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'बिरयानी खाना अपराध नहीं', गंगा नदी में इफ्तार पार्टी पर बोले जस्टिस भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जज ने हाल की सुनवाई के दौरान कहा कि गंगा नदी पर चिकन खाना कोई अपराध नहीं है। इसे रोकने के लिए कोई कानून नहीं बनाया गया है। ऐसे मामले में आरोपी को जेल में कैद करना वाजिब नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट, Photo Credit: Supreme Court

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के बीच इफ्तार पार्टी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इफ्तार पार्टी करने वाले युवकों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर गंगा नदी पर चिकन बिरयानी खाने का आरोप लगा था। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि गंगा नदी पर चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है। साथ ही, इसे रोकने के लिए कोई कानून भी नहीं बनाया गया है, इसलिए युवकों को कई महीनों तक जेल में रखना वाजिब नहीं है।

 

यह मामला इसी साल मार्च महीने का है, जब 14 युवक नाव में सवार होकर इफ्तार पार्टी कर रहे थे। उन सभी को चिकन बिरयानी खाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने शनिवार, 25 जुलाई को कोर्ट रूम में अपनी टिप्पणी की। जानकारी के लिए बता दें कि मामले के आरोपियों को कुछ महीने बाद जेल से जमानत मिली थी। इसी पर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने नाराजगी जताई। अब सवाल उठता है कि जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने क्या कहा था।

 

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क्या है पूरा मामला?

 

2026 के मार्च महीने में वाराणसी में गंगा नदी पर 14 लड़कों ने इफ्तार पार्टी की थी। इन लोगों पर आरोप लगा कि उन्होंने न सिर्फ गंगा नदी के बीच चिकन बिरयानी खाई, बल्कि चिकन की हड्डियां भी नदी में फेंकीं। इसी आरोप के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। कुछ महीने बाद मई में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने युवकों को जमानत दे दी थी।

 

 जज ने क्या कहा?

 

इफ्तार पार्टी की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने कहा, 'ऐसे मामले में क्या आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती, जो असल में कोई जुर्म भी नहीं है? मेरे ख्याल से चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है। ऐसे में आरोपियों को गिरफ्तार करना और उन्हें कई महीनों तक जेल में रखना क्या सही है?'

 

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इसके अलावा जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अपने विचार रखना सभी नागरिकों का मूलभूत अधिकार है। यदि छात्र अपने कॉलेज कैंपस में शांतिपूर्ण तरीके से अपने विचार रखते हैं और विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। इसके बाद 30 से 40 दिनों तक उन्हें जमानत भी नहीं मिलती।


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