निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में दोषमुक्त हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद एक बार फिर यह मामला लोगों के बीच चर्चा में आ गया। गांव वालों ने सुरेंद्र कोली के बारे में क्या बताया? पढ़ें रिपोर्ट
सुरेंद्र कोली और नारायण सिंह (गांव के निवासी) Photo Credit-Chat GPT
निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में दोषमुक्त हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद एक बार फिर यह मामला लोगों के बीच चर्चा में आ गया। करीब दो दशकों तक सुरेंद्र कोली को भारत के सबसे कुख्यात सीरियल किलर में से एक माना जाता रहा। सुरेंद्र कोली को 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी लेकिन 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 मामलों में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया, इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया था। अब सुरेंद्र कोली की मौत के बाद नारायण सिंह नाम के शख्स ने कई अहम खुलासे किए हैं। नारायण सिंह ने सुरेंद्र कोली के साथ हुई ज्यादतियों का भी जिक्र किया है।
करीब 19 साल जेल में रहने के बाद रिहा हुए सुरेंद्र कोली की 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में मौत हो गई। उसकी मौत के बाद निठारी कांड और उसकी जिंदगी से जुड़े कई सवाल फिर उठ रहे हैं। खबरगांव के रिपोर्टर नीलांजय तिवारी से बातचीत में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह ने कोली से जुड़ी कई बातें साझा कीं। वहीं, गांव के लोगों ने इस बातचीत में बताय कि वे सुरेंद्र कोली और उसके बचपन को किस तरह याद करते हैं।
निठारी कांड से सुरेंद्र कोली की कहानी कैसे शुरू हुई?
2005 से नोएडा के निठारी इलाके में महिलाओं और बच्चों के लापता होने की खबरें सामने आईं, इसके बाद दिसंबर 2006 में D-5 और D-6 के पीछे खुले हिस्से और नाले से इंसानी खोपड़ियां, हड्डियां और कपड़े मिले। इसके बाद 29 दिसंबर को सुरेंद्र कोली को एक गुमशुदगी की FIR के सिलसिले में हिरासत में लिया गया। उसी दिन मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को भी हिरासत में लिया गया।
जांच
CBI
को सौंप दी गई और निठारी से जुड़े कई अलग-अलग मामलों में आपराधिक मुकदमे चले। इस मामले में सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया गया, बाद में फिर एक-एक कर सभी मामलों से बरी कर दिया गया। निठारी मामलों में कोली के खिलाफ मुख्य आधारों में कथित कबूलनामा, बरामदगी और अन्य सबूत शामिल थे। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने रिंपा हलदर मामले में दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखी थी।
इसके बाद जांच और साक्ष्यों पर सवाल उठे और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में निठारी हत्याकांड से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया था। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी कोली की दोषसिद्धि खत्म कर दी। जिन मामलों में कोली पर मुकदमा चला, उनमें उनकी आपराधिक जिम्मेदारी कानूनन साबित नहीं हो सकी।
सुरेंद्र कोली के साथ जेल में क्या हुआ?
पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने जेल में कोली से मुलाकात की थी और उसकी मां को उससे मिलवाने में मदद की थी। इसके अलावा, नारायण सिंह ने बताया कि सुरेंद्र ने उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद कथित प्रताड़ना की बातें भी बताईं। नारायण सिंह ने कहा, 'पेट्रोल से उसके गुप्तांग तक जला दिए गए, उसके नाखून प्लास से खींचकर उतार दिए गए।'
नारायण ने कहा कि उस पर दुनिया भर के आरोप लगाए गए और उसे ‘नरपिशाच’ जैसे नाम दिए गए। ये बातें आज भी लोगों के जेहन से नहीं निकल पाई हैं। इसके अलावा, नारायण सिंह ने सुरेंद्र कोली पर बनी फिल्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह जेल में है, सजा काट रहा है और उसका ट्रायल चल रहा है। ऐसे में आपने उसकी फिल्म कैसे बना ली?
गांव वाले सुरेंद्र कोली को कैसे देखते हैं?
एक ही आदमी की दो तस्वीरें हैं। पहली तस्वीर उत्तराखंड के अल्मोड़ा के मंगरुखाल गांव की है, जहां सुरेंद्र कोली का बचपन बीता था। गांव में कुछ लोग उसे उसके बचपन की यादों से जोड़कर देखते हैं, एक लड़का जो उनके साथ पढ़ता था और गाय चराने जाता था। वहीं, दूसरी तस्वीर निठारी कांड के उस आरोपी की है, जिसका नाम सामने आते ही पूरे देश के सामने एक भयावह कहानी सामने आ जाती है।
हालांकि गांव की यह याद किसी आपराधिक मामले में निर्दोष या दोषी होने का सबूत नहीं है। ग्रामीणों की व्यक्तिगत याद और अदालत में पेश किए गए साक्ष्य दो अलग चीजें हैं। इसके अलावा, नारायण सिंह ने मीडिया कवरेज को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कोली के खिलाफ आरोप साबित होने से पहले ही उसे मीडिया में दोषी की तरह पेश किया गया।
नारायण सिंह का दावा है कि गांव के दस्तावेजों, वोटर आईडी, स्कूल रिकॉर्ड और परिवार रजिस्टर में उसका नाम सदराम था। बाद में नौकरी के दौरान वह शहर गया तो उसने अपने नाम के साथ ‘कोली’ सरनेम इस्तेमाल करना शुरू किया। नारायण सिंह का कहना है कि शहर में सदराम नाम पुराना लगने की वजह से उसने सुरेंद्र कोली नाम रखना शुरू किया। उन्होंने नाम बदलकर रहने की बात को गलत बताया।
18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में सुरेंद्र कोली का शव मिला। हरिद्वार सिटी पुलिस अधिकारी शिशुपाल सिंह के मुताबिक, पहली नजर में मामला आत्महत्या का लग रहा था और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की थी।
कोली की मौत के साथ उसकी कानूनी कहानी भले खत्म हो गई हो लेकिन निठारी कांड से जुड़े कई सवाल अब भी उठ रहे हैं। निठारी में आदालतों के कहानी खत्म हो चुकी है लेकिन जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया उनके लिए सवाल शायद अभी वही है, इतने साल बाद भी निठारी के उन अपराधों का पूरा सच आखिर सामने क्यों नहीं आ सका?