जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में हैं। दोनों दोनों नेताओं ने अहदाबाद के साबरमती आश्रम में पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी और फ्रीडरिष मैर्त्स साबरमती रिवरफ्रंट पर पहुंचे और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया। गांधीनगर में महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में दोनों नेता द्विपक्षीय कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। फ्रीडरिष मैर्त्स का यह पहला भारत दौरा है।
फ्रीडरिष मैर्त्स का भारत दौरा बेहद खास माना जा रहा है। भारत और जर्मनी के बीच व्यापार और उद्योग को लेकर अहम चर्चा होने वाली है। व्यापार, रक्षा और संस्कृति जगत के लिए यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। फ्रीडरिष मैर्त्स की गिनती भी दक्षिणपंथी नेताओं के तौर पर होती है। वह जर्मनी के क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक यूनियन (CDU) के नेता हैं।
भारत और जर्मनी के बीच 9.3 अरब डॉलर का सबमरीन समझौता हो रहा है। जर्मनी की मदद से भारत की समुद्री ताकत में इजाफा होगा। जर्मनी और भारत मिलकर पनडुब्बियां बनाएंगे। दोनों देशों के लिए रणनीतिक तौर पर यह बेहद अहम माना जा रहा है। भारत, अपनी समुद्री शक्ति के विस्तार पर जोर दे रहा है। जर्मनी के लिए यह सौदा अहम माना जा रहा है। भारत रक्षा मामलों में रूस पर निर्भर है। यूरोप में भारत को एक नया पार्टनर भी मिल रहा है।
साबरमती में प्रधानमंत्री मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स। Photo Credit: PTI
और किन बातों पर होगी चर्चा?
फ्रीडरिष मैर्त्स दो दिनों के भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आमंत्रित किया था। फ्रीडरिष मैर्त्स और पीएम मोदी अब निवेश, व्यापार, तकनीक, शिक्षा और रक्षा मामलों पर चर्चा करने वाले हैं। मंगलवार को फ्रीडरिष मैर्त्स बेंगलुरु का दौरा करेंगे।
जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने पंतग महोत्सव का उद्घाटन किया। Photo Credit: PTI
कितना बड़ा है भारत-जर्मनी का व्यापार?
भारत और जर्मनी के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 30 बिलियन डॉलर से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है। जर्मनी की सैकड़ों कंपनियां भारत में हैं, भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में तेजी से व्यापार बढ़ा रही हैं। भारत ग्लोबल ट्रेड और मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है, ऐसे में जर्मनी और भारत के रिश्तों के और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। जर्मनी ने साल 2024 में स्किल्ड भारतीयों के लिए हर वर्ष मिलने वाले वीजा की संख्या 20 हजार से बढ़ाकर 90 हजार किया था। भारतीय भी जर्मनी के आर्थिक विकास में अहम मदद कर रहे हैं।