लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के एक अप्रत्याशित कदम ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर जानकारी दी है कि वे अब नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो चुके हैं और सदन में एक अलग समूह के रूप में बैठना चाहते हैं। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में उस गुमनाम पार्टी की चर्चा तेज हो गई है जिसका नाम अब तक आम जनता ने सुना भी नहीं था।
NCPI कोई बड़ा संगठन या जनाधार वाली पार्टी नहीं है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPPS) है। जिसका चुनाव चिन्ह 'सात किरणों वाली पेन की निब' है। शिउली कुंडू द्वारा स्थापित यह पार्टी पिछले कुछ समय से असम और त्रिपुरा में पैर पसारने की कोशिश कर रही है लेकिन चुनावी राजनीति में इसका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है।
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चुनाव आयोग में NCPI पार्टी का रिकॉर्ड
NCPI की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। चुनाव आयोग ने इस पार्टी को साल 2023 की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर रजिस्टर किया था। आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 जनवरी 2023 को NCPI को रजिस्टर्ड अनरिकग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टी (RUPP) का दर्जा मिला था।
चुनाव आयोग की 15 मई 2023 की अधिसूचना में NCPI का नाम सीरियल नंबर 1596 पर दर्ज है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्टी का रजिस्टर्ड पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में है। पार्टी का कार्यालय जागो बिस्वा, होल्डिंग नंबर-4719, गांव हाटगाछा, पोस्ट ऑफिस बानिपुर, थाना संकराइल, जिला हावड़ा (पिन कोड-711304) में स्थित है।
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक कुल करीब 1.13 लाख रुपये का ही चंदा मिला है। यानी संगठन और फंडिंग के लिहाज से यह अभी भी एक छोटी राजनीतिक पार्टी मानी जाती है।
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त्रिपुरा चुनाव में जब्त हो गई थी जमानत
इस पार्टी का पता भले ही पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में है लेकिन पार्टी ने पहली बार 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई थी। पार्टी ने कैलाशहर और चावमानू सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन दोनों ही जगहों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। कैलाशहर सीट पर पार्टी को महज 286 वोट और चावमानू सीट पर 536 वोट मिले। यानी पूरी पार्टी को मिलाकर कुल 822 वोट ही नसीब हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि इन सीटों पर खुद TMC का प्रदर्शन भी नोटा (NOTA) से थोड़ा ही बेहतर था।