ईरान संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के संसद अध्यक्षों की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। इसके पीछे ईरान ने अप्रत्याकशित परिस्थितियों का हवाला दिया है। हालांकि ईरान संसदीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा जरूर लेगा। ईरानी दूतावास ने बैठक की मेजबानी के लिए भारत सरकार की शानदार मेहमाननवाजी और व्यवस्थाओं के प्रति आभार जताया। उम्मीद जताई कि इस बैठक से सदस्य देशों के बीच सहयोग और जुड़ाव को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने बताया कि कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों की वजह से ईरान की इस्लामिक सलाहकार सभा (इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली) के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद गालिबाफ नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों के अध्यक्षों की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। बता दें कि योजना के मुताबिक 25 अक्टूबर को गालिबाफ को नई दिल्ली पहुंचना था। वे दो दिवसीय ब्रिक्स संसदीय मीटिंग में हिस्सा लेने वाले थे।
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दूतावास ने आगे बताया कि ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल इस बैठक में भाग लेगा। यह भी कहा कि ब्रिक्स के एक सदस्य होने के नाते ईरान इस समूह के शिखर सम्मेलनों और बैठकों में उच्चतम स्तर पर सक्रिय और प्रभावी भागीदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
यह भी कहा कि इस संदर्भ में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत और परामर्श जारी रखेगा। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग का विस्तार करना और उसे गहरा करना है।
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क्या शुरू होने वाली जंग?
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने लगा है।
डोनाल्ड ट्रंप
जल्द ही ईरान पर हमले के पक्ष में हैं। दो दिन पहले ही इजरायल के फाइटर जेट ईरान की सीमा तक पहुंचे। हालांकि आगे नहीं बढ़े। दुनियाभर में युद्ध के दोबारा शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। इस बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व के चार दूतावासों से स्टाफ को कर दिया है। खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी अधिकारियों को मारने का प्लान ईरान बना रहा है।