हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को विश्व की महत्वपूर्ण उच्च ऊंचाई वाली सड़क सुरंगों में शामिल 9.02 किलोमीटर लंबी अटल टनल का दौरा किया।
समुद्र तल से 10 हजार फुट से अधिक की ऊंचाई पर निर्मित यह सिंगल-ट्यूब हाईवे टनल हिमालयी क्षेत्र में आधुनिक इंजीनियरिंग, सामरिक कनेक्टिविटी और दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की भारत की क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
राष्ट्रपति के साथ हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता और लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी मौजूद रहीं। अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मंत्री-इन-वेटिंग राजेश धर्माणी, सांसद कंगना रणौत, लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा, उपायुक्त किरण भदाना, जिला प्रशासन के अधिकारी तथा सेना के अधिकारियों ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस अवसर पर मंत्री राजेश धर्माणी ने राष्ट्रपति को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
राज्यपाल ने बताया विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग का उदाहरण
इस अवसर पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अटल टनल को विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस सुरंग ने लाहौल-स्पीति को देश के बाकी हिस्सों के और करीब ला दिया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में निर्मित यह परियोजना भारत की दूरदृष्टि, तकनीकी क्षमता और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध करवाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राज्यपाल ने कहा कि अटल टनल केवल एक सड़क सुरंग नहीं, बल्कि आधुनिक बुनियादी ढांचे और सामरिक विकास की ताकत का प्रतीक है। अत्यंत कठिन हिमालयी परिस्थितियों में इतनी बड़ी परियोजना को पूरा करना देश की इंजीनियरिंग क्षमता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे बुनियादी ढांचे से केवल आवागमन आसान नहीं होता, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में रोजगार, पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विस्तार के अवसर भी बढ़ते हैं।
यह भी पढ़ें: बच्चे को ढाबे पर भूलकर 80 KM आगे चला गया परिवार, पुलिस ने फोन किया तो आया याद
राष्ट्रपति ने जानी सुरंग की तकनीकी खूबियां
दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अटल टनल की निर्माण तकनीक और इंजीनियरिंग विशेषताओं में विशेष रुचि दिखाई। अधिकारियों ने उन्हें सुरंग के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, निर्माण प्रक्रिया तथा कठिन हिमालयी परिस्थितियों में इसके महत्व की जानकारी दी।
राष्ट्रपति ने सुरंग के आसपास के हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य को भी निहारा। बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों और ऊंचे हिमालयी भूभाग के बीच स्थित अटल टनल देश की आधारभूत संरचना और प्राकृतिक विरासत के अनूठे संगम को दर्शाती है।
अटल टनल के निर्माण से मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच संपर्क में बड़ा बदलाव आया है। पहले सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण रोहतांग दर्रा लंबे समय तक बंद रहता था, जिससे लाहौल क्षेत्र का संपर्क प्रभावित होता था। सुरंग ने इस निर्भरता को काफी हद तक कम किया और वर्षभर संपर्क को मजबूत आधार दिया।
सुरंग बनने के बाद लाहौल-स्पीति में पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिली है। मनाली से लाहौल की ओर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबार, होमस्टे, परिवहन और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को नए अवसर मिले हैं। साथ ही सीमा से जुड़े रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच के लिहाज से भी इस सुरंग का महत्व बेहद अहम माना जाता है।
राष्ट्रपति और राज्यपाल ने हिडिंबा मंदिर में की पूजा-अर्चना
अटल टनल के दौरे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मनाली के प्रसिद्ध ढुंगरी स्थित हिडिंबा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और माता का आशीर्वाद लिया। उन्होंने देशवासियों की शांति, समृद्धि, सुख और कल्याण की कामना की।
हिडिंबा मंदिर की यात्रा के दौरान हिमाचल की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली। देवभूमि हिमाचल में सदियों से चली आ रही स्थानीय देव परंपराओं और धार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में हिडिंबा मंदिर का विशेष महत्व है।
यह भी पढ़ें: 47 साल बाद मनाली में ठहरा कोई राष्ट्रपति, इतिहास रच गईं द्रौपदी मुर्मू
राज्यपाल ने लगाया दुर्लभ जिन्को बिलोबा का पौधा
राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने मनाली स्थित वन विश्राम गृह का भी दौरा किया। यहां उन्होंने पौधरोपण गतिविधि में हिस्सा लेते हुए दुर्लभ प्रजाति के जिन्को बिलोबा का पौधा लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल ने हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय का पारिस्थितिक तंत्र बेहद संवेदनशील है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।
अटल टनल बनी हिमाचल की पहचान
राष्ट्रपति का अटल टनल दौरा हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहा। एक ओर जहां यह परियोजना देश की आधुनिक इंजीनियरिंग और सामरिक क्षमता को प्रदर्शित करती है, वहीं दूसरी ओर इसने लाहौल-स्पीति जैसे दुर्गम सीमांत क्षेत्र को पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिए नए अवसर उपलब्ध करवाए हैं।
राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान अटल टनल, हिडिंबा मंदिर और हिमालयी पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों ने विकास, आस्था और प्रकृति संरक्षण, तीनों पहलुओं को एक साथ सामने रखा।