logo

ट्रेंडिंग:

'बहुत गंभीर मामला है...', ED बनाम ममता पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?

कोलकाता में I-PAC ऑफिस और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर छापेमारी के दौरान जो बवाल हुआ था, उस पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई।

mamata banerjee

ममता बनर्जी और सुप्रीम कोर्ट। (Photo Credit: PTI)

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हाल ही में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर ED ने छापा मारा था। छापेमारी के दौरान ड्रामा तब बढ़ गया था, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, प्रतीक जैन के घर पहुंच गई थी और कुछ फाइलें उठाकर ले आई थीं। इस पूरे मामले पर ED सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। 


ED की याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ED की छापेमारी के बीच में सीएम ममता बनर्जी के पहुंचने को 'बहुत गंभीर' बताया है। बेंच ने कहा, 'यह बहुत गंभीर मामला है। हम नोटिस जारी करेंगे। हमें इसकी जांच करनी होगी।'


सुप्रीम कोर्ट ने ED की छापेमारी के मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट में जो अफरा-तफरी हुई थी, उसे परेशान करने वाला बताया। 

 

यह भी पढ़ें-- 'देखो मिट रहा क्या?' राज ठाकरे ने आरोप लगाए तो स्याही मिटाकर दिखाने लगे फडणवीस

ED ने क्या-क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में ED की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि छापेमारी के दौरान बंगाल सरकार ने जो दखल किया, वह बहुत ही चौंकाने वाला पैटर्न दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी ED ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया, ममता बनर्जी ने उसमें दखल दिया है।


उन्होंने कहा, 'यह एक बहुत ही चौंकाने वाला पैटर्न दिखाता है।' उन्होंने तर्क दिया है इससे इस तरह के कामों को ही बढ़ावा मिलेगा और जांच एजेंसियों का मनोबल टूटेगा। उन्होंने कहा, 'राज्यों को लगेगा कि वे घुस सकते हैं, चोरी कर सकते हैं और फिर धरने पर बैठ सकते हैं। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए, जो अधिकारी वहां साफ तौर पर मौजूद थे, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए।'

 

 

उन्होंने तर्क दिया कि इससे पता चलता है कि I-PAC के ऑफिस में आपत्तिजनक चीजें पड़ी थीं। उन्होंने ED की तरफ से कहा, 'हम यहां अपने अधिकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। हम कानून के दायरे में काम कर रहे हैं और निजी फायदे के लिए कुछ भी जब्त नहीं करते हैं।'


एसजी तुषार मेहता ने कलकत्ता हाई कोर्ट में मची अफरा-तफरी का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ED की याचिका पर सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील और भीड़ हाई कोर्ट में घुस आई और मामला स्थगित कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'ऐसा तब होता है जब भीड़तंत्र लोकतंत्र की जगह ले लेता है।'


वहीं, बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि सुनवाई पहले कलकत्ता हाई कोर्ट में की जानी चाहिए थी।

 

 

कपिल सिब्बल ने रेड की वीडियो रिकॉर्डिंग का जिक्र करते हुए कहा, 'ED सभी डिजिटल डिवाइस ले गई थी। यह आरोप कि सीएम ममता बनर्जी ने सभी डिवाइस ले लिए, झूठ है। इसे ED के पंचनामे से साबित किया जा सकता है।'


उन्होंने सवाल करते हुए कहा, 'कोयला घोटाले में आखिरी बयान फरवरी 2024 में रिकॉर्ड किया गया था। तब से ED क्या कर रही थी? चुनावों के बीच इतनी जल्दबाजी क्यों?'

 

यह भी पढ़ें-- राजस्थान: BJP छोड़ने की सिर्फ बात ही कही थी, सुबह-सुबह ACB ने मार दिया छापा

क्या है पूरा मामला?

8 जनवरी को ED ने कोलकाता में I-PAC ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। इसी दौरान ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं और एक ग्रीन कलर की फाइल लेकर आ गईं। इसके बाद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED उनकी पार्टी से जुड़ी जानकारियां ले रही है।


I-PAC एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो टीएमसी का चुनावी कैंपेन संभालती है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन टीएमसी के आईटी सेल के हेड भी हैं। 


ED की छापेमारी के बाद I-PAC और ममता सरकार कलकत्ता हाई कोर्ट चली गई थी। वहीं, ED ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। ED ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार को सस्पेंड करने की मांग की है। साथ ही छापेमारी के दौरान मौजूद बंगाल पुलिस कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap