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प्रसूताओं की मौत, कई डायलिसिस पर, ऑक्सीटोसिन पर WHO के रुख से भारत क्यों परेशान?

कोटा में प्रसूताओं की मौत पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सवाल किया तो इसकी आंच दिल्ली तक पहुंच गई है। आखिर हंगामा क्यों बरपा है? पढ़ें रिपोर्ट।

World Health Organization AI ChatGPT

प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

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राजस्थान के कोटा जिले में 5 मई से 17 मई के बीच जेके लोन अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विंग में सिजेरियन सेक्शन से हुई डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की मौत हो गई। मौत के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत सरकार से एक फार्मा कंपनी की ओर से नकली ऑक्सोटिसन इंजेक्शन की कथित सप्लाई के बारे में जानकारी मांगी है। मई में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की मौत हो गई थी। 

जांच में पता चला कि जॉनसन लेबोरेटरीज कंपनी इसे बनाती है। यह इंजेक्शन असली नहीं था, उसमें दवा की जगह सिर्फ पानी भरा था। प्रसूताओं की मौत के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि देश में दवा की गुणवत्ता बिना किसी नियामक संस्था की जांच के कैसे धड़ल्ले से बिक रही हैं। इन मौतों की मुख्य वजह, नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बताया जा रहा है। ऑक्सीटोसिन वह दवा है जो प्रसव के बाद ज्यादा खून बहने को रोकने के लिए दी जाती है। मेडिकल टर्म में इसे पोस्ट-पार्टम हेमरेज कहते हैं।  

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नकली ऑक्सीटोसिन देने के बाद क्या हुआ?

कोटा के जेके लोन अस्पताल और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी विंग में 5 मई से 17 मई के बीच 5 मौतें हुईं। कई महिलाएं ऐसी हैं जो जिंदगी और मौत से जूझ रहीं हैं। कुछ महिलाएं किडनी की गंभीर समस्या का सामना कर रहीं हैं, कई डायलिसिस पर हैं। 6 सप्ताह बाद भी उनकी हालत बेहतर नहीं हो पाई है।  

कहां-कहां हुए हैं ऐसे मामले?

मौत और गंभीर बीमारियों से जुड़े कुछ मामले जब सामने आए तो स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया। कई दूसरे शहरों में भी ऐसी ही घटनाएं दर्ज की गईं। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी सीजेरियन के बाद छह महिलाओं को किडनी फेल हो गया। दो महिलाओं की मौत हो गई।

 

जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में 20 जून को ऑपरेशन के बाद 8 महिलाएं बीमार पड़ गईं। उनमें से दो को AIIMS जोधपुर रेफर किया गया, लेकिन सबकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। इन सभी मामलों में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया था। 

मौतों पर कितनी गंभीर राजस्थान सरकार?

राजस्थान सरकार को भी मौत और महिलाओं के बिगड़ते स्वास्थ्य की जानकारी है। शुरुआत में इन मौतों पर कुछ बोलने से सरकार इनकार करती रही लेकिन बाद में यह साफ होता गया कि गड़बड़ी बड़े स्तर पर हुई है।

क्या है ऑक्सीटोसिन और क्यों जरूरी है?

डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा, 'ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन आधारित दवाई है। डॉक्टर इसे प्रसव से पहले, जन्म के बाद इसे महिला के शरीर में इंजेक्ट करते हैं। यह दवा, गर्भाशय को उसके पुराने आकार में लाती है। यह खून के बहने को भी नियंत्रित करता है। सीजेरियन डिलीवरी के बाद पोस्ट-पार्टम हेमरेज एक आम लेकिन खतरनाक जटिलता है।'

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डॉ. शाहिद अख्तर:-
अगर दवा असली न हो तो खून का बहाव नहीं रुकता, संक्रमण का खतरा बढ़ता है और किडनी जैसे नाजुक अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। कोटा, बीकानेर और जोधपुर की ज्यादातर प्रभावित महिलाओं में ज्यादा खून बहा और किडनी फेल से उनका निधन हुआ या आज भी गंभीर स्थिति में भर्ती हैं।

नकली दवा आखिर अस्पतालों तक पहुंची कैसी?

राजस्थान के कोटा जिले में 'राजस्थान मेडिकल हॉल' नाम से एक होलसेल डिस्ट्रीब्यूटर है। इस डिस्ट्रीब्यूटर ने जॉनसन लेबोरेटरीज कंपनी से टोसिन 1 मिलिग्राम वाले कुछ इंजेक्शन खरीदे। जॉनसन लोबोरेटरीज कंपनी पंजाब और हिमाचल प्रदेश से संचालित होती है, दोनों राज्यों में इसकी शाखाएं हैं।

डिस्ट्रीब्यूटर ने 9,300 इंजेक्शन खरीदे, लेकिन 10,050 इंजेक्शन बेच दिए। राजस्थान ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी ने इस बैच को नकली घोषित कर दिया। रिपोर्ट में साफ था कि इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन का कोई अंश नहीं मिला। 

और ऐसे बिकता रहा मौत का इंजेक्शन

राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग 19 मई को राजस्थान मेडिकल हॉल पहुंचा। वहां कोई फर्मासिस्ट नजर नहीं आया। रजिस्टर ठीक से नहीं रखा गया था। डिस्ट्रीब्यूटर ने कहा कि जो इंजेक्शन अतिरिक्त हैं, वे सभी बस के जरिए ट्रांसपोर्ट कर लाए गए हैं। विभाग ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना।

अब सरकार ने क्या कार्रवाई की है?

राजस्थान ड्रग लाइसेंसिंग विभाग ने फिलहाल डिस्ट्रीब्यूटर का होलसेल लाइसेंस रद्द कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के ड्रग रेगुलेटर्स के साथ मिलकर जॉनसन लेबोरेटरीज की फैक्टरियों का संयुक्त निरीक्षण किया है। जांच में कई गभीर खामियां नजर आईं हैं।

जॉनसन कंपनी ने क्या गलतियां की हैं?

गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) का कंपनी ने पालन नहीं किया गया। साल 2023 में कंपनी को कुछ दवाइयों को बनाने से रोका गया था लेकिन कंपनी धड़ल्ले से बना रही थी। एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट (API) की शुद्धता का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। तैयार दवा को 2-8 डिग्री सेल्सियस पर रखना चाहिए था लेकिन 27 डिग्री पर इन्हें रखा गया। 

 

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गलतियों के बाद क्या कार्रवाई की गई?

पंजाब और हिमाचल प्रदेश की लाइसेंसिंग अथॉरिटीज ने कंपनी की संबंधित यूनिट्स के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिए। कंपनी को सभी दवाएं वापस लेने का आदेश दिया गया है। केंद्र सरकार ने अपने बचाव में कहा है कि दवाइयों के मामले में जब भी लापरवाही की खबरें सामने आएंगी, शून्य सहिष्णुता नीति पर काम किया जाएगा। 

WHO ने इस केस में क्या कहा है?

WHO ने भारत सरकार से इस मामले पर विस्तृत जानकारी मांगी। WHO जानना चाहता है कि क्या समस्या सिर्फ कोटा या राजस्थान तक सीमित है या अन्य देशों में भी जहां यह दवा सप्लाई हुई है, वहां खतरा है?स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कहा है कि WHO का यह पत्र रूटीन का हिस्सा है। यह नियमित निगरानी का हिस्सा है। इसे उत्पाद या कंपनी के खिलाफ फैसला नहीं माना जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। 

दागदार है जॉनसन लेबोरेटरीज का अतीत

जॉनसन लेबोरेटरीज पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। साल 2023 में ही खराब प्रक्रिया की वजह से कुछ उत्पादों पर यहां रोक लगाई थी। अब पूरे स्टॉक की जांच की जा रही है। सारे उत्पादों को वापस बुलाया गया है। इस केस ने भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। सरकार दावा करती है कि वह गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करवाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पतालों में सप्लाई चेन, स्टोरेज और टेस्टिंग की कमजोरियां सामने आईं हैं। 

दिलासे से आगे कब बात बढ़ पाएगी?

जिन महिलाओं की मौत हुई या जो महिलाएं बीमार हैं, ज्यादातर गरीब परिवार से थीं। इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर थीं। 5 मौतें हुईं हैं, 12 से ज्यादा महिलाएं अभी डायलिसिस पर हैं। स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि कैसे एक खराब दवा चलती रही और किसी को खबर तक नहीं लगी। 

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसार और अन्य अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे संस्थागत असफलता करार दिया है।
 


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