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भारत में कहां और कितनी झीलें हैं, जो ला सकती हैं नेपाल जैसी बाढ़?

नेपाल में आई इस बाढ़ के बाद से उन 47 झीलों और भारत में मौजूद दूसरे झीलों से भविष्य में GLOF का खतरे की चर्चा तेज हो गई है। समझिए इससे कितना खतरा है?

Nepal Flood 2026, Nepal Flood August 26,

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 538 तक पहुंच गई है। इसमें 320 भारतीयों समेत 1400 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। इस विनाशकारी बाढ़ को लेकर वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर टूटने को एक बड़ी वजह बताया है। नेपाल के लैंगटांग लिरुंग इलाके में एक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूट गया, जिससे भूस्खलन हुआ और मलबे ने नदी पर अस्थायी बांध जैसी रुकावट बना दी। कुछ समय बाद यह रुकावट टूट गई, जिससे नदी का जलस्तर आधे घंटे में बढ़ गया और भीषण बाढ़ आई। 

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सीधे तौर पर GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (झील फटने से आई बाढ़) नहीं थी। हालांकि, इसकी प्रक्रिया यानी मलबे से बांध बनना और फिर फटना GLOF जैसी ही था। नेपाल में आई इस बाढ़ के बाद से उन 47 झीलों और भारत में मौजूद दूसरे झीलों से भविष्य में असली GLOF का खतरे की चर्चा भी तेज हो गई है, जिनसे ऐसी स्थिति बन सकती है।

 

यह भी पढ़ें: सिक्किम, केदारनाथ और अब नेपाल, क्या है GLOF जिसकी वजह से हर बार मची तबाही?

GLOF क्या है, क्यों आती है बाढ़?

GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड तब होती है जब कोई ग्लेशियल झील (ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील) अचानक फट जाती है और उसका पूरा पानी एक साथ तेजी से बहकर नीचे के इलाकों में भीषण बाढ़ ले आता है। पहाड़ों पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी ग्लेशियर के आगे या ऊपर जमा होकर एक झील बना देता है। यह झील आमतौर पर मोरेन ( यानी ग्लेशियर द्वारा धकेली गई मिट्टी, पत्थर और मलबे की प्राकृतिक दीवार) से घिरी होती है, जो एक कच्चे बांध की तरह काम करती है।

 

मोरेन (मिट्टी-पत्थर की दीवार) कमजोर और अस्थिर होती है तो यह झील फट सकती है। इसके अलावा, ग्लेशियर का कोई टुकड़ा या बर्फ का हिस्सा टूटकर झील में गिर जाए, तो अचानक तेज लहर बनती है और दबाव से दीवार टूट सकती है। नेपाल में कुछ ऐसा ही हुआ है। इसके अलावा, भूकंप, भारी बारिश या तापमान बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघलने पर भी झील का पानी बढ़कर दीवार तोड़ सकता है। 

47 झीलों की चर्चा क्यों? 

नेपाल में आई बाढ़ के बाद उन झीलों की चर्चा शुरु हो गई है, जिनसे इस तरह की बाढ़ आ सकती है। हालांकि, इनमें से सभी झीलें इतनी खतरनाक नहीं हैं। ICIMOD और नेपाल सरकार के आकलन के अनुसार, कोशी, गंडकी और कर्णाली बेसिन में 47 ग्लेशियल झीलें 'पोटेंशियली डेंजरस (संभावित खतरनाक) चिह्नित हैं। इनमें से 25 तिब्बत में, 21 नेपाल में और 1 भारत में स्थित है। ICIMOD-UNDP की रिपोर्ट ने इन झीलों को अलग-अलग स्तर पर रैंक किया है, जिसमें Rank I सबसे ज्यादा खतरनाक झीलों के लिए है।

 

 

बता दें कि 47 में से 42 झीलें कोशी बेसिन में हैं यानी इसमें सबसे ज्यादा जोखिम), 3 गंडकी में और 2 कर्णाली में है। भारत पर असर की बात करें तो यही कोशी नदी आगे जाकर बिहार में प्रवेश करती है, यानी इन झीलों में से किसी के फटने का सीधा असर बिहार पर पड़ सकता है। दूसरी ओर ग्यिरोंग-त्रिशुली और पोइक्कू-भोटेकोसी जैसे ट्रांसबाउंड्री बेसिन भी गंडक-नारायणी नदी प्रणाली से जुड़े हैं, जो बिहार-यूपी दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: रेस्क्यू में दूसरे देशों की मदद नहीं लेगा नेपाल, वजह 2015 का भूकंप कैसे है?

ग्लेशियल झीलों पर भारत की स्थिति

केंद्रीय जल आयोग (CWC) सैटेलाइट इमेजरी के जरिए पूरे हिमालयी क्षेत्र की ग्लेशियल झीलों और जलाशयों पर लगातार नजर रखता है। पूरे हिमालयी क्षेत्र (भारत से बाहर के हिस्से समेत) में CWC कुल 2,843 ग्लेशियल झीलों और जलाशयों पर नजर रखता है। इनमें से भारत के भीतर स्थित 428 झीलों में विस्तार पाया गया है, जिन्हें आपदा-तैयारी के लिहाज से सघन निगरानी जरूरी बताया गया है। इनमें अरुणाचल प्रदेश में 181, लद्दाख में 133, जम्मू-कश्मीर में 50, सिक्किम में 44, हिमाचल प्रदेश में 13 और उत्तराखंड 7 झीलें शामिल हैं।

 

भारत में GLOF की घटना 

भारत में GLOF से जुड़ी घटना 2023 में सिक्किम में देखने को मिला था।  4 अक्टूबर 2023 को दक्षिण ल्होनक झील से जुड़ी GLOF घटना में तीस्ता नदी में अचानक 15 से 20 फीट ऊंचा पानी बहा। इसमें 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसमें हाजारों की आबादी प्रभावित हुई थी, तीस्ता-III डैम तबाह हो गया था। 

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