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लेफ्ट से उभरे, कांग्रेस में पहुंचे; कितने नेताओं को सियासत में मिली कामयाबी?

लेफ्ट छात्र संगठन से निकले कई छात्र नेताओं ने बाद में कांग्रेस का हाथ थामा और अपने राजनीति करियर की शुरूआत की। कांग्रेस में शामिल होने के बाद अपनी विचारधारा से अलग होकर काम कर रहे हैं। आइए जानते हैं उन नेताओं के बारे में।  

Sandeep Singh with Rahul Gandhi

राहुल गांधी के साथ संदीप सिंह, Photo Credit- Social Media

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वामपंथी छात्रसंघ की नेता नेहा बोरा अब एक बड़ा चेहरा बन कर उभर रही हैं। NEET परीक्षा से लेकर CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रदर्शन में उनका नाम सबसे आगे हैं। चर्चा इस बात की चल रही है कि शायद वह कांग्रेस में शामिल हो सकती है।  जिस वामपंथी छात्र संगठन ने हमेशा कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला, उसी संगठन से निकले कई चर्चित छात्र नेताओं ने बाद में कांग्रेस में शामिल होकर उसकी राजनीतिक और चुनावी कमान संभाली। 

 

खैर इन कयासों के बीच हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते हैं कि ऐसे कई नेता हुए हैं जो वामपंथ विचारधारा से चमके फिर आगे वह कांग्रेस में शामिल हो गए। कन्हैया कुमार इनमें सबसे बड़ा नाम हैं।  वह सितंबर 2021 को कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें राष्ट्रीय छात्र संघ (AISC) के प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है। आइए समझते हैं कि वामपंथ से निकले छात्र नेताओं का राजनीतिक सफर कैसा रहा और वे आज कहां हैं।

 

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कांग्रेस की रणनीतिक टीम में बनाई जगह

संदीप सिंह- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से आने वाले संदीप सिंह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से होते हुए जेएनयू पहुंचे। वह 2007–08 में जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) के अध्यक्ष चुने गए। आगे चलकर वह कांग्रेस में शामिल हुए। वह 2019 के आम चुनाव के दौरान राहुल गांधी के भाषण तैयार करने व चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने यूपी में प्रियंका गांधी वाड्रा की टीम के साथ काम किया। मौजूदा समय में वह एक राजनीतिक सलाहकार और शोधकर्ता के रूप में अपनी भूमिका देखते हैं।

 

मोहित कुमार पांडे- साल 2016–17 में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष रहे मोहित ने भी AISA की राजनीति के बाद कांग्रेस का दामन थामा। उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार की कमान संभाली। पार्टी के लिए काम करना और सोशल मीडिया पर अभियान चलाने में उनकी भूमिका मुख्य रही।

 

अकबर चौधरी- 2013–14 में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष रहे अकबर चौधरी ने छात्र राजनीति के बाद चुनावी प्रबंधन को अपना करियर बनाया। वह प्रशांत किशोर की चुनावी टीम से भी जुड़े। बाद में 'मैट्रिक्स इंटेलिजेंस' नाम से खुद की राजनीतिक सलाहकार कंपनी शुरू की। उनकी कंपनी ने हिमाचल प्रदेश (2022) और छत्तीसगढ़ (2023) के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए रणनीति तैयार करने का काम किया।

 

सुधांशु बाजपेयी और अनिल यादव- AISA के यूपी के पूर्व अध्यक्ष सुधांशु बाजपेयी ने सितंबर 2018 में लखनऊ में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। वहीं, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता अनिल यादव भी 2018 में कांग्रेस से जुड़े। अनिल यादव बाद में प्रियंका गांधी की टीम में शामिल होकर रिसर्च की जिम्मेदारी संभालने लगे।

वामपंथ से जुड़े अन्य नेता

2018 के आसपास जब कांग्रेस ने कई युवा चेहरों को पार्टी में शामिल कराया तब AISA के अलावा अन्य वामपंथी समूहों के कार्यकर्ता भी साथ आए।

  • शहनवाज आलम- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में AISA से जुड़े रहे शहनवाज बाद में कांग्रेस में आए और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे।
  • सदफ जफर- सामाजिक और वामपंथी आंदोलनों से जुड़ीं सदफ जफर 2018 में कांग्रेस में आईं। CAA-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान वह सुर्खियों में रहीं। पार्टी ने उन्हें 2022 के यूपी चुनाव में लखनऊ सेंट्रल से अपना उम्मीदवार भी बनाया।
  • रघुनंदन यादव और सरिता पटेल- AISA की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य रघुनंदन यादव और CPI (ML) से जुड़ी रहीं सरिता पटेल भी 2018 में कांग्रेस का हिस्सा बने।

 

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कन्हैया कुमार भले ही कांग्रेस से जुड़े हो लेकिन वह अपने शुरुआती समय में वामपंथ से ही प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े थे। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में बिहार के बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कैंडिडेट के रूप में चुनाव लड़ा था। वह गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव हार गए थे। इसके बाद वह कांग्रेस के छात्र संघ के अध्यक्ष के तौर पर कार्यरत हैं और पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। 


वामपंथी दल से उभरे इन युवा नेताओं के सफर को मुख्य रूप से तीन बड़े रास्तों में देखा जा सकता है। ये लोग प्रत्यक्ष तौर पर पार्टी का चेहरा तो नहीं बनें लेकिन पार्टी के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। जैसे संदीप सिंह और मोहित पांडे जैसे नेताओं ने भाषण और डिजिटल मीडिया में अपनी पहचान बनाई। अकबर चौधरी जैसे चेहरों ने मुख्यधारा की चुनावी सलाहकार कंपनियों के जरिए चुनाव प्रबंधन को करियर बनाया।


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