प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
ने शनिवार को ब्रिक्स सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक भारत और चीन के रिश्तों को फिर से ठीक करने और पटरी पर लाने की कोशिश के तहत की गई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मतभेद कभी भी विवाद न बनें।
बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा, 'प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बॉर्डर इलाकों में शांति और सुकून द्विपक्षीय रिश्तों के लगातार विकास के लिए एक जरूरी आधार बना हुआ है।'
शी जिनपिंग शनिवार को भारत में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे। उनका यह सात साल बाद भारत दौरा था। शी इससे पहले 2019 में भारत आए थे।
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मोदी ने बताई तीन आपसी बातें
शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन शहर में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन रिश्तों में लगातार हो रही तरक्की का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'उन्होंने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने रिश्तों को लेकर रणनीतिक और लॉन्ग टर्म नजरिया अपनाना चाहिए। मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए।' मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन आपसी बातों से सीखना चाहिए- आपसी सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और आपसी हित।
समाधान के लिए प्रतिबद्धता दिखाई
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जब भारत-चीन बॉर्डर का मुद्दा द्विपक्षीय बातचीत में उठा, तो शी और मोदी ने एक सही, तर्कसंगत और आपसी तौर पर स्वीकार्य समाधान के लिए प्रतिबद्धता दिखाई। मोदी और शी पिछले साल अगस्त में SCO समिट 2025 के मौके पर चीन के तियानजिन में मिले थे।
शी ने द्विपक्षीय बातचीत के दौरान क्या कहा?
वहीं, पीएम मोदी के साथ बातचीत में राष्ट्रपति शी ने भारत और चीन को ग्लोबल साउथ के जरूरी सदस्य बताया और कहा कि दोनों देशों की जरूरी जिम्मेदारिया हैं।
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शी ने कहा, 'एक मुश्किल अंतरराष्ट्रीय माहौल में, जिसमें बदलाव और चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई हैं। चीन और भारत दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश और ग्लोबल साउथ के जरूरी सदस्य होने के नाते बड़ी ज़िम्मेदारियां निभाते हैं। दोनों पक्षों को इंसानियत के भविष्य और अपने लोगों की भलाई को ध्यान में रखना चाहिए और बड़े ब्रिक्स फ्रेमवर्क के अंदर हाई-क्वालिटी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। हमें एक बराबर और व्यवस्थित मल्टीपोलर दुनिया और सबको साथ लेकर चलने वाले, आपसी फायदे वाले इकोनॉमिक ग्लोबलाइजेशन की वकालत करनी चाहिए, जिससे दुनिया में शांति, स्थिरता, विकास और खुशहाली को बढ़ावा देने में और ज्यादा साकारात्मक सोच आए।'