उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता महेंद्र नाथ की जमीन फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने नाम कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने नजीबाबाद थाने में FIR दर्ज की है। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई के मुताबिक अब तक 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक आरोपी फरार है।
नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव की करीब 2 हेक्टेयर खेती की जमीन का है। कमलनाथ का आरोप है कि आरोपियों ने एक फर्जी वसीयत और जाली मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए जमीन पर झूठा मालिकाना हक जताया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने दूसरी संपत्तियों के साथ भी ऐसा किया या नहीं।
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वारिस दर्ज कराने गए तो खुला मामला
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कमलनाथ 18 मई 2026 को नजीबाबाद के तहसीलदार की अदालत पहुंचे थे। वह अपने पिता महेंद्र नाथ की जमीन पर अपना वारिसाना हक दर्ज कराना चाहते थे। तब स्थानीय लेखपाल ने राजस्व अधिकारियों को बताया कि इस जमीन को लेकर एक और मामला पहले से चल रहा है। इसलिए जमीन को विवादित माना गया। FIR के मुताबिक इसी प्रक्रिया में कमलनाथ को पता चला कि कोई और उस जमीन पर दावा कर रहा है।
FIR रिपोर्ट में क्या है?
FIR में कहा गया है कि धर्मपाल सिंह, पुत्र रतन सिंह, ने तहसीलदार के सामने चल रहे मामले में एक फर्जी और बिना रजिस्ट्री वाली वसीयत पेश की। मामले के रिकॉर्ड में महेंद्र नाथ का एक मृत्यु प्रमाण पत्र भी लगाया गया। यह प्रमाण पत्र 10 अप्रैल 2003 की तारीख का है और नजीबाबाद से जारी बताया गया है।
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कमलनाथ ने पुलिस से क्या कहा है?
कमलनाथ ने पुलिस को बताया कि यह दस्तावेज झूठा है। शिकायत के अनुसार उनके पिता का निधन 7 सितंबर 2004 को दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि दस्तावेज में उनकी मां का नाम प्रेमलता लिखा गया है, जो गलत है।
कमलनाथ की जमीन हड़पने वाले लोग कौन हैं?
FIR में धर्मपाल सिंह, जसबिंदर सिंह ढिल्लों, विजय शंकर पांडेय और क्षेत्र के लेखपाल डेविड कुमार के नाम हैं। इनके साथ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत में आरोप है कि इन लोगों ने मिलीभगत कर जमीन हड़पने की साजिश रची। मकसद जमीन को अपने नाम दर्ज कराना और फिर बेच देना था। कमलनाथ ने यह भी आरोप लगाया है कि इस गिरोह ने कई और संपत्तियों के जाली दस्तावेज तैयार किए हैं।
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पुलिस ने घटना पर क्या कहा है?
एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि मामला कमलनाथ की पारिवारिक संपत्ति के बड़े हिस्से से जुड़ा हो सकता है। उनके मुताबिक महेंद्र नाथ के पास करीब 90 बीघा जमीन थी। इसमें से लगभग 36 बीघा जमीन जाली दस्तावेजों के जरिए हड़पने के निशाने पर थी।
फर्जी वसीयत का किस्सा क्या है?
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 2003 में बनी बताई गई एक फर्जी वसीयत के आधार पर 2004 में बिजनौर में एक नकली डिक्री तैयार कराई। इसके बाद उन्होंने 2020 में दीवानी मुकदमा दायर किया और जमीन अपने नाम कराने की कोशिश की। मामले की जांच जारी है।