हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई तरह के विवाद भी हुए थे। विवादों को देखते हुए DU के प्रशासन ने अगले एक महीने के लिए किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन या रैली पर रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि कहीं पर भी नारेबाजी करने या फिर भाषण देने की अनुमति नहीं है। 17 फरवरी यानी आज से लागू होने वाला यह आदेश अगले एक महीने तक मान्य रहेगा।
DU ने अपने इस आदेश में ट्रैफिक जाम, लोगों की जान को खतरा और शांति भंग जैसे कारण बताए हैं। हाल ही में 13 फरवरी को दिल्ली में लेफ्ट के छात्र संगठन AISA ने UGC के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसी दौरान AISA कार्यकर्ताओं और एक महिला यूट्यूबर में झड़प हो गई थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए कि उनसे छेड़छाड़ की गई। इस मामले में 14 फरवरी को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और अब इसकी जांच की जा रही है।
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क्यों लगाया गया बैन?
DU ने अपने इस आदेश में कहा है, 'सूचना मिली है कि बिना रोक-टोक के कैंपस में होने वाली भीड़, रैलियों और प्रदर्शनों की वजह से ट्रैफिक जाम हो सकता है, लोगों की जान को खतरा हो सकता है और शाति भंग हो सकती है। पूर्व में भी देखा गया है कि ऐसे प्रदर्शनों के आयोजक उसे संभालने में फेल हुए हुए हैं जिसके चलते विश्वविद्यालय के कैंपस में कानून व्यवस्था बिगड़ी है।'
DU ने आगे कहा है कि इस बारे में सिविल लाइन सब डिवीजन के लिए असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर ने 26 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत रैली, धरना, प्रदर्शन या आंदोलन करना प्रतिबंधित है। इसके अलावा, पांच या उससे ज्यादा लोग एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकते। मशाल जैसी नुकसानदायक चीजें नहीं लाई जा सकतीं, ऐसे काम नहीं किए जा सकते जिससे ट्रैफिक के फ्लो में रुकावट आए। साथ ही, कैंपस में भाषण देने और नारेबाजी करने पर भी रोक है।
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क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में होने वाले उत्पीड़न और अत्याचार को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की थीं। इनके खिलाफ सवर्ण जातियों के लोगों ने प्रदर्शन किए और मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। सुप्रीम कोर्ट ने इन गाइडलाइन्स पर रोक लगा दी और नए सिरे से गाइडलाइन्स बनाने को कहा। 13 फरवरी को जो प्रदर्शन हुआ था, उसमें इसी फैसले का विरोध किया जा रहा था।