logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'अपराधियों के मन में मरने का डर जरूरी', महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को रोकने के लिए अपराधियों में डर जरूरी है। पुलिस ऐसे मामलों में सख्ती से काम करे।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट। Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते बलात्कार और दूसरे अपराधों पर स्वत: संज्ञान वाले एक केस में सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस जे बी पारदीवाला ने कहा कि जब तक अपराधियों के मन में डर नहीं बनेगा, ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों के मन में यह डर होना चाहिए कि अब कुछ किया तो मारे जाएंगे।

जस्टिस पारदीवाला ने यह भी कहा कि ऐसा अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह सख्ती बरते। सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि अगर डर नहीं होगा तो अपराध पर लगाम नहीं लगेगी।

जस्टिस जेबी पारदीवाला, सुप्रीम कोर्ट:-
जब तक आप अपराधियों के मन में यह भय पैदा नहीं करते हैं कि अब कुछ किया तो मर जाऊंगा, तब तक, आप ऐसे अपराधों पर लगाम नहीं लगा सकते हैं।

यह भी पढ़ें: 'UPI चार्ज किस बात का?' MDR पर सवाल पूछा लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई

मानवाधिकार संगठनों पर कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पुलिस को बहुत सख्त रहना चाहिए। इस पर कुछ लोग संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देंगे। ये वे मानवाधिकार संगठन हैं जो अपराधियों के साथ बुरे बर्ताव का विरोध करते हैं। अनुच्छेद 21, जीवन के अधिकार से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अधिकारी ऐसे संगठनों की परवाह किए बिना काम कर सकते हैं। रेप जैसे जघन्य अपराध करने वालों पर कार्रवाई में वे सख्ती दिखा सकते हैं।

'त्योहारों के बीच सर्तक रहे पुलिस'

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर पुलिस को आने वाले त्योहारों के दौरान खास सतर्क रहने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे मौकों पर असामाजिक तत्व और गुंडे ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए पुलिस को पहले से चौकस रहना होगा।

'त्योहारों में मौका तलाशते हैं अपराधी'

कोर्ट ने साफ कहा कि इन त्योहारों में अपराधी मौका तलाशते हैं। इसलिए पुलिस को ऐसा माहौल बनाना होगा कि अपराधियों के मन में डर बैठ जाए। अगर कोई गलत काम करेगा तो उसे सजा जरूर मिलेगी, यह संदेश मजबूत होना चाहिए।

यह भी पढ़ें: 'संदेश जाना चाहिए...', सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी शिवसेना पार्षद की जमानत

'देश में अपराध रोकने की है असली जरूरत'

कोर्ट ने यह भी कहा कि अपराध होने के बाद आरोपी को पकड़ना ही काफी नहीं है। असली जरूरत अपराध को होने से रोकने की है। कोर्ट के आदेशों को जमीन पर लागू करना और पहले से सुरक्षा के इंतजाम करना ज्यादा जरूरी है।

'रेप सहने वाली हमारी मां-बहन जैसी'

महिलाओं की सुरक्षा पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि हर महिला जो बलात्कार जैसी घटना से गुजरती है, वह हमारी बहन और मां जैसी है। यह दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। कोर्ट ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे इस मौके पर पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ आगे आएं।

'अवैध दुकानों पर दिखाई जाए सख्ती'

कोर्ट ने 2012 के निर्भया मामले का जिक्र भी किया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में हजारों अवैध खाने-पीने की दुकानें चल रही हैं, जिनमें कई जगह शराब भी परोसी जाती है। ऐसी जगहों पर भी नजर रखने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि निर्भया मामले में चार लोग एक ऐसी ही जगह खा-पीकर बस में चढ़े और अपराध किया था। इसलिए ऐसी अवैध दुकानों पर भी सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए।

 

Related Topic:#supreme court

और पढ़ें