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'सारा पैसा भगवान के फंड में जमा करें', बांके बिहारी मंदिर केस में सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दान से जुड़े मामले में सख्त निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने मंदिर की प्रबंधकीय समिति से दान लेने और उसका हिसाब-किताब रखने का एक पारदर्शी सिस्टम बनाने का निर्देश दिया।

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट। (Photo Credit: Supreme Court)

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सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दान से जुड़े मामले में सख्त निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने मंदिर की प्रबंधकीय समिति से दान लेने और उसका हिसाब-किताब रखने का एक पारदर्शी सिस्टम बनाने का आदेश दिया। इसके अलावा अदालत ने कहा कि दान का 'एक-एक पैसा' सबसे पहले तय दानपात्रों या ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से देवता के फंड में जमा किया जाना चाहिए।

 

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर सेवायत या किसी व्यक्ति ने इस प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास किया तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर से जुड़ा कोई भी व्यक्ति खजाने में चढ़ावा जमा होने से पहले उसे अपने पास नहीं रखेगा। दान लेने और हिसाब किताब रखने के लिए एक पारदर्शी सिस्टम बनाया जाए, ताकि गड़बड़ियों को रोका जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी चढ़ावों का सही हिसाब-किताब रखा जाए।

 

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की बेंच ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने मंदिर समिति को एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। कहा कि भक्तों का चढ़ावा सीधे दान पेटी या ऑनलाइन कोष में जाना चाहिए। इसमें कोई सेवादार हस्तक्षेप नहीं करेगा।

 

दरअसल, मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने वीडियो और तस्वीरों के हवाले से सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दान पेटी के आगे तीन लोग खड़े हैं। यह लोग भक्तों का चढ़ावा दानपेटी में डालने की बजाय पॉलीथीन बैग में भर रहे हैं। मंदिर परिषर में ऑनलाइन दान के लिए लगे क्यूआर कोड को भी मिटा दिया गया। इससे भक्त सीधे दान नहीं कर पा रहे हैं। 

 

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मंदिर के देवता का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्ष ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि यह राशि सिर्फ भोग के लिए जुटाई गई थी। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि चढ़ावा पहले भगवान को जाना चाहिए। इसके बाद ही सेवक को इसका हिस्सा मिल सकता है। इसके बाद अदालत ने दान की राशि सबसे पहले दानपेटी या ऑनलाइन मंदिर कोष में जमा करवाने का निर्देश दिया। 

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