उत्तर प्रदेश सरकार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों से जुड़े विवरणों को सरकार बारीकी से जांच करेगी। अगर कोई भी हिंसक गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो उसकी नौकरी की राह मुश्किल हो सकती है। सरकार सत्यापन से जुड़े नियमों की सख्त करने जा रही है। जो लोग सरकार के खिलाफ 'रिजीम चेंज' के मकसद से हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाएंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक, रिजीम चेंज की मांग को लेकर विपक्ष की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन्हीं प्रदर्शनों में कुछ जगहों पर हिंसा हुई थी, जिसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। नियुक्ति विभाग के सचिव एम देवराज ने यह आदेश जारी क्या है। आदेश में कहा गया है कि यह आदेश सरकारी विभाग, कॉर्पोरेशन, परिषद और स्थानीय निकायों में होने वाली सीधी भर्तियों पर लागू होगा।
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'अगर हिंसक प्रदर्शन में शामिल हुए तो नहीं मिलेगी नौकरी'
आदेश में कहा गया है, 'किसी व्यक्ति को सिर्फ उसकी राजनीतिक विचारधारा की वजह से नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। जो लोग ऐसे संगठन के सदस्य हैं जिनका मकसद हिंसा फैलाना है, हिंसा के जरिए मौजूदा तंत्र को बदलना है, उन्हें सरकारी भर्तियों के लिए अयोग्य माना जाएगा।'
सरकार से अलग विचारधारा की वजह से नहीं छिनेगी नौकरी
सरकार ने अपने आदेश में साफ कहा है कि सिर्फ राजनीतिक तौर पर अलग विचारधारा अपनाने के लिए किसी को अयोग्य नहीं ठहाराया जाएगा। FIR दर्ज होने या चांज लंबित होने से भी कोई आवेदक अपने आप आयोग्य नहीं घोषित कर दिया जाएगा।
नियुक्ति विभाग के आदेश में यह साफ है कि राजनीतिक सोच की वजह से नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि विचारधारा की ओट में हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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क्यों जारी हुआ है यह आदेश?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (
SIR
) के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। 1 नवंबर को कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष चलो दिल्ली रैली निकाल रहा है। 2 अक्तूबर से ही विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप लग रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में ही धांधली हो रही है, चुनाव आयोग को जवाबदेही तय करनी होगी। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन में हिंसा भी हुई है। अब ऐसी किसी अनहोनी से बचने के लिए यूपी सरकार न पहले यह फैसला लिया है।