हजार करोड़ का बजट, गिनती के मामलों में सजा, ED के कर्मचारी बढ़ाने की वजह समझिए
पिछले पांच साल में ED का बजट तीन गुना बढ़ चुका है। अब उसका स्टाफ भी 60 प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है ताकि पेंडिंग पड़े केस को जल्द निपटाया जा सके।

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT
पिछले कई साल से सबसे ज्यादा चर्चित केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) है। अलग-अलग दलों के तमाम नेता, कारोबारी और अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी में सबसे आगे यही एजेंसी रही है। अब ED की ताकत को और बढ़ाने के लिए उसके कर्मचारियों और अफसरों की संख्या में एक झटके में लगभग 60 पर्सेंट की बढ़ोतरी कर दी गई है। यह बढ़ोतरी मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को ध्यान में रखकर की गई है। यह भी गौर करने लायक है कि पिछले कुछ साल में ED का बजट तेजी से बढ़ा है और अब सालाना कम से कम एक हजार करोड़ रुपये इसी एजेंसी पर खर्च किए जा रहे हैं।
इस बार ED में हर स्तर पर अधिकारियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी की गई है। चाहे वह कानूनी विभाग हो, एडजुडिकेशन हो या फिर सिस्टम और सिक्योरिटी, हर तरफ पदों की संख्या बढ़ाई गई है। अफसरों के साथ-साथ ग्राउंड ड्यूटी करने वाले यानी दौड़-भाग करने वाले कर्मचारियों, छापमारी करने वाले कर्मचारियों और पूछताछ करने वाले लोगों की संख्या तक में इजाफा किया गया है।
सरकार का कहना है कि बीते कुछ साल में डिजिटल लेन-देन के जरिए धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और फॉरेन एक्सचेंज में गड़बड़ी के मामले बढ़ने से PMLA और FEMA के तहत केस तो खूब दर्ज हो रहे हैं लेकिन आगे की कार्यवाही धीमी हो जा रही है। यही वजह है कि अब पदों की संख्या बढ़ा दी गई है।
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कितने पद बढ़ाए गए?
अडिशनल डायरेक्टर- 10 से बढ़ाकर 24
ज्वाइंट डायरेक्टर- 28 से बढ़ाकर 49
डिप्टी डायरेक्टर- 148 से बढ़ाकर 267
असिस्टेंड डायरेक्टर- 255 से बढ़ाकर 531
एनफोर्समेंट ऑफिसर- 355 से बढ़ाकर 606
असिस्टेंट एन्फोर्समेंट ऑफिसर- 425 से बढ़ाकर 803
ED पर इतना जोर क्यों?
ED को इतनी ताकत देने के पीछे कुछ खास कारण समझ आते हैं। बीते कुछ साल में देखा गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने, लगातार छापेमारी करने और मुकदमे दर्ज करने के बावजूद सजा दिला पाने में ED नाकाम रही है। बहुत सारे मामलों में कानूनी कार्यवाही आगे ही नहीं बढ़ पाई और अभी भी हजारों मामले पेंडिंग हैं। यही वजह है कि एक झटके में ईडी के अफसरों और कर्मचारियों की संख्या 60 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।
इसी के बारे में राज्यसभा सांसद पी पिल्सन ने मार्च 2026 में एक सवाल पूछा था। केंद्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने 17 मार्च 2026 को इसका लिखित जवाब दिया। इस जवाब में उन्होंने ह भी बताया कि 2021-22 में ईडी का बजट 304 करोड़ रुपये था जो हर साल बढ़ता गया और 2025-26 के बजट में ED का कुल बजट 1053 करोड़ से भी ज्यादा रखा गया।
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इसी जवाब में बताया गया कि पिछले पांच साल में 9964 जगहों पर छापेमारी की गई और कुल 903 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी मामलों को मिलाकर पांच साल में कुल 4377 एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की गईं। सबसे ज्यादा 272 लोग 2023-24 में गिरफ्तार किए गए। वहीं सबसे ज्यादा 2855 छापेमारी साल 2025-26 में सिर्फ 28 फरवरी 2026 तक ही हो गई थीं।
छापेमारी, शिकायत और सजा में काफी अंतर
इसी जवाब में बताया गया कि कुल 4377 लोगों के खिलाफ प्रिवेशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (PMLA), 2002 के तहत ECIR दर्ज की गईं। इसी 5 साल में PMLA कोर्ट के सामने सिर्फ 1245 प्रोसेक्यूशन कंप्लेंट (PC) ही दाखिल की गईं। कुल 447 केस में सप्लीमेंट्री प्रोसेक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की गईं। अगर पांच साल में हुई छापेमारी की तुलना में देखें तो ये आंकड़े बहुत कम हैं।
अब अगर इन मामलों पर आए फैसलों की बात करें तो पिछले पांच साल में यानी 28 फरवरी 2026 तक PMLA की विशेष अदालतों ने सिर्फ 59 मामलों में अपना फैसला सुनाया जिसमें 56 मामलों में दोष साबित हुआ और कुल 124 आरोपी दोषी करार दिए गए।
2016-17 से अब तक देखें तो सिर्फ 2023-24 ऐसा रहा जहां ऐसे मामलों में दहाई की संख्या में फैसले आए। वरना उसके पहले 2016-17 में 2, 2017-18 में दो और 2018-19 और 2019-20 में कुल चार-चार मामलों में ही फैसला सुनाया गया। ED ने यह भी बताया कि उसने रिश्वतखोरी के 620 मामलों में भी जांच की और कुल 12295 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।
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क्यों धीमा पड़ जाता है काम?
इसके बारे में खुद ईडी के चीफ राहुल नवीन ने स्वीकार किया था कि कई साल से तमाम केस पेंडिंग पड़े हैं। मई 2025 में ईडी के स्थापना दिवस पर राहुल नवीन ने अफसरों को संबोधित करते हुए कहा था, 'हम इसे स्वीकार करते हैं कि PMLA के बहुत सारे केस कई साल से पेंडिंग पड़े हैं। इसलिए इस साल हमारा लक्ष्य जांच पूरी करने और PC फाइल करने पर होना चाहिए।'
उन्होंने यह भी माना कि 2014 के बाद ED के पास दर्ज होने वाले केस की संखअया कई गुना बढ़ गई है। राहुल नवीन ने यह भी बताया था कि कैसे 2005 में PMLA लागू होने के सात साल बाद यानी 2012 में ईडी पहली प्रोसेक्यूशन कंप्लेंट फाइल कर पाई थी।
इन्हीं वजहों को ध्यान में रखते हुए पिछले कुछ साल में ED का बजट भी तेजी से बढ़ाया गया है। अब ईडी के अफसरों की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा किया गया है ताकि ना सिर्फ केस दर्ज हों बल्कि उनकी जांच करके मामला कोर्ट तक पहुंचाया जाए और उन मामलों में दोषियों को सजा भी दिलाई जाएगी।
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