डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन ऐक्ट, 2023 यानी DPDP ऐक्ट के कुछ प्रावधानों को कई मीडिया ने चुनौती दी थी। इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि इस कानून के प्रावधान ऐसे हैं जिनके चलते पत्रकार अपना काम नहीं कर पाएंगे।
याचिका दायर करने वाले संस्थानों का कहना था कि DPDP ऐक्ट के चलते पत्रकारों के सोर्स प्रभावित होंगे और न्यूजरूम बंद हो जाएंगे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि DPDP ऐक्ट के तहत पत्रकारों को उसी शख्स की अनुमति लेनी होगी जिसके खिलाफ वे खोजी पत्रकारिता कर रहे होंगे। याचिका में कहा गया है कि इससे खबरें प्रभावित होंगी। साथ ही, यह भी कहा गया है कि पर्सनल डेटा के नाम पर तथ्यों और खबरों को हटाने की शर्त होगी जिससे पत्रकारिता प्रभावित होगी।
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सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान मीडियां संस्थानों की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि इन नियमों के चलते पत्रकार उन लोगों पर आश्रित हो जाएंगे जिन पर स्टोरी करनी होगी। अगर वे अनुमति देंगे तो स्टोरी होगी वरना नहीं होगी। उनका तर्क है कि इससे न्यूजरूम बंद हो जाएंगे।
इस याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की। CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान मौखिक तौर पर कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता मीडिया संस्थान खुद ही 'डोमेन एक्सपर्ट' हैं और वही इस मामले में केंद्र सरकार को सलाह दे सकते हैं कि कैसे आम नागरिकों के अधिकार का संरक्षण करते हुए कानून का उल्लंघन कैसे रोका जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मीडिया के अधिकारों को लेकर संतुलन बनाने की जरूरत है। इस पर मीडिया संस्थानों के वकील ने कहा कि इससे एक 'प्री सेंसरशिप रिजीम' की शुरुआत हो जाएगी।