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कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, महाभियोग की थी तैयारी

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने महाभियोग से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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जस्टिस यशवंत वर्मा, File Photo Credit: PTI

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कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। फिलहाल उनके खिलाफ जांच जारी है। महाभियोग के जरिए उन्हें हटाने के प्रक्रिया भी जारी है और लोकसभा स्पीकर ने उनके खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी भी बनाई है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे यशवंत वर्मा पर आरोप लगने के बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकीलों ने उनके ट्रांसफर का विरोध भी किया था।

 

दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा ने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज के तौर पर शपथ ले ली है। अब अपने इस्तीफे में उन्होंने वजह नहीं बताई है कि वह क्यों इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि, उनके इस इस्तीफे को कैश कांड, उनके खिलाफ चल रही जांच और संभावित महाभियोग कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। 

 

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अगस्त 2025 में लोकसभा में यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव पर 146 सांसदों ने दस्तखत किए थे और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव को स्वीकर करने के बाद लोकसभा स्पीकर ने एक जांच कमेटी बनाई थी। इस प्रस्ताव के खिलाफ जस्टिस यशवंत वर्मा सुप्रीम कोर्ट भी गए थे लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

क्यों विवादों में आए थे यशवंत वर्मा?

जब यशवंत वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के जज हुए थे तो उनके सरकारी आवास पर आग लगने की घटना सामने आई थी। 14 मार्च 2025 को आग लगने की घटना के बाद जब फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझा रही थी तो उसे 500 रुपये के नोटों के ऐसे बंडल मिले थे जो जल गए थे। यह मामला कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने संसद में भी उठाया था।

 

मामला बढ़ा तो सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम कमेटी बनाई थी और दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिए थे कि जस्टिस यशवंत वर्मा को कोई केस न दिया जाए। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें जले हुए नोटों के बंडल दिखाए दिए थे।

 

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यशवंत वर्मा ने क्या कहा था?

इन आरोपों पर जस्टिस यशवंत वर्मा का कहना था कि यह आग उनके स्टाफ क्वार्टर के कमरे में लगी थी जिनमें पुराने सामान और अन्य चीजें रखी हुई थीं। उनका कहना था कि यह कमरा उनके घर से अलग था और आग लगने के बाद खुद उनके ही पर्सनल सेक्रेटरी ने पुलिस को फोन किया था। यशवंत वर्मा ने यह भी कहा था कि आग बुझने के बाद कोई नकदी नहीं मिली थी और ना ही उनके परिवार के किसी शख्स ने वहां कोई कैश रखा ही था।

 

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट से अपनी वकालत की शुरुआत करने वाले यशवंत वर्मा साल 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में अडिशनल जज बने थे। 2016 में वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के पर्मानेंट जज बने और अक्तूबर 2021 में वह दिल्ली हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे।

 

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