार, निसर्ग अब संस्थान की साइबर सुरक्षा टीम में काम करेंगे। यहां वह पब्लिक डोमेन में मौजूद से उपयोगी तकनीकी जानकारी जुटाना, वेबसाइट और एप्लिकेशन की सिक्योरिटी में कमजोरियों की पहचान करना, संस्थानों को साइबर जोखिमों को कम करने में मदद करना, संभावित सुरक्षा खामियों को समय रहते चिन्हित करना शामिल होगा। निसर्ग को कॉन्ट्रैक्ट बेस पर इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है।